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केंद्र से मिलने वाली संचित राशि का ब्यौरा नहीं रखा किसी राज्य सरकार ने

आर्टिकल 275 (1) के तहत दी जाती है राज्य को राशि

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आरटीआइ में जितनी राशि आयी, उतना ही खर्च में दिखा दिया कल्याण विभाग ने

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Chhaya

Ranchi : विकास के कितने भी ताल राज्य सरकार ठोक लें, लेकिन इन विकास कार्यों की असलियत गांवों में जाकर साफ हो ही जाती है. जनजातिय क्षेत्रों के विकास के नाम पर आर्टिकल 275 (1) के तहत हर साल बड़ी राशि केंद्र सरकार राज्य को देती है. जिसे संचित राशि कहा जाता है. यह राशि राज्य गठन के बाद से ही दी जा रही है. लेकिन अब तक जितनी भी सरकारें राज्य मे बनीं, किसी ने भी इस राशि को किन-किन मदों में खर्च किया, इसका लेखा जोखा नहीं रखा. आरटीआइ से यह जानकारी मांगी गयी थी कि, राज्य गठन के बाद से कितनी राशि राज्य को केंद्र से मिली. साथ ही इस राशि को किन-किन मदों में खर्च किया गया. लेकिन कल्याण विभाग की ओर से इसकी सटीक जानकारी नहीं दी गयी. संविधान के अनुसार इस राशि का व्यय दो सालों के भीतर जनजातिय क्षेत्रों के विकास के लिए सुनिश्चित करना है.

केंद्र सरकार ने भी माना मंत्रालय ने पास नहीं है ब्यौरा

आवेदनकर्ता प्रभाकर कुजूर ने इस संबध में जनजातिय मंत्रालय भारत सरकार से आरटीआइ से जानकारी मांगी. लेकिन मंत्रालय से जवाब दिया गया कि केंद्र सरकार सिर्फ राज्य को राशि उपलब्ध करा दे रही है. इस राशि को किन-किन मदों में खर्च किया जा रहा है इसकी जानकारी नहीं है. वहीं मंत्रालय के वेबसाइट से इसकी जानकारी मिल सकती है कि किस साल कितनी राशि राज्य को दी गयी. मंत्रालय की ओर से राज्य सरकार से राशि आंवटन की जानकारी लेने की बात कही गयी.

जितनी राशि आयी उतना ही व्यय दिखाया

कल्याण विभाग ने जानकारी दी कि राज्य गठन के बाद से जिनती भी राशि इस निधि से दी गयी, उतनी राशि प्रत्येक साल जनजातिय विकास कार्यों में खर्च कर दिया गया. लेकिन किन-किन मदों में खर्च हुआ इसकी जानकारी विभाग ने नहीं दी. वहीं आरटीआइ में साल 2016-17 और 2017-18 में प्राप्त राशि का कोई खर्च नहीं दिखाया गया.

क्या है आर्टिकल 275 (1)

संविधान के आर्टिकल 275 (1) के तहत उन राज्यों को केंद्र सरकार राशि उपलब्ध कराती है जिन राज्यों को विकास के लिए सहायता की आवश्यकता होती है. नियमतः संसद की ओर से इन राज्यों का चयन किया जाता है और संसद विधि से ही इन राज्यों का उपबंध किया जाता है. जो अनूसुचित क्षेत्र में आते हैं और जहां जनजातिय कल्याण के लिए राशि की आवश्यकता हो.

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साल 2011 से 2017 तक राज्य को केंद्र सरकार से दी गयी राशि और विभाग की ओर से दी गयी खर्च का ब्यौरा :

साल              केंद्र से दी गई राशि (लाख में)                                       विभाग ने दी खर्च की जानकारी

2011-12                9181.00                                                                 9181.00

2012-13                7369.50                                                                 7369.00

2013-14                9280.40                                                                 9280.40

2014-15                9873.00                                                                 9837.00

2015-16                12202.00                                                               12202.00

2016-17                9489.38                                                                 00

2017-18                9489.5                                                                   00

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