न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

अरगोड़ा से अपहृत चप्पल व्यवसायी का 23 दिन बाद भी नहीं मिला सुराग

हिरासत में लिए गए लोगों ने स्वीकारी अपहरण की बात

27

Ranchi : 5 अक्टूबर से लापता अरगोड़ा के चप्पल व्यवसायी उदय ठाकुर का 23 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक सुराग नहीं मिल पाया है. इस अपहरण कांड में तीन संदिग्ध लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले रखा है. पुलिस के दवाब के चलते अपहरण में उपयोग किया गया बोलेरो का चालक सरदार संजय सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया है. उसके अलावा एक अन्य संदिग्ध अमित कुमार ने भी रांची मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में आत्मसमर्पण किया है. दोनों को जेल भेज दिया गया है. पुलिस उसे रिमांड पर लेने की कोशिश कर रही है.

इसे भी पढ़ेंःसदर हॉस्पिटल में कंगारु मदर केयर यूनिट का नहीं हो रहा इस्तेमाल

फुटपाथ पर चप्पल दुकान लगाता था उदय ठाकुर

अपहृत उदय ठाकुर हंटरगंज थाना के गेरुआ गांव का रहने वाला है. वह अपने चार बड़े भाईयों के साथ रांची में रहकर मारवाड़ी कॉलेज से एमबीए कर रहा था. आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उसने फुटपाथ पर चप्पल की दुकान लगा रखी थी. वह अक्सर कोलकाता से चप्पल खरीद कर लाया करता था.

इसे भी पढ़ेंःपलामू : एनएच 98 की बदहाली के खिलाफ राजद का प्रदर्शन

कैसे दिया गया घटना काे अंजाम

मिली जानकारी के अनुसार दो महीने पूर्व उसकी दोस्ती हंटरगंज रहने वाले मनीष कुमार उर्फ छोटेलाल से हुई थी, छोटेलाल रांची में ही रहता था. उदय ने दुर्गा पूजा बाजार के मद्दे नजर माल लाने के लिए कोलकाता जाने की अपनी योजना से छोटेलाल को अवगत कराई. छोटे लाल ने उदय से कहा कि उसके परिजन कोलकाता में रहते हैं इसलिए वह उसे सस्ती दर पर माल दिलवा देगा. इसके लिए उसे साथ चलना होगा, उदय राजी हो गया. एक अक्टूबर को उदय अपने घर से बैग और करीब 99 हजार रुपया लेकर निकला. तभी वहां छोटेलाल पहुंच गया उसने बताया कि उसके और कुछ साथी बोलेरो से हटिया स्टेशन जा रहे हैं, हम लोगों को वहां छोड़ देंगे. फिर बोलेरो पर सवार कुछ युवकों को वहां बुलाया और उस पर सवार होकर दोनों हटिया के लिए निकल पड़े. कुछ दिनों तक उदय कोलकाता से वापस नहीं लौटा तो परिजनों की चता बढी.  इसी बीच अचानक छोटेलाल वहां पहुंच गया. उससे उदय के परिजनों ने जब पूछताछ की तो वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाया. इससे परिजनों का संदेह बढ़ा और उसे पकड़कर अरगोड़ा थाने के हवाले कर दिया.

इसे भी पढ़ेंःपैसे को लेकर साले ने की थी जीजा की हत्‍या : एसएसपी

कबूल की अपहरण की बात

अरगोड़ा थाने में जब पुलिस ने छोटेलाल से सख्ती से पूछताछ की तो उसने कबूल किया कि उदय का अपहरण कर लिया गया है. अपहृत व्यापारी भाई मुताबिक उनकी मौजूदगी में छोटेलाल ने पुलिस को बताया कि अपहरण में प्रयुक्त गाड़ी पर गया जिला के डोभी थाना के कुसुमा गांव निवासी राजेश कुमार, बाराचट्टी थाना के चंदा गांव निवासी छोटे  उर्फ मुन्ना, हंटरगंज थाने के बेलगाड़ा नावाडीह ग्राम निवासी अमित कुमार एवं इसी थाने मोहम्मद जमील सवार थे.

