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जल है ही नहीं और नगर विकास विभाग बनायेगा 21 जलमीनार  

जलमिनार के निर्माण और पाईप लाईन बिछाने पर करीब 950 करोड़ रुपये खर्च होंगे.

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तथ्य

–              रांची शहर में पानी सप्लाई के तीन श्रोत गोंदा डैम, रुक्का डैम व हटिया डैम हैं.

–              60 के दशक में बनाये गये इन तीनों डैमों के बाद पिछले 60 सालों में नये डैम नहीं बनाये गये.

–              वर्तमान में जिन जलमिनारों से पानी की सप्लाई होती है, उससे ही फरवरी में पानी खत्म हो जाते हैं.

–              हाल के वर्ष में विभाग ने शहर में पांच जल मिनार बनवायें, लेकिन पानी की कमी के कारण उससे सप्लाई नहीं होती.

नगर विकास विभाग का दावाः-

–              रांची नगर निगम के 55 वार्ड में 24 घंटे उपलब्ध कराया जायेगा पानी.

–              वर्ष 2037 तक की जरुरत को ध्यान में रखकर बनायी जा रही है योजना.

–              अमृत योजना के तहत 21 जलमीनार  को निर्माण व पाईप लाइन बिछाने पर खर्च होगा 950 करोड़ रुपया.

–              अभी डेढ़ दर्जन जल मिनार से होता है 40 एमजीडी पानी की सप्लाई.

–              जेएनआरयूएम के तहत ली गयी पुरानी योजनाएं अब भी लंबित हैं.

उठ रहे हैं सवाल

–              जब पानी के नये श्रोत की तलाश किये ही नहीं गये हैं, तो फिर जो जलमीनार  बनेंगे उसके लिये पानी कहां से आयेगा.

–              जब पानी की उपलब्धता ही नहीं है, तब जलमिनार बनाकर क्या होगा.

–              जो जलमीनार  बनाये जायेंगे, उससे आम लोगों को लाभ मिलेगा नहीं तो किसको लाभ मिलेगा.

–              कहीं ऐसा तो नहीं कि सिर्फ डीपीआर बनाने और जलमीनार  बनाने का टेंडर देने के लिए योजना बनायी गयी है.  

Ranchi:  नगर विकास विभाग ने वर्ष 2037 तक पानी की जरुरत को ध्यान में रखते हुए रांची में 21 जलमीनार  बनवाने की योजना तैयार की है. ताकि राजधानी के सभी 55 वार्ड में 24 घंटे पानी की सप्लाई की जा सके. तीन दिसंबर को दैनिक भास्कर में छपी खबर के मुताबिक, 21 जलमीनार  के निर्माण के लिये डीपीआर तैयार करवाया जायेगा. जलमीनार  के निर्माण और पाईप लाईन बिछाने पर करीब 950 करोड़ रुपये खर्च होंगे. रांची शहर में पानी सप्लाई के हालात, पानी की उपलब्धता और आधारभूत संरचना की जो स्थिति है, उससे विभाग की इस योजना पर संदेह होता है. क्योंकि रांची शहर में पानी सप्लाई के सिर्फ तीन श्रोत हैं. गोंदा, रुक्का और हटिया डैम. इन तीनों डैमों की स्थिति यह है कि फरवरी-मार्च आते-आते पानी खत्म होने लगता है और पानी की राशनिंग शुरु करनी पड़ती है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब पानी है ही नहीं तो जलमीनार बना करके भी क्या होगा. 950 रुपये की यह योजना पानी की कमी के कारण बेकार ही पड़ी रहेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि विभाग को पहले पानी की व्यवस्था करनी चाहिए. क्योंकि पानी ही उपलब्ध नहीं होगा, तो जलमीनार और पाईप लाईन का इस्तेमाल कैसे होगा.

