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नगर निगम का यूनिक वर्क स्टाइलः अटल वेंडर मार्केट बनाने के लिए न जन सुनवाई, न अंकेक्षण और न ट्रैफिक आकलन

  • मास्टर प्लान में खुला मैदान के रूप में चिह्नित है प्लाट
  • जमीन की उपयोगिता में बदलाव करने के लिए जन सुनवाई और पर्यावरण अंकेक्षण करना था

Ranchi:  अटल वेंडर मार्केट के बनते ही तरह-तरह के विरोध होन लगे हैं. नगर विकास विभाग और रांची नगर निगम ने मिल कर इस कॉमर्शियल भवन को खड़ा तो कर दिया, लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ा कर.

मास्टर प्लान में जिस जमीन को खुला मैदान या स्पोर्ट कांप्लेक्स के लिए चिन्हित किया गया था, उस जमीन पर विभाग और नगर निगम ने अटल वेंडर मार्केट बना दिया. लेकिन इसके लिए जो नियम संगत कार्रवाई थी वो नहीं की गयी.

नियमतः किसी भी जमीन को दूसरे उपयोग में लाने के लिए स्थानीय लोगों के साथ जन सुनवाई और पर्यावरण अंकेक्षण किया जाना चाहिए. इसके लिए विभाग या नगर निगम की और से पूर्व में अखबारों में विज्ञापन के माध्यम से जानकारी दी जानी थी.

लेकिन अटल वेंडर मार्केट बनाने से पहले ऐसा नहीं किया गया. अब जब मार्केट बना भी दिया गया है तो भी नगर निगम इसे बसा नहीं पा रहा है.

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तीन लाख वर्ग फीट की अधिक जमीन पर कराना होता है अंकेक्षण

मास्टर प्लान के नियमों के अनुसार कोई भी जमीन, जो तीन लाख वर्ग फीट से अधिक की हो और वह मास्टर प्लान में किसी अन्य कार्य के लिए चिन्हित हो, ऐसे में उस जमीन के इस्तेमाल के लिए जन सुनवाई और पर्यावरण अंकेक्षण होना चाहिए.

जिसके बाद बदलाव को कैबिनेट की ओर से स्वीकृति मिलने पर निर्माण का प्रावधान है. अटल स्मृति वेंडर मार्केट का निर्माण 3 लाख 6 हजार 786 स्केवेयर फीट जमीन में किया गया.

लेकिन इस प्रावधान को लागू नहीं किया गया. वहीं 2015 में शहरी विकास विभाग की ओर से रांची जिला के लिए मास्टर प्लान जारी किया गया, जो साल 2037 तक के लिए है.

ऐसे में विभाग ने अपनी स्वीकृति दी गयी  मास्टर प्लान के नियमों को ही नहीं माना और न ही नगर निगम ने.

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ट्रैफिक का आकलन करने का हाइकोर्ट ने दिया था आदेश

खुले मैदानी भागों में लगातार हो रहे भवन निर्माण के खिलाफ एक याचिका 2011 में हाईकोर्ट में दायर की गयी थी. जिसकी सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 2012 को आदेश जारी किया कि किसी ऐसे निर्माण से पहले प्रशासन की ओर से ट्रैफिक का आकलन कराना चाहिए.

जिससे जानकारी हो कि उक्त निमार्ण से ट्रैफिक पर दबाव या जनता की परेशानी न बढ़े. लेकिन निगम की ओर से ट्रैफिक अकंक्षेण तक नहीं किया गया. जबकि अटल वेंडर मार्केट शहर के बीच में बनाया गया है. और इस स्थान पर ट्रैफिक का अधिक दबाव रहता है.

क्या है व्यवस्थाएं है मार्केट में

195 वाहनों की पार्किंग, 254 कियोस्क भूतल पर,  प्रथम तल्ले में 218  कियोस्क, दूसरे तल्ले पर 108 दुकानें, तीसरे तल्ले पर 23 कार्यालय और चौथे तल्ले पर 9,475 वर्ग फुट का एक बैंक्वेट हॉल बनाया गया है.

क्या कहते हैं जिम्मेवार

इस संबध में महापौर आशा लकड़ा से कई बार जानकारी लेने की कोशिश की गयी लेकिन उनका फोन नहीं लगा. वहीं उप महापौर संजीव विजयवर्गीय से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी नहीं है.

मीटिंग में बाहर आये हुए हैं. आने के बाद बता पायेंगे. नगर विकास विभाग के सचिव से भी संपर्क करने की कोशिश की गयी लेकिन बात नहीं हो पायी.

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