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जल संसाधन के 12 प्रोजेक्ट्स पर उद्घाटन के बाद भी काम नहीं, डीपीआर-डीपीआर खेल रहा विभाग

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  • कनहर, राढ़ू, महाने, कांची सहित 12 बड़े जलाशय परियोजनाओं पर दो साल बाद भी काम शुरू नहीं
  • प्रदेश के 20 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में उपलब्ध नहीं है सिंचाई की सुविधा, 67 फीसदी लोग कृषि पर हैं निर्भर

Ranchi : जल संसाधन विभाग के 12 बड़े प्रोजेक्ट की सरकार ने घोषणा की. उद्घाटन भी किया. दावा किया कि प्रदेश के किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी. लगभग दो साल बीत जाने के बाद भी इन जलाशय परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हुआ. सिर्फ डीपीआर-डीपीआर का खेल चल रहा है.

कभी डीपीआर की स्क्रूटनी केंद्रीय निरूपण संगठन कर रहा है तो कभी पेयजल स्नच्छता विभाग से कंसर्ट लेने की प्रतिक्षा की जा रही है. दो परियोजना पर स्थानीय विरोध के कारण काम शुरू नहीं हो पाया है. गढ़वा रंका के लिये महत्वपूर्ण कनहर परियोजना के लिये 1908.34 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी जा चुकी है. फिर भी काम शुरू नहीं हो पाया है.

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पलामू और गढ़वा को सोन व कनहर से पानी पहुंचाने का था दावा

राज्य सरकार ने सोन और कनहर से पलामू और गढ़वा को पानी पहुंचाने की योजना बनाई थी. कनहर से 36 एमसीएम पानी भंडरिया, रंका, चिनिया, धुरकी, रमकंडा और रमना तक पानी पहुंचाने का दावा किया गया था.

सोन नदी से गढ़वा, मेराल, नगर उंटारी, मझियांव, भवनाथथपुर, पांडू, खरौंधी, रमना, विशुनपुरा में सिंचाई के साथ पीने का पानी उपलब्ध कराने की योजना थी. लेकिन इस महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू नहीं हो पाया है.

इस इलाके में सिंचाई के साथ गंभीर पेयजल संकट की भी समस्या है. योजना के तहत सरकार ने कहा था कि 10 जलाशयों और डैमों में पानी भरा जायेगा. कनहर नदी से बारिश के दौरान 36 एमसीएम पानी और सोन नदी से 37.57 एमसीएम पानी लाया जायेगा.

इससे सरस्वती सिंचाई योजना, बांकी सिंचाई योजना, कवलदाग सिंचाई योजना, चिरका रिजरवायर, भवानी कुंड, उत्तमाही सिंचाई योजना, सेल स्टील डैम, पंडरवा रिजरवायर के साथ गांवों के तालाबों को अंडरग्राउंड टनेल से भरा जायेगा.

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सीएम का दावा : सिंचाई और पीने का पानी पाइप लाइन से आएगा

सीएम रघुवर दास ने कहा था कि पलामू की धरती में सोन नदी से पाइप लाइन के जरीये पेयजल और सिंचाई के लिये पानी की सुविधा उपलब्ध होगी. इसी तरह साहेबगंज से गंगा का पानी संथाल के छह जिलों में सिंचाई और पेयजल के लिए उपलब्ध कराया जायेगा.

घोषणा के साल भर बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है. जबकि हकीकत यह है कि राज्य में लगभग 20 फीसदी ही सिंचाई सुविधा उपलब्ध है. 80 फीसदी खेतों में पानी नहीं पहुंच पाया है. राज्य में 38 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है.

लेकिन सिंचाई सुविधा नहीं होने के कारण 18.04 लाख हेक्टेयर में ही खेती होती है. लगभग 20 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है. जबकि कृषि कार्य में 67 फीसदी लोग लगे हैं.

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किस प्रोजेक्ट की क्या है स्थिति

  • दुगानी बराज: 95.43 करोड़ की स्वीकृति: काम शुरू नहीं.
  • कनहर (गढ़वा-रंका): हाईकोर्ट के आदेश के बाद उच्च स्तरीय कमेटी बनी. कमेटी की रिपोर्ट के बाद केंद्रीय जलसंसाधन मंत्रालय ने 1908.34 करोड़ के डीपीआर की स्वीकृति दी. फिलहाल काम शुरू नहीं.
  • ताहली परियोजना (मेदिनीनगर) : डीपीआर बन रहा है.
  • सतपोटका (पश्चिमी सिंहभूम) : स्थानीय विरोध के कारण काम शुरू नहीं हो पाया है.
  • तोराई परियोजना (पाकुड़) : स्थानीय विरोध के कारण काम शुरू नहीं हो पाया.
  • राढ़ू ( रांची-सिल्ली) : केंद्रीय निरूपण संगठन डीपीआर बना रहा है.
  • कांची (रांची) : डीपीआर की समीक्षा की जा रही है.
  • सुगाथान( गोड्डा): डीपीआर बन रहा है.
  • दाहरबाटी (लोहरदगा) : डीपीआर बन गया है. केंदीय निरूपण संगठन डीपीआर की जांच कर रहा है.
  • महाने (हजारीबाग) : पेयजल विभाग से कंसंर्ट की प्रतिक्षा में मामला लंबित है. काम शुरू नहीं हो पाया है.
  • सेवाने (हजारीबाग, कटकमसांडी) : डीपीआर बन गया है. केंद्रीय निरूपण संगठन डीपीआर की जांच कर रहा है.

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