क्या है योजना

झारखंड सरकार राजधानी रांची में 2021 तक 24 घंटे पानी उपलब्ध करायेगी. रांची शहर की 13 लाख की आबादी को 60 के दशक में बने तीन जलाशयों (रुक्का, गोंदा और हटिया) से पीने के पानी की आपूर्ति की जा रही है. इन्हीं जलाशयों से रांची नगर निगम के 55 वार्ड में पानी पहुंचाने की भारी-भरकम योजना बनायी गयी है. 950 करोड़ की लागत से अमृत योजना के अंतर्गत रांची शहर के नामकुम, कोकर, पुरुलिया रोड, कांटाटोली, महात्मा गांधी रोड, चुटिया, मोरहाबादी के एदलहातू, तुपुदाना और अन्य जगहों में 21 नये ओवरहेड पानी के टंकी बनाये जायेंगे. सूत्रों का कहना है कि सारा कुछ कांट्रैक्टर कंपनी और संवेदकों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है. सरकार यह कह रही है कि इससे जल संकट समाप्त हो जायेगा. 2037 तक रांची की आबादी को लेकर योजना बनायी गयी है. योजना के लिए एशियाई विकास बैंक से कर्ज लिया जायेगा. राज्य योजना से पैसे उपलब्ध कराये जायेंगे. नगर विकास विभाग के सचिव अजय कुमार सिंह ने योजना का विस्तृत रिपोर्ट बनाने का निर्देश दिया है. ताकि इसको लेकर निविदा और अन्य प्रक्रियाएं पूरी की जा सकें.

जेएनयूआरएम की योजना अब तक पूरी नहीं

रांची शहरी जलापूर्ति के फेज-1 का काम पूरा नहीं हो पाया है. 385 करोड़ की योजना पर एलएनटी काम कर रही है, यह योजना 2008-09 में जवाहर लाल नेहरू शहरी पुनरुद्धार योजना के तहत ली गयी थी. 2010 में हैदराबाद की कंपनी आइवीआरसीएल को 283 करोड़ में काम दिया गया था. कंपनी को 2013 में काली सूची में डालते हुए दुबारा टेंडर निकाला गया. इसमें एलएनटी को 385 करोड़ का काम बचे हुए कार्य के लिए दिया गया. योजना में पूर्व के 27 वार्डों में नौ छूटे वार्डों में पानी पहुंचाने की योजना बनी थी. इसमें हटिया, तुपुदाना, सिंहमोड़, अरगोड़ा, पुनदाग, ललगुटूवा, 55 सेट, बिजली कालोनी डोरंडा के इलाकों को शामिल किया गया था.

गरमी के दिनों में तीनों डैमों का गिरता है जल स्तर

गरमी के दिनों में इन तीनों डैमों का जल स्तर काफी गिर जाता है और इसके कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण बदस्तूर जारी है. इससे पानी का भंडारण भी लगातार कम हो रहा है. डैमों में पानी का स्तर दिसंबर माह से ही कम होना चालू हो जाता है. फिलहाल 18 से अधिक जलमिनारों से 40 एमजीडी (मिलियन गैलन डेली) पानी की आपूर्ति की जा रही है. हटिया डैम का जल स्तर 2009 में इतना कम हो गया था कि डैम से दो वर्षों तक लगातार पानी की आपूर्ति की कटौती की गयी थी. सरकार की तरफ से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नागफेनी (गुमला) और कर्रा के कारो नदी से रांची तक पानी लाने की योजना बनायी गयी थी. यह योजना फाइलों में ही बंद हो गयी.

अमृत योजना में ठेकेदार कंपनी ही देंगे पानी का कनेक्शन

अमृत योजना के तहत ठेकेदार कंपनी जो पाइपलाइन बिछाने और पानी की टंकी बनायेगी, उसे ही पांच वर्षों के लिए योजना का रख-रखाव करना होगा. यही कंपनी पांच वर्षों तक नया कनेक्शन उपलब्ध करायेगी. निजी प्लंबरों को इसमें नहीं जोड़ा जायेगा. सभी घरों में कांट्रैक्टर कंपनी स्मार्ट मीटर लगाकर खुद बिलिंग भी करेगी.

कहां-कहां है जलमीनार  

राजधानी के अधिकतर हिस्सों में पेयजल और स्वच्छता विभाग की ओर से जलमीनार बनवाया गया है. अब जलापूर्ति व्यवस्था के आधारभूत संरचना का रख-रखाव का काम नगर निगम खुद कर रही है. राजधानी में मोरहाबादी, ईस्ट जेल रोड, चर्च रोड, मारवाड़ी स्कूल कैंपस, पिस्का मोड़, रातू रोड चौक, हिनू, सीआइएसएफ कैंपस, मेकॉन, डोरंडा बाजार, 55 सेट, पुनदाग, अरगोड़ा, अशोकनगर, एयरपोर्ट, तुपुदाना, सिंहमोड़, रिम्स परिसर, नार्थ ऑफिस पाड़ा, प्रोजेक्ट भवन, हटिया जलागार में जलमीनार बने हुए हैं. इन सभी जलमीनार  की क्षमता दो लाख गैलन पानी के भंडारन की है.

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