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जल स्रोत है ही नहीं और पानी पहुंचाने के लिए सरकार खर्च कर रही है 290.88 करोड़

अगले एक साल में एक लाख लोगों को पानी पिलाने की बनायी स्कीम

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Deepak

Ranchi : झारखंड सरकार राजधानी रांची में जलापूर्ति योजना का विस्तार नौ साल में भी पूरा नहीं कर पायी. 2009-10 में जवाहर लाल नेहरू शहरी विकास पुनरुद्धार योजना ली गयी थी. इसमें रांची शहर के चार लाख की आबादी को पीने का पानी पहुंचाने की भारी-भरकम योजना नगर विकास विभाग ने ली थी. इस योजना का क्रियान्वयन पेयजल और स्वच्छता विभाग को सौंपा गया. हैदराबाद की कंपनी आइवीआरसीएल को 256 करोड़ की योजना का कार्यादेश दिया गया. 24 महीने में योजना का काम पूरा करना था. सरकार ने सितंबर 2013 में आइवीआरसीएल को यह कहते हुए काली सूची में डाल दिया, कि उसने निर्धारित समय में 30 फीसदी से कम उपलब्धि हासिल की. इसके बाद राज्य मंत्रिमंडल की तरफ से एलएनटी को बचे हुए काम का कार्यादेश दिया गया. 2014-15 में एलएनटी को 290.88 करोड़ का काम दिया गया. यह काम भी 24 महीने में पूरा नहीं हो पाया. अब अमृत योजना के तहत रांची के एक लाख घरों तक पानी पहुंचाने की घोषणा की गयी है. वह भी 2020 तक. सरकार की योजना में न तो नया डैम बनाया गया है और न ही जल स्त्रोत का कोई आधार, जहां से पानी लाया जायेगा.

रांची शहरी जलापूर्ति का हाल

जेएनयूआरएम के तहत रांची शहरी जलापूर्ति फेज-1 के अंतर्गत रूक्का डैम में 110 मिलियन लीटर प्रति दिन क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाना था. यहीं पर इंटेक वेल भी बनाया जाना था. साथ ही साथ हटिया, डोरंडा के 56 सेट, ललगुटूवा, पुनदाग, अरगोड़ा समेत छह जगहों पर पीने के पानी का ओवरहेड टैंक बनाया जाना था. 300 किलोमीटर से अधिक दूरी तक पाइपलाइन भी बिछाया जाना था. ललगुटूवा में अब तक ओवरहेड टैंक नहीं बन पाया है. इसके अलावा इंटेकवेल का काम भी अब तक लटका हुआ है. पहले से रांची शहर में 21 से अधिक जलमिनार के जरिये 30 मिलियन गैलन प्रति दिन की आपूर्ति नगर निगम क्षेत्र के 80 फीसदी हिस्से में की जा रही है.

2010 में मुरहू और नागफेनी से हटिया डैम तक पानी लाने की योजना बनी थी

2010 में राज्य सरकार की तरफ से खूंटी के मुरहू और गुमला के नागफेनी से पानी रांची तक लाने की योजना बनी थी. पेयजल और स्वच्छता विभाग, योजना विभाग और नगर विकास विभाग तथा जल संसाधन विभाग की उच्च स्तरीय टीम ने दोनों जगहों का दौरा भी किया. टीम ने मुरहू की योजना को दरकिनार कर दिया. नागफेनी से पानी लाने की योजना को आगे बढ़ाये जाने की अनुशंसा भी की. यह योजना फाइलों में ही सीमित रह गयी.

60 के दशक में बने जलाशयों के भरोसे इतरा रही है सरकार

राज्य सरकार 60 के दशक में बने अधिकांश जलाशयों पर इतरा रही है. इसमें राजधानी के हटिया, गोंदा और रूक्का डैम शामिल हैं. इन तीनों जलाशयों का निर्माण उस समय 50 हजार से एक लाख की आबादी की जरूरत को देखते हुए किया गया था. रुक्का डैम के पानी का उपयोग सिकिदरी हाईडल बिजली प्रोजेक्ट के लिए भी किया जाता है. अब राजधानी रांची की शहरी आबादी 13 लाख से ज्यादा है. अब भी पुराने डैमों के भरोसे सभी गली-मुहल्लों में पाइपलाइन बिछाया जा रहा है. सरकार के पास पुराने जलाशयों के जिर्णोद्धार और डैम के कैचमेंट एरिया से अतिक्रमण हटाने की कोई योजना नहीं है.

नगर विकास विभाग का नया पैंतरा, 2020 तक हजारीबाग, धनबाद में भी पानी पहुंचायेंगे

नगर विकास विभाग अब अमृत योजना से हजारीबाग, रांची, धनबाद और आदित्यपुर में 2.50 लाख घरों तक जलापूर्ति कनेक्शन देगी. 15 सौ करोड़ से ज्यादा की इन सभी योजनाओं को नगर विकास विभाग की एजेंसी झारखंड शहरी आधारभूत संरचना निगम (जूडको) की तरफ से पूरा कराया जा रहा है. हजारीबाग में एलएनटी, धनबाद में श्रीराम कंस्ट्रक्शन, आदित्यपुर में जिंदल को काम दिया गया है. हजारीबाग में वर्तमान में हजारीबाग झील से शहरी जलापूर्ति की जाती है, वहीं धनबाद में दामोदर नदी और मैथन से पीने का पानी लाया जाता है. आदित्यपुर में खरकई नदी से पीने के पानी की आपूर्ति वर्तमान में की जाती है. गरमी में हजारीबाग और आदित्यपुर में पानी का मुख्य भंडारन इलाका सूखे की चपेट में आ जाता है.

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