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गांव में एक भी ट्यूबवेल न रहे खराब, बंद और खराब जलापूर्ति योजनाओं को करें ठीक: सचिव

गर्मी को देखते हुए पेयजल और स्वच्छता विभाग की तरफ से दिया गया निर्देश

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Ranchi: आनेवाली गर्मी में झारखंडवासियों को पानी की किल्लत का सामना ना करना पड़े, इसके लिए विभाग ने कुछ खास कदम उठाये हैं. राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक भी ट्यूबवेल खराब न रहें. इसको लेकर पेयजल और स्वच्छता विभाग की तरफ से सभी प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंताओं को आवश्यक निर्देश दिये गये हैं. विभागीय सचिव अराधना पटनायक ने कार्यपालक अभियंताओं से कहा है कि वे चालू ट्यूबवेल को खराब नहीं होने दें. नलकुपों की साधारण मरम्मत के लिए किसी फैसले का इंतजार नहीं करें.

खराब पड़े ट्यूबवेल का भौतिक निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत के कार्य 24 घंटे में पूरे किये जायें. सभी प्रमंडलों के अधीक्षण अभियंता चापाकलों की स्थिति पर साप्ताहिक बैठक कर, पीने के पानी की उपलब्धता को प्राथमिकता दें. पंचायतों और प्रखंड स्तर पर औचक निरीक्षण कार्य भी किया जाये.

बंद, खराब पड़े लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को चालू रखें

विभागीय सचिव ने बंद और खराब पड़े लघु और ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को चालू रखने का निर्देश दिया है. इन योजनाओं की खराबी को चिह्नित कर उसे चालू रखने की आवश्यक कार्रवाई की जाये. उन्होंने कहा है कि गर्मी के मौसम में पीने के पानी की ग्रामीण क्षेत्रों में दिक्कतें होती हैं. ऐसे में युद्ध स्तर पर चापाकलों की मरम्मत का काम किया जाये. सभी अधीक्षण अभियंताओं से कहा गया है कि वे जूनियर इंजीनियर और एसिस्टेंट इंजीनियर को प्रखंड स्तर पर नोडल पदाधिकारी घोषित करें. सभी नोडल अधिकारियों का मोबाइल नंबर प्रखंड वार उपलब्ध कराया जाये.

राज्य भर में चार लाख से अधिक हैं ट्यूबवेल

झारखंड में चार लाख से अधिक ट्यूबवेल ग्रामीण इलाकों में हैं. इसमें से सालाना 20 प्रतिशत ट्यूबवेल खराब हो जाते हैं. सरकार की तरफ से इनकी मरम्मत के लिए 15 से 20 करोड़ रुपये सालाना खर्च किये जाते हैं. इसमें राइजर पाइप बदलने से लेकर अन्य काम शामिल हैं. राष्ट्रीय ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रम के तहत ट्यूबवेल की मरम्मत को लेकर विशेष प्रावधान भी विभागों के बजट में किया जाता है.

21 से चालू होगा कंट्रोल रूम

ट्यूवबेल की खराबी के संबंध में मुख्यालय, जिला स्तर और प्रखंड स्तर पर कंट्रोल रूम भी विभाग की तरफ से बनाया जा रहा है. 21 फरवरी से ये कंट्रोल रूम सुबह आठ बजे से चालू हो जायेंगे. इसमें खराब पड़े ट्यूबवेल की शिकायत दर्ज की जायेगी. मुख्यालय में दो अभियंताओं को इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जायेगी. दर्ज की गयी शिकायत पर तीन दिनों के अंदर विभाग के स्तर पर कार्रवाई की जायेगी.

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