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जनता के सवालों का सीधा जवाब नहीं दे पाये झारखंड के मुख्य विपक्षी नेता

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Ranchi: ट्विटर इंडिया कार्यक्रम “#हेमंत की चौपाल” में जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन से राज्य पर केंद्रित सवाल पूछे गये. इसमें स्थानीय युवाओं और विस्थापितों को रोजगार, आदिवासी-मूलवासी के मुद्दे, सीएनटी-एसपीटी एक्ट, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे प्रमुखता से शामिल थे. लेकिन राज्य के मुख्य विपक्षी नेता होने के बावजूद हेमंत सोरेन के पास इन सवालों का कोई साफ जवाब नहीं था. कई बार कार्यक्रम होस्ट कर रहे बहरागोड़ा विधायक कुणाल षाडंगी ने मामले को स्पष्ट करने का प्रयास किया. हेमंत सोरेन राज्य के मुखिया रह चुके हैं फिर भी उनका इन गंभीर मुद्दों पर साफ नजरिया न होना चौंकाता है. इस दौरान हेमंत सोरेन से 24 सवाल पूछे गये, उनमें से कुछ चुनिंदा सवालों को यहां दिया जा रहा है-

योग्यता के अनुसार प्राइवेट कंपनियों में नौकरियां नहीं होने पर हेमंत का जवाब

सवाल – जमशेदपुर के गमरिया से उत्पल चौधरी ने सवाल किया कि राज्य में लगे प्राइवेट उद्योगों के लिए जमीन तो ली गयी, लेकिन क्या इसमें स्थानीय लोगों को उनकी योग्यता के अनुसार नौकरियां दी गयी हैं. अगर नहीं दी गयी हैं तो सरकार में आने पर आपकी क्या भूमिका रहेगी.

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जवाब – यह समस्या केवल निजी कंपनी तक ही नहीं बल्कि कृषि तक है. मौजूदा हालत में केंद्र सरकार सरकारी कंपनियों को बेच रही है. जिसका अर्थ है कि रोजगार बंद और आरक्षण बंद. ऐसे में ही डिग्रीधारी छात्रों के साथ प्राइवेट कंपनियों शोषण करती हैं. हालांकि सरकार बनने पर उनकी क्या विशेष भूमिका होगी, इसका जवाब देने की जगह कहा कि सरकार को सरकारी संस्थाएं खोलनी चाहिए. प्राइवेट कंपनियों के भरोसे केवल रोजगार नहीं दिया जा सकता.

स्वास्थ्य सुविधा के निजीकरण पर  

सवाल – झारखंड सिविल सोसइटी की एक महिला रेणुका चौधरी ने सवाल पूछा कि हर सरकार दावा करती है कि उनके शासन में स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों के घर तक पहुंचेंगी. लेकिन ऐसा नहीं होकर आज स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण हो रहा है. आयुष्मान योजना की स्थिति किसी से छिपी नहीं है. अगर जेएमएम की सरकार सत्ता में आती है, तो क्या वे भी निजीकरण का समर्थन करेंगे.

जवाब – हेमंत सोरेन ने इंश्योरेंस कंपनियों को कठघऱे में खड़ा किया. कहा कि ये कंपनियां स्वास्थ्य सेवाएं नहीं दे सकती हैं. वर्तमान स्वास्थ्य संस्थाओं की मजबूती के साथ जरूरी है कि अधिक से अधिक मेडिकल कॉलेज, पारा मेडिकल कॉलेज खोले जायें. इनमें पढ़ाई के खर्च को कम किया जाए. लेकिन जेएमएम की सरकार बनने पर उनकी भूमिका क्या होगी वे नहीं बता पाये.

छात्रवृति राशि बढ़ाने पर

सवाल – अर्ष नामक एक व्यक्ति ने हेमंत सोरेन से सवाल किया कि उनकी सरकार बनने पर छात्रों की छात्रवृत्ति राशि क्या बढ़ाई जाएगी. वर्तमान सरकार ने राज्य के बाहर पढ़ रहे छात्रों की छात्रवृत्ति रोक दी है.

जवाब – हेमंत सोरेन ने कहा कि क्षेत्र भ्रमण में उन्हें भी इसकी जानकारी मिलती है. सरकार पर इसके लिए आरोप लगाते हुए कहा कि अब तो छात्रवृत्ति उन्हें ही मिलेगी, जो लिखित परीक्षा पास करेंगे. इससे आदिवासी, दलित, बच्चे कैसे उच्च शिक्षा प्राप्त कर पायेंगे. यह सिस्टम इन तबके के बच्चों को दबाने का प्रयास है. ऐसे में समाज में विषमता बढ़ रही है. उनकी सरकार में प्लस टू के बच्चों को प्रथम, दूसरे और तीसरे स्थान आने वाले छात्रों को एक राशि दी जाती थी. लेकिन मौजूदा सुविधा अब बंद कर दी गयी है.

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मूलभूत सुविधा को लेकर हेमंत सोरेन का जवाब

सवाल – जेवीएम श्यामली की शिक्षिका मीनू दास गुप्ता ने सवाल किया कि मूलभूत सुविधा जैसे कि बिजली की गिरती व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट नहीं होने पर महिलाओं की सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था की लचर व्यवस्था को लेकर आपकी सरकार क्या करेगी.

जवाब – सवाल का जवाब देने के लिए हेमंत सोरेन ने राज्य की तुलना मेट्रो सिटी से की. कहा कि आज राज्य में उपरोक्त सभी व्यवस्था की हालत क्या है. अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि अंडरग्राउंट केबलिंग के लिए उनकी सरकार ने काफी प्रयास किया था. इसके लिए उनकी सरकार ने 500 करोड़ की व्यवस्था भी की. आज जो स्थिति है, इसके लिए जरूरी है कि बिजली की वायरिंग व्यवस्था को दुरस्त किया जाए. वही ट्रैफिक व्यवस्था के लिए आम जनता को भी सहयोग करना चाहिए. सरकार और लोगों के बीच सामंजस्य नहीं होने से ट्रैफिक समस्या बन रही है. हमारी मानसिकता में बदलाव लाना चाहिए.

जेपीएससी, जेएसएससी की गिरती व्यवस्था पर हेमंत सोरेन का जवाब

सवाल – निकुंज टोप्पो नाम के व्यक्ति ने हेमंत सोरेन से पूछा कि जेपीएससी, जेएसएससी की गिरती व्यवस्था को आप कैसे सुधर करेंगे. अगर आपकी सरकार बनती है.

जवाब – इसपर हेमंत सोरेन ने कहा कि मौजूद सरकार के कार्यकाल में जेपीएससी की स्थिति क्या है, यह किसी से छिपी नहीं है. सरकार ने पांच साल मे एक परीक्षा ली, वो भी विवादित रही है. संवैधानिक संस्था होने के बावजूद आज यह संस्था जैक के स्तर की हो गयी है. राज्य बनने के बाद जितने भी परीक्षा हुए, वो सभी विवादित हो चुकी है. सरकार की प्रथामिकता होनी चाहिए कि वे जेपीएससी में सुधार करें. लेकिन जेएमएम की सरकार बनने पर उनकी भूमिका क्या होगी. उसका जवाब हेमंत सोरेन नहीं दे पाये. मालूम हो कि इसी हेमंत सरकार ने कोई विशेष मुद्दा नहीं होने के बावजूद भी जेपीएससी परीक्षा को एक साल के लिए रोक दिया था.

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