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फिर सूखेंगे कंठः जल नीति पर नहीं हो रहा काम, ग्रामीण इलाकों में रोजाना 152 लाख गैलेन पानी की जरूरत

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  • जनवरी में सीएम ने की थी घोषणा, संताल के छह जिलों तक पहुंचेगा गंगा नदी का पानी
  • गंगानदी के जल बंटवारा पर अबकर नहीं हुआ कोई समझौता, ठंढे बस्ते में मामला
  • राज्य में ग्रामीण जलापूर्ति से सिर्फ 57 लाख ग्रामीणों को ही मिलता है पाइप से पानी

Ranchi: इस बार फिर गर्मी में प्रदेश की जनता के कंठ सूखेंगे. वजह यह है कि पिछले चार साल में जल नीति पर काम ही नहीं हुआ. प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में हर दिन लगभग 152 लाख गैलेन से भी अधिक पानी की जरूरत है. जल नीति के तहत जल संसाधन परियोजनाओं के लिये जल का अंकेक्षण अनिवार्य बताया गया था. सेवा प्रदाता को पानी के उपयोग के लिये हिसाब देने की जिम्मेवारी दी गई थी. पानी की जरूरत को देखते हुए जल का क्षेत्रीकरण किया जाना था. इसके तहत पेयजल क्षेत्र, भू-गर्भ जल की कमी का क्षेत्र, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र और सूखा क्षेत्र को चिन्हित किया जाना था, लेकिन इन सभी चीजों पर काम ही नहीं हुआ.

गंगानदी जल बंटवारे का मामला भी ठंढे बस्ते में

सीएम ने 16 जनवरी 2019 को घोषणा की थी कि साहेबगंज से गंगा नदी का पानी संताल परगना के छह जिलों में पहुंचाया जायेगा. लेकिन हकीकत इससे परे है. गंगा नदी जल बंटवारा मामला अब तक ठंढे बस्ते में ही है. इसके तहत राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर गंगा नदी से पानी लेने के लिये सर्वे कराया जायेगा. उद्योग और आर्थिक पक्ष को भी ध्यान में रखा जायेगा.

निर्माणाधीन और प्रस्तावित बांधों और जलाशयों में जल भंडारण के लिये बंगलादेश और राष्ट्र स्तर पर गंगा जल बंटवारे को लेकर अंतरराष्ट्रीय समझौता का प्रयास किया जायेगा. अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हो पाई है.

जल नीति में वे सभी बातें थी जिससे जल प्रबंधन होता

जल नीति में वे सभी बातें शामिल की गई थीं, जिससे प्रदेश में जल प्रबंधन होता. इसमें राज्य जल योजना, अंतरराष्ट्रीय जल भागीदारी, कृषि भूमि सिंचाई के लिये पानी, जल की हकदारी का हस्तांतरण, घरेलू उपभोक्ता के लिये पानी, औद्योगिक उपयोग के लिये पानी, जल गुणवत्ता के साथ जल संसाधन परियोजनाओं की बेंच मार्किंग की जानी थी. इस पर भी काम नहीं हुआ. भू-गर्भ जल प्रबंधन के लिये चास, रातू,धनबाद, गोड्डा, जमेदपुर, झरिया और रांची के कांके में जल की क्षमता के पुननिर्धारण का भी काम नहीं हो पाया. भू-गर्भ जल अधिनियम भी सही तरीके से लागू नहीं हो पाया.

ग्रामीण इलाकों में हर दिन कितने गैलेन पानी की जरूरत

 

क्षेत्र

पानी की जरुरत (गैलेन में)

धनबाद

30.50 लाख

गिरिडीह

13.80 लाख
बोकारो

28.36 लाख

पलामू (मेदिनीनगर)

1.89 लाख
गढ़वा

3.41 लाख

लातेहार

1.66 लाख
कोडरमा

4.32 लाख

हजारीबाग

4.55 लाख
जामताड़ा

4.07 लाख

गोड्डा

6.51 लाख
सरायकेला

5.23 लाख

पश्चिमी सिंहभूम

10.79 लाख
पूर्वी सिंहभूम

6.55 लाख

सिमडेगा

85 हजार

गुमला

2.72 लाख
लोहरदगा

1.65 लाख

रामगढ़

13.16 लाख

चतरा

1.28 लाख
खूंटी

1.52 लाख

पाकुड़

1.71 लाख
साहेबगंज

4.00 लाख

दुमका

2.50 लाख
देवघर

1.62 लाख

राजधानी रांची में प्रतिदिन कितने पानी की आपूर्ति

राजधानी रांची में हटिया डैम से प्रतिदिन 90 लाख गैलेन पानी की आपूर्ति होती है. कांके डैम से प्रतिदिन 40 लाख गैलेन पानी की आपूर्ति होती है. वहीं रूक्का डैम से 300 लाख गैलेन पानी की रोजाना आपूर्ति होती है. कांके डैम में 2108 फीट पानी रहने तक आपूर्ति होती है, वहीं रूक्का डैम से 1906 फीट पानी रहने तक ही आपूर्ति होती है. वहीं प्रदेश भर में ग्रामीण जलापूर्ति से लगभग 60 लाख लोगों को ही पाइप से पानी मिलता है.

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