LITERATURE

नोबल पुरस्कार विजेता #OlgaTokarczuk की दो कविताएं

2018 के लिए नोबल पुरस्कार विजेता ओल्गा तकारचुक की दो कविताएं आपके लिए. पूर्वी यूरोप की स्लाव भाषाओं में कविता आज भी तुकान्त ही लिखी जाती है. अतुकान्त या मुक्त छन्द में वे ही कवि कविता लिखते हैं, जो यूरोप में चर्चित होना चाहते हैं. तकारचुक की एक कविता तुकान्त है, इसलिए तुकान्त ही अनुवाद भी है. हां, ओल्गा तकारचुक ने कुछ अतुकान्त कविताएं भी लिखी हैं. ओल्गा तकारचुक पोलैण्ड में रहने वाले एक उक्रअईनी भाषी परिवार में पली-बढ़ी हैं. इसलिए वे उक्रअईनी और पोल (पोलिश) दोनों भाषाओं में कविता लिखती हैं.

(एक)

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मन्द गति से धड़के हैं दिल, बून्द-बून्द टपके हैं ख़ून,

कितना गहरा प्यार किया है, कितना गहरा उसका जुनून

पर देवदूत ले गया आत्मा, उसकी निश्छल अपने साथ,

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बहुत प्यार करती थी वो उसे, जानता है वो भी ये बात

 

इन्तज़ार किया उसने देर तक, राह देखी उसकी बहुतेरी

वादों पर बेहद विश्वास था उसके, पर वादे थे वे हेरा-फेरी

वो राह देखती रही अन्त तक, आंखों से आंसू रही बहाती

न घंटी बजी फ़ोन की उसके, एसएमएस, निकला संघाती

 

अन्धकार छा गया आत्मा पर, भय छाया था, धूल थी छायी

मधुर अतीत था प्रेम का पल वह, दिल पे उसके भूल थी छायी

सब कुछ ख़त्म हो चुका था.. धड़के दिल.. बन्द हो गयीं आंखें

वो ख़ुद देवदूती बन गयी, चली गयी स्वर्ग, खोल दिल की पांखें

 

अब फ़ोन करेगा अगर वो कभी तो उसे घंटी न देगी सुनाई,

देवदूतों के होती नहीं जेबें, न उनके पास होते टेलीफ़ोन, भाई

फ़ोन करेगा अब यदि वो उसे, तो कोई उत्तर वो नहीं पायेगा

चली गयी बिन टिकट जहां पर, वो उससे वहीं मिलने जायेगा

(दो)

काग़ज़ पर लिखे शब्द …

मैं पहले से लिखी पंक्तियां काट दूंगी

शब्द …

वास्तव में शून्य होते हैं, उन्हें चूमो मत, पुच-पुच

शब्द सम्पर्क के लिए …

भेजती हूं वो, जो लिखती हूं

शब्द ..

टिप्पणियां लिखती हूं, पर उनमें होती है सच्चाई कम

उपन्यासों में शब्द…

उनमें धोखा होता है…सिर्फ़ धोखा…

शब्द…

उनमें नन्हीं किरचों में बदल चुके सपने होते हैं

गीतों में शब्द

ये सिर्फ़ काल्पनिक इबारतें होती हैं

शब्द..

सिर्फ़ कड़वाहट..झूठ…लेकिन उन्हें कोई तो गाता है…

दिल से निकले शब्द…

भावनाओं से भरे होते हैं, बुद्धिहीन… झूठ नहीं बोलते

शब्द…

भावनाएं तिरोहित होती हैं, शब्द भी मर जाते हैं

हवा में शब्द…

हम उन्हें यूं ही फेंकते हैं, वे अक्सर हमारे साथ होते हैं

शब्द…

नंगे पैर चलूंगी मैं उन पर

आंखों में शब्द…

लिखे हुए हैं ऐसे, पहुंच जाते हैं सपनों में

शब्द..

धूल से भरे हुए और भूले हुए अवशेष

मुलाकात में शब्द…

सिर्फ़ सामान्य से कुछ वाक्य

शब्द…

मुलाक़ात ख़त्म हुई, भूल गयी…याद आयेंगे अब अगली मुलाक़ात में

प्रेम में शब्द..

झूठ बोला जाता है क्यों इतनी बेशर्मी के साथ…आख़िर

शब्द…

प्रेम बीत जाता है और तुम…तुम बौड़म बन जाते हो

 

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