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नॉर्थ कोयल परियोजना के विस्थापितों ने लगाई मुआवजे की गुहार, आयुक्त को सौंपा आवेदन

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Palamu : नॉर्थ कोयल परियोजना (मंडल डैम) निर्माण के दौरान विस्थापित हुए लगभग एक दर्जन परिवारों ने मुआवजा भुगतान की गुहार लगायी है. इस सिलसिले में परिवारों की ओर से पलामू के प्रमंडलीय आयुक्त को आवेदन दिया गया है. प्रभावित मंडल डैम के डूब क्षेत्र में पड़ने वाले 15 गांवों के रहने वाले हैं.

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पलायन कर दूसरे जगह जीवन कर रहे थे प्रभावित

1973 की अधिसूचना के आधार पर एवं समय-समय पर आने वाली प्राकृतिक विपदा और उग्रवाद की वजह से प्रभावित मंडल से पलायन कर गए थे और अलग-अलग जगहों पर जीवन-यापन करने में लगे थे. उक्त परिवारों को विस्थापन नीति के तहत किसी प्रकार का सरकारी लाभ अब तक नहीं मिला है.

157.05 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने का दावा 

प्रभावितों ने दावा किया है कि कुटकू (मंडल) में उन लोगों की 157.05 एकड़ जमीन भू-अर्जन द्वारा प्राप्त सर्टिफिकेट के अनुसार अधिग्रहित कर लिया गया है. मुआवजे के अलावा किसी भी प्रकार का लाभ आज तक नहीं मिला है. यहां तक की जितने सदस्य हैं, उन्हें विस्थापित कार्ड भी आज तक नहीं दिया गया है. यह पुर्नवास कार्यालय द्वारा बरती जाने वाली अनियमितता का प्रमाण है.

क्या है झारखंड पुर्नवास नीति 2008

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विस्थापित लोगों ने आयुक्त को दिये गए आवेदन में बताया है कि मंडल डैम निर्माण की योजना शुरू हुए 40 वर्ष हो चुके है. झारखंड पुर्नवास नीति 2008 के अनुसार अगर किसी भी प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहित की गयी हो और अधिग्रहण के 05 वर्षों तक आंशिक कार्य या अगले 15 वर्षों तक निर्माण पूर्ण नहीं हो जाता तो अधिग्रहित जमीन राज्य सरकार के पास चली जाती है और अगर राज्य सरकार अधिग्रहित जमीन का उपयोग किसी दूसरे प्रोजेक्ट में नहीं करती है तो यह जमीन स्वतः भू-स्वामी के पास वापस कर दी जाती है. बताया गया है कि मंडल डैम की योजना पर प्रारंभिक कार्य अधिग्रहण के बाद तो शुरू हुआ, लेकिन 40 सालों बाद भी पूरा नहीं हो पाया. ऐसी स्थिति में पुर्नवास नीति के प्रावधानों के अनुसार अधिग्रहित भूखंड भू-स्वामियों को वापस कर दिया जाना चाहिए.

आवेदन देने वालों में कौन-कौन

इसके अलावे संबंधित परिवारों ने मुआवजे के लिए प्रभावितों की सूची बनाये जाने में घोर अनियमितता बरते जाने की शिकायत की है. कहा है कि पुर्नवास पदाधिकारी के कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी. सूचना को देखने के बाद यह साफ पता चल जाता है कि आवेदन देने वाले विस्थापित परिवारों में पुष्पेन्द्र नारायण सिंह, अजित कुमार सिंह, भानु प्रताप सिंह, सूर्यदेव प्रताप सिंह, अनील कुमार सिंह, शंकर प्रसाद, भोला गोस्वामी व अशोक साव आदि शामिल हैं.

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