इसे भी पढ़ेंःछत्तरपुर में नाबालिग जोड़े की शादी मामला : नपं अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पर एफआइआर, चौकीदार दोषमुक्त क्यों ?

उदय ठाकुर ने किया था विरोध

उदय ठाकुर जिस गाड़ी से जा रहा था. जब वो गाड़ी हटिया स्टेशन की ओर ना जा कर रातू रोड की दिशा में मुड़ी तो उदय ने विरोध किया. इसपर गाड़ी पर सवार लोगों ने कहा कि उसका अपहरण कर लिया गया है. आरोपियों ने कहा चुप बैठो नहीं तो हत्या कर दी जाएगी. इसके बाद उदय को केमिकल सुंघा दिया गया. जिसके बाद वो बेहोश हो गया.

इसे भी पढ़ेंःविकलांग जनों के सुगम मतदान को लेकर बनायी गयी कमेटी

गाड़ी के चालक ने पुलिस के सामने दिया बयान

गाड़ी के चालक संजय ने आत्मसमर्पण के बाद पुलिस को बताया कि उसे वाहन का किराया हंटरगंज के उपप्रमुख संगीता देवी के पति प्रदीप साव ने पांच सौ रुपये चुकाया था और ढा़ढस बंधाया था कि तुम्हें कुछ नहीं होगा, हम सब देख लेंगे. उसने कहा कि कनौदी स्कूल से उसे बाइक पर लेकर कुछ लोग सीतारामपुर की ओर चले गये. उस इलाके के कुछ ग्रामीणों के मुताबिक बाइक पर सवार अपहृत टॉयलेट के बहाने उतरा और चिल्लाते हुए ग्रामीण के घर में घुस गया. वह चिल्लाता रहा कि मेरा अपहरण कर लिया गया है मुझे बचाओ मगर किसी ने उसकी मदद नहीं की. अलबत्ता ग्रामीणों के सामने ही अपहर्ताओं ने अपहृत युवक की जमकर धुनाई कर दी और उसे मारते पीटते चंकी पहाड़ की ओर लेकर चले गए. तब से अब तक अपहृत का कोई सुराग नहीं मिल पाया है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें
स्वंतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकट लगातार गहराता जा रहा है. भारत के लोकतंत्र के लिए यह एक गंभीर और खतरनाक स्थिति है.इस हालात ने पत्रकारों और पाठकों के महत्व को लगातार कम किया है और कारपोरेट तथा सत्ता संस्थानों के हितों को ज्यादा मजबूत बना दिया है. मीडिया संथानों पर या तो मालिकों, किसी पार्टी या नेता या विज्ञापनदाताओं का वर्चस्व हो गया है. इस दौर में जनसरोकार के सवाल ओझल हो गए हैं और प्रायोजित या पेड या फेक न्यूज का असर गहरा गया है. कारपोरेट, विज्ञानपदाताओं और सरकारों पर बढ़ती निर्भरता के कारण मीडिया की स्वायत्त निर्णय लेने की स्वतंत्रता खत्म सी हो गयी है.न्यूजविंग इस चुनौतीपूर्ण दौर में सरोकार की पत्रकारिता पूरी स्वायत्तता के साथ कर रहा है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इसमें आप सब का सक्रिय सहभाग और सहयोग हो ताकि बाजार की ताकतों के दबाव का मुकाबला किया जाए और पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करते हुए जनहित के सवालों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए. हमने पिछले डेढ़ साल में बिना दबाव में आए पत्रकारिता के मूल्यों को जीवित रखा है. इसे मजबूत करने के लिए हमने तय किया है कि विज्ञापनों पर हमारी निभर्रता किसी भी हालत में 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो. इस अभियान को मजबूत करने के लिए हमें आपसे आर्थिक सहयोग की जरूरत होगी. हमें पूरा भरोसा है कि पत्रकारिता के इस प्रयोग में आप हमें खुल कर मदद करेंगे. हमें न्यूयनतम 10 रुपए और अधिकतम 5000 रुपए से आप सहयोग दें. हमारा वादा है कि हम आपके विश्वास पर खरा साबित होंगे और दबावों के इस दौर में पत्रकारिता के जनहितस्वर को बुलंद रखेंगे.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Open

Close
%d bloggers like this: