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71 साल बाद भी नहीं बनी पक्‍की सड़क, गांव में कोई अपने लड़के-लड़कियों की शादी नहीं करता चाहता

Palamu : देश की आजादी के 70 वर्ष से अधिक समय बीत गया है. प्रदेश से लेकर केन्द्र सरकार तक विकास का तैयार रोड  मैप दिखाकर वोट मांग रही है. लेकिन अभी भी कई ऐसे गांव  हैं, जो मुख्य सड़क से जुड़ नहीं पाये हैं. गड्ढों में तब्दील कच्ची सड़क से ग्रामीणों को दो-चार होना पड़ता है.

पलामू जिला अंतर्गत छत्तरपुर नगर पंचायत के वार्ड नं 4 में गुलारियाटांड़ गांव है, जहां के ग्रामीणों को अभी तक पक्की सड़क नसीब नहीं हो सकी है. ग्रामवासियों ने बताया कि इस गांव में पक्की सड़क न होने के बजह से कोई आदमी यहां अपने लड़के लड़कियों की शादी नहीं करना चाहता.

क्योंकि यहां छोटे से छोटे वाहनों का भी इस सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में 125 घर है, जहां यादव समाज के लोग निवास करते हैं. छत्तरपुर मुख्य मार्ग से 2 किलोमीटर तक गांव की सड़क मिट्टी मोरम एवं उबड़ खाबड़, पगडंडी में तब्दील है.

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गांव में सरकार के विकास के दावे खोखले

सड़क के अभाव में गांव में विकास की किरण आज तक नहीं पहुंच सकी है. ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव को बसे कई दशक हो चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों को पक्की सड़क नसीब नहीं हो सकी है. ऐसे में यातायात की सुविधा दूर की कौड़ी है. हैरत की बात यह कि ग्रामीण जिला प्रशासन, पीडब्ल्यूडी समेत कई सरकारी महकमों से इस पगडंडी को सड़क में तब्दील कराने की गुहार लगा चुके हैं.

लेकिन सुनवाई नहीं हुई. ऐसे में ग्रामीण छत्तरपुर मुख्य बाजार, अनुमंडल, थाना एवं अस्पताल के संपर्क मार्ग से गांव तक करीब तीन किलोमीटर दूरी पैदल नापने को मजबूर हैं. देश आजाद होने के बाद गुलामी जैसा जीवन व्यतीत करना यहां के ग्रामीणों की नियति‍ बन गयी है.

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गांव की समस्या ग्रामीणों की जुबानी

गांव के विनोद साव बताते हैं कि आजादी के क्या मायने होते हैं, पता नहीं. सुविधाओं के अभाव में कई परिवार गांव से पलायन कर चुके हैं. सड़क के अभाव में यातायात सुविधा नहीं है. ऐसे में शाम ढलने से पहले गांव पहुंचना मजबूरी होती है.

गौतम सागर ने बताया कि चुनाव के समय नेता विकास के बड़े-बड़े वायदे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद सबकुछ भूल जाते हैं. सड़क गांव के विकास की पहली सीढ़ी है और वह ही ग्रामीणों को नसीब नहीं है.

सत्येंद्र सिंह ने कहा कि गांव में केवल प्राथमिक विद्यालय है. पांचवीं के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए मसिहानी, रामगढ़ और छत्तरपुर जाना पड़ता है. गांव में पक्की सड़क नहीं है. कई परिवार यहां से पलायन कर चुके हैं. उनके खंडहरनुमा आवास इसकी निशानी है.

छत्तरपुर के एसडीओ नरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि हैरानी होती है कि गांव में पक्की सड़क तो दूर कच्चा रास्ता भी नहीं है. गांव की जनता ने इस बार उनसे अपनी आस लगायी है. गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए जद्दोजहद जारी है. प्रधानमंत्री सड़क रोजगार योजना में सड़क का प्रस्ताव छत्तरपुर स्थित संबंधित कार्यालय को भेजा गया है. सड़क का सपना साकार होने की उम्मीद लगायी जा रही है.

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