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डॉ अंबेडकर का नहीं, मोदी, शाह और रघुवर का चल रहा है कानून, सरकार फाड़कर जला दे संविधान को : हेमंत सोरेन

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Ranchi : भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के खिलाफ विपक्ष और सामाजिक संगठनों द्वारा पांच जुलाई को बुलाये झारखंड बंद को झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने बेहद सफल बताया है. सरकार पर लोकतंत्र का हनन कर गुंडागर्दी करने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार जब डॉ अंबेडकर द्वारा बनाये संविधान को मानती ही नहीं है, तो उसे राष्ट्रपति और राज्यपाल के यहां संविधान को ले जाकर फाड़कर जला देना चाहिए. राज्य में डॉ अंबेडकर की जगह अमित शाह, नरेंद्र मोदी और रघुवर सरकार का कानून चल रहा है. हेमंत ने कहा कि बंद के दौरान पूरे प्रदेश के गांव से शहर तक के लोगों ने अपनी बातों को संवैधानिक तरीके से बिना तोड़-फोड़ के जोर-शोर से रखा. वहीं, व्यापारिक संगठनों ने इसे अपना मौन समर्थन दिया. इसके लिए विपक्ष के सभी दलों के कार्यकर्ताओं सहित सामाजिक संगठनों के आभारी हैं. उक्त बातें उन्होंने शुक्रवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहीं. इस दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार, सीपीआई के केडी सिंह, राजद के गौतम सिंह राणा, जेवीएम प्रवक्ता खालिद खलील सहित कई नेता भी उपस्थित थे.

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बिल के खिलाफ आंदोलन जारी रखेगा विपक्ष

हेमंत सोरेन ने कहा कि भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर सरकार का रुख जैसा दिखा रहा है, उससे साफ लगता है कि सरकार की मंशा राज्य की गरीब जनता को नुकसान पहुंचाकर कॉरपोरेट जगत को लाभ पहुंचाना है. अगर रघुवर सरकार भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को वापस नहीं लेती है, तो इस विषय पर पूरा विपक्ष और सामाजिक संगठन अनवरत आंदोलन करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि बिल को लेकर विपक्ष ने पहले चरण में प्रखंड और जिला स्तर पर प्रदर्शन, पुतला दहन और बंद जैसे कार्यक्रम तय किये थे. अगले चरण में विपक्ष 16 जुलाई को राजभवन के समक्ष धरना देने जा रहा है. यह धरना ऐतिहासिक होगा, इसका दावा करते हुए उन्होंने कहा कि इस काले कानून के खिलाफ विपक्ष को पुनः एकजुट होने की जरूरत है.

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हर मुद्दे पर बहस को तैयार है विपक्ष, बशर्ते…

आजसू पार्टी द्वारा संशोधित बिल को लेकर दो दिन की विशेष चर्चा की जो बात कही गयी थी, उसपर हेमंत सोरेन ने कहा कि वह आजसू अध्यक्ष के प्रस्ताव का सशर्त समर्थन करते हैं. उनके मुताबिक, विपक्ष सरकार से हर मुद्दे पर तथ्यात्मक बहस करने को तैयार है, लेकिन सरकार को पहले इस बिल को वापस लेना होगा. विपक्ष की एकजुटता को देखते हुए सरकार को देखना होगा कि लोगों में उनके खिलाफ कितना आक्रोश है. असंवैधानिक तरीके से सरकार ने जिस तरह संशोधन बिल को स्वीकृत किया है, उस पर सरकार को उसी तरह वापस होना होगा, जैसा सीएनटी-एसपीटी एक्ट को लेकर वह वापस हुई थी.

गुंडागर्दी पर उतर आयी है सरकार

संशोधित बिल को बिना चर्चा के ही पास करने की सरकार की चतुराई पर सवाल करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि नकल करने के लिए अक्ल की जरूरत होती है. सरकार ने इस मुद्दे पर विपक्ष से किसी तरह की चर्चा करना मुनासिब नहीं समझा. ऐसे में सरकार लोकतंत्र की जगह गुंडागर्दी पर उतार आयी है. रघुवर सरकार के दौरान राज्य में कोई कानून, संविधान बचा ही नहीं है. उन्होंने सवाल किया कि राज्य में अब डॉ अंबेडकर का कानून चलेगा कि नहीं. अगर नहीं, तो सरकार को चाहिए कि वह भारतीय संविधान को राष्ट्रपति और राज्यपाल के यहां ले जाकर फाड़कर जला दें.

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किसानों को दिया एक लाख 20 हजार करोड़ का नुकसान : डॉ अजय कुमार

प्रेस वार्ता में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने किसानों के मुद्दों पर मोदी सरकार को घेरा. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर पीएम मोदी ने पिछले चार सालों में जो आश्वासन दिया, उससे देश के किसानों को केवल नुकसान ही हुआ है. उन्होंने कहा कि खरीफ फसल को लेकर कुछ ही दिन पहले पीएम मोदी ने राशि तो तय कर दी, लेकिन वह यह भूल गये कि 2019 के चुनाव के बाद तो वह जानेवाले हैं, ऐसे में पीएम मोदी ने किसानों को छलकर सारा भार अगली सरकार पर डाल दिया. सरकार की यह नीति काफी चिंतनीय है. उसी तरह स्वामीनाथन आयोग के तहत खाद, फसल, बीज जैसी बातों को लेकर मोदी ने 2014 के चुनाव में जो घोषणा की थी, उसे भी वह पूरा नहीं कर सके. उनके चार साल के कार्यकाल के दौरान देशभर में खाद्य सामग्री का निर्यात कम हुआ, वहीं आयात भी काफी बढ़ गया. निर्यात जहां 60 हजार कम हुआ, वहीं आयात भी करीब 60 हजार करोड़ बढ़ गया. इस तरह पीएम मोदी ने देश के किसानों को करीब एक लाख 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान दे दिया.

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