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शिड्यूल्‍ड एरिया में नन ट्राइबल और कॉरपोरेट को खनन का हक देना गलत, तो अनुपालन की जिम्मेदारी किसकी

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Pravin kumar

झारखंड में संविधान प्रदत्त अधिकारों की अनदेखी सत्‍ता शीर्ष के साथ ही ब्यूरोक्रेसी के द्वारा भी होता रहा है. 10 नवंबर को पांचवी अनुसूची पर सुभाष कश्यप के दिये गये व्याख्यान में कहा गया कि शिड्यूल्‍ड एरिया में नन ट्राइबल और कॉरपोरेट को खनन का हक देना गलत है. तो आखिर राज्य की 5वीं अनुसूचित क्षेत्र में इसका पालन कौन करायेगा. यह झारखंड के लिए एक बड़ा सवाल बना हुआ है.

आदिवासियों को मिले संविधान प्रदत्त अधिकारों का उनके क्षेत्र में लागू ना होना आदिवासी आक्रोश का एक बड़ा कारण झारखंड में शुरुआत से ही रहा है. संविधान प्रदत्त अधिकारों को लागू करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है. इस पर बिना मंथन किये झारखंड के सुलगते सवाल को सुलझाया नहीं जा सकता. 15 नवंबर 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य का गठन किया गया. इसके बाद भी झारखंड में जल ,जंगल, जमीन की रक्षा के लिए आंदोलन होते रहे. इन आंदोलनों को कुचलने के लिए सत्‍ता के द्वारा आंदोलनकारियों पर गोलियों भी चलायी गयीं. फिर भी आंदोलन की रफ्तार कम नहीं हुई. आखिर क्यों पांचवीं अनुसूची के प्रावधान को लागू करने में राजभवन से लेकर मुख्यमंत्रि‍यों ने रुचि नहीं ली. 5वीं अनुसूचित वाले जिलों (रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, दुमका, सिमडेगा, पश्चिमी सिहंभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, जामताड़ा, पाकुड़, लातेहार, साहेबगंज, गढ़वा, गोड्डा, पलामू) में आदिवासी समाज अपने आधिकारों को लेकर संघर्षरत हैं और सत्ता के विरोध में खड़े होकर गोलीकांड के शिकार बनते रहे. विस्थापन से जुड़ा विकास मॉडल का समाज विरोध करता रहा है, लेकिन इसे सुनने कोई भी मुख्यमंत्री सामने नहीं आया. न ही इस ओर राजभवन की ओर से भी कोई सार्थक पहल देखने को मिली.

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आज भी झारखंड के आदिवासी समाज अपने अस्तित्‍व की रक्षा के लिए जल, जंगल, जमीन को बचाने में लगे है. लैंड बैंक के विरोध में आंदोलन से लेकर सीएनटी-एसपीटी एक्ट को बचाने के लिए शहादत दे रहे हैं. खूंटी के बिरसा मुंडा और अब्राहम मुंडा की सीएनटी-एसपीटी एक्ट को बचाने व लैंड बैंक के विरुद्ध हुए आंदोलन में जान चली गयी. जिसे खूंटी जिला प्रशासन ने दूसरा स्वरूप दे दिया. इसे खूंटी जिला प्रशासन द्वारा पत्थलगड़ी के रूप में बदला गया और इसे प्रशासन गलत कहता रहा. जिला प्रशासन की ओर से पत्थलगड़ी को अफी

म की खेती को बचाने के रूप में करार दिया गया, जबकि मूल समस्या जमीन की है.

झारखंड में कमोबेश सभी राजनीतिक दल सत्ता का स्वाद लेते रहे हैं. लेकिन, पांचवीं अनुसूची के मुद्दे इन हुक्‍मरानों ने कभी हल करने का प्रयास नहीं किया. यहां तक कि राज्य में 3 बार राष्ट्रपति शासन भी लग चुका है. उस दौरान भी यह मसला हल नहीं हो सका. अब राज्य के लिए संविधान प्रदत्त अधिकार नासूर बन चुका है, जिसका हल बिना समय जाया किये किया जाना चाहिए.

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पांचवीं अनुसूची पर हुए आयोजन में मिले प्रवेश-पत्र

राज्य में पांचवीं अनुसूची को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है. 5वीं अनुसूची को लेकर कल्याण विभाग के द्वारा आयोजित किये गये इस कार्यक्रम में पंजीयन के बाद जो प्रवेश पत्र दिये गये उसे देख कर भी ब्यूरोक्रेसी के नजरिये को समझा जा सकता है. प्रवेश पत्र में भारी गलतियां देखने को मिलीं. यह शब्‍द के मायने ही बदल देने वाली हैं. प्रवेश पत्र में ‘भारतीय’ को ‘भातरीय’ लिख दिया गया.

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कब कौन सी पार्टी के हुए मुख्यमंत्री

कब से                                कब तक                      मुख्यमंत्री का नाम             पार्टी

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15 नवम्बर 2000 से          18 मार्च 2003 तक            बाबूलाल मरांडी             भाजपा

18 मार्च 2003 से              2 मार्च तक 2005              अर्जुन मुंडा                   भाजपा

2 मार्च 2005 से                 12 मार्च तक 2005           शिबू सोरेन                    झामुमो

12 मार्च तक 2005 से         18 सितंबर 2006             अर्जुन मुंडा                    भाजपा

18 सितंबर २००6 से            28 अगस्त 2008              मधु कोड़ा                     निर्दलीय

28 अगस्त 2008 से            18 जनवरी 2009              शिबू सोरेन                    झामुमो

19 जनवरी 2009 से            29 दिसम्बर 2009            राष्ट्रपति शासन

30 दिसम्बर 2009 से          31 मई 2009                   शिबू सोरेन                    झामुमो

1 जून 2010 से                 10 सितम्बर 2010            राष्ट्रपति शासन

11 सितम्बर 2010 से          18 जनवरी 2013             अर्जुन मुंडा                     भाजपा

18 जनवरी 2013 से           13 जुलाई 2013              राष्ट्रपति शासन

13 जुलाई 2013 से            23 दिसम्बर 2014            हेमंत सोरेन                     झामुमो

28 दिसम्बर 2014 से          अभी तक                        रघुवर दास                     भाजपा

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