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नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी बने संयुक्त राष्ट्र के SDG के एडवोकेट

Ranchi : नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है. संयुक्त राष्ट्र संघ ने उन्हें अपने सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) का एडवोकेट बनाया है. एडवोकेट के तौर पर सत्यार्थी एसडीजी लक्ष्य को 2030 तक हासिल किये जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे. हर बच्चे को स्वतंत्र, स्वस्थ, शिक्षित और सुरक्षित जीवन जीने का प्राकृतिक अधिकार हासिल हो, इस दिशा में कैलाश की ओर से कई प्रयास होते रहे हैं.

उनके प्रयासों का नतीजा रहा है कि बाल श्रम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून यानी आइएलओ कन्वेंशन-182 पारित हुआ. उनके इन्हीं योगदानों को देखते हुए उन्हें एसडीजी एडवोकेट बनाया गया है.

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बाल श्रम में वृद्धि का बढ़ा खतरा

कैलाश सत्यांर्थी की “एसडीजी एडवोकेट” के रूप में नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब एक तरफ बाल श्रम उन्मूतलन का अंतरराष्ट्रीदय वर्ष चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ पूरी दुनिया में पिछले दो दशकों में पहली बार बाल श्रम में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है. बाल श्रमिकों की संख्या अब बढ़कर 16 करोड़ हो गई है.

पहले यह संख्या तकरीबन 15.2 करोड़ थी. वहीं कोविड-19 के दुष्पेरिणामों ने लाखों बच्चों को खतरे में डाल दिया है जबकि संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपने सतत विकास लक्ष्य के एजेंडे में सन 2025 तक समूचे विश्वभर से बाल श्रम उन्मूलन का लक्ष्य रखा है.

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ऐसे में 2025 तक दुनिया से बाल श्रम को खत्मक करने के संकल्पश पर एक बड़ा सवाल उठ खड़ा होता है और संयुक्त राष्ट्र ने 2030 ने सतत विकास लक्ष्यर हासिल करने की जो प्रतिबद्धता जताई है, वह भी चुनौतीपूर्ण लग रही है.

एक तरफ दुनियाभर में बाल श्रमिकों की संख्याे बढ़ रही है, तो वहीं दूसरी तरफ कोरोना महामारी के दुष्पहरिणामों ने लाखों बच्चों को और अधिक असुरक्षित बना दिया है.

यह नियुक्ति वर्तमान संकट के मद्देनजर की गई है, जिसका अभी दुनिया सामना कर रही है. सतत विकास लक्ष्योंक पर भी इस संकट का दूरगामी असर पड़ रहा है, जिसे 2030 तक हासिल किया जाना है.

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यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक भारतीय को दुनिया के बच्चों को शोषण से बचाने के लिए चुना है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नोबेल शांति पुरस्काकर से सम्मा नित कैलाश सत्या र्थी को एसडीजी एडवोकेट नियुक्त करते हुए कहा है कि वे दुनियाभर के बच्चों को आवाज देने के लिए सत्यार्थी की अटूट प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं.

यह समय की जरूरत है कि हम एक साथ आएं, सहयोग करें, साझेदारी बनाएं और एसडीजी की दिशा में वैश्विक कार्रवाई को तेज करने में एक दूसरे का समर्थन करें.

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