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अधिकारियों के लिए नो प्रॉब्लम! नया बाजार ओवरब्रिज पर संकट

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Ranjan/roshan

Dhanbad: अगर किसी कारण से नया बाजार ओवरब्रिज बंद हो गया तो क्या होगा? जवाब होगा धनबाद की चरमरायी हुई ट्रैफिक व्यवस्था से त्रस्त शहर के लोगों का जीना कठिन हो जाएगा. धनबाद के बीच शहर में स्थित इस पुल के इस पार से उस पार तक सांस की नली की तरह लोगों की जिंदगी इसी ओवरब्रिज से जुड़ी है. यह बंद हुआ तो समझिए शहर की सांसें ठहर सी जायेंगी. एक विकल्प है बरमसिया पुल, पर संकरी सड़क ट्रैफिक के भारी बोझ को नहीं संभाल सकती. अभी आलम है कि नया बाजार ओवरब्रिज और गया पुल संकरी होने के कारण रोज सुबह से लेकर शाम तक इस सड़क पर वाहन रेंगते हैं. पूरब की ओर स्टेशन रोड से लेकर पूजा टाकिज तक और पश्चिम की तरफ बैंक मोड़, झरिया, सिंदरी सड़क और मटकुरिया तक जाम लगा होता है. दिन के समय लोग मजबूरी में ही इस पार से उस पार जाते हैं. इस आधा किमी सड़क को पार करने में अमूमन आधा से पौन घंटा लगता है. कभी-कभी ज्यादा समय भी लगता है. इन दिनों गया पुल में गड्ढा हो गया है. इस कारण जाम से स्थिति और बुरी हो गयी है.

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ओवरब्रिज की स्थिति जर्जर 

इन दिनों ब्रिज के ऊपरी हिस्से का रंग रोगन कर चमका दिया गया है. पर ब्रिज की लाइफ अभी बची है कि नहीं? इसकी लाइफ बचाने के लिए क्या जरूरी उपाय हैं? ऐसे सवाल पर जिम्मेवार अधिकारी सोच ही नहीं रहे हैं. बीते साल ब्रिज पर एक बड़ा गड्ढा हो जाने से सिर्फ एक तरफ से ही काफी दिनों तक गाड़ियां चल रही थीं. घंटों लोग जाम में फंसते थे. कुछ मरम्मती के बाद आवागमन पूरी तरह चालू हुआ. जबकि, ब्रिज लगातार जर्जर होता जा रहा है. इसकी ओर देखनेवाला कोई नहीं है. करीब पचास साल पहले बने ब्रिज के कंक्रीट का ढांचा लगातार गिर रहा है. इसका रेलिंग तो जर्जर है ही. पिलर से भी कंक्रीट गिर रहा है. ब्रिज के नीचे से गुजरनेवाले अक्सर कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़े गिरने से गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं. अक्‍सर हर पिलर का कंक्रीट गिर गया है. अंदर के लोहे के छड़ बाहर आ गये हैं. उसमें जंग लग रही है. जिम्मेवार पदाधिकारी स्पष्ट तौर पर नहीं बता रहे कि इस पुल से करीब ढाई फुट व्यास का मेन पाइप ले जाने से पुल की लाइफ कम होगी कि नहीं? जब पाइप में पानी भरा होगा तो पुल पर वाहनों के साथ कई हजार टन वजन एक्‍स्‍ट्रा बढ़ जाता है. ऊपर से पानी का भारी प्रेशर, क्या पुल की लाइफ कम नहीं कर रहा?

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बता दें कि इस ब्रिज पर सड़क मरम्मती के क्रम में अलकतरा गिट्टी के लेयर पर लेयर चढ़ाते जाने पर कुछ एक्सपर्ट इंजीनियर ने आपत्ति की थी. इसके बाद पुराने लेयर को खुरच कर हटाने की कोशिश की गयी थी. ऐसे में क्या मोटे पाइप से पुल को नुकसान नहीं?

जिम्मेवार अफसर ने गंभीरता से सोचा ही नहीं

इस पुल का रख-रखाव पीडब्ल्यूडी रोड डिवीजन के अधीन है. इसके कार्यपालक अभियंता दिलीप कुमार साव की बातों से स्पष्ट है कि इस पुल की लाइफ के बारे में उन्होंने सोचा ही नहीं है. उन्होंने कहा, आपलोग बता रहे हैं, तो इस मामले में गंभीरता से सोचने की जरूरत है. राज्य में पुल की डिजाईनिंग करनेवाले विभाग से इस पुल की स्थिति बताने के लिए लिखा गया है. उनकी रिपोर्ट के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. कोलकाता में एक पुराना पुल ढहने के बाद अगर इस पुल की लाइफ के बारे में आपलोग सोच रहे हैं तो यह स्वाभाविक ही है.

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