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विधायक सुखदेव के क्षेत्र में न पेंशन, न रोजगार और न राशन, कहां है विकास ?

किस्को प्रखंड कार्यालय के पास भीख मांग गुजारा कर रहा बिपतो नागेशिया, ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है राशन

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Lohardaga : विकास के तामझाम सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह गये हैं. शहरों की चकाचौंध से बाहर गांवों की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है. विकास और रोजगार के तमाम दावे को झुठला रही है. लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है. कांग्रेस विधायक सुखदे्व भगत के विधानसभा क्षेत्र में किस्को एक ऐसा प्रखंड है जहां कई लोगों को न पेंशन मिल रही है. न रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं. राशन भी नहीं मिल रहा है. ग्रामीणों को राशन और पेंशन बहाली के लिए कोई राजनीतिक अभिक्रम भी नहीं किया जा रहा है.

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भीख मांग रहे हैं विपतो नागेशिया

सरकार का मूल मंत्र है विकास, विकास और सिर्फ विकास. लेकिन बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि विकास कहां और किसका हो रहा है. राजनीतिक शिगुफा ही विकास है. लोहरदगा के किस्को प्रखंड स्थित देवदरिया पंचायत के बड़पानी गांव का हाल है कि वहां के ग्रामीण सरकारी सुविधाओं से पूरी तरह  कट गये हैं. ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के पहले बड़े-बड़े वायदे किये जाते हैं. चुनाव के बाद वही ढाक के तीन पात.  बड़पानी गांव भोजन का अधिकार, काम का अधिकार, सामाजिक सुरक्षा  पेंशन आदि की कोई सुविधा नहीं है.  गांव में कुल 45 परिवार रहते हैं. इसमें विपतो नागेशिया का पेंशन और राशन बंद हो गये हैं.

बिपतो प्रखंड कार्यालय के समीप भीख मांग कर गुजर-बसर कर रहे हैं. बिपता नगेसिया हाशिए पर रहने वाले वृद्ध हैं. उन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम अंतर्गत राशन कार्ड नहीं मिला है. उन्हें वृद्ध पेंशन मिलनी भी बंद हो गयी है क्योंकि उनके पास आधार कार्ड नहीं है. उनकी पेंशन योजना और बैंक खाता आधार से न जुड़ने के कारण पेंशन मिलनी बंद हो गयी. उनका नाम पेंशन सूची से कट गया. 2017 में नगेसिया ने आधार कार्ड बनवाने के लिए कई बार कोशिश की, लेकिन उनकी उंगलियों के निशान capture नहीं होने के वजह से उनका आधार नहीं बन पाया. जिस कारण राश और पेंशन से वंचित रहना पड़ रहा है.

गांव में विद्यालय तो है लेकिन शिक्षक अपनी मरजी से आते हैं

गांव के बच्चों को गांव के प्राथमिक विद्यालय में नियमित रूप से शिक्षा नहीं मिलती है क्योंकि विद्यालय के पारा-शिक्षक नियमित रूप से पढ़ाने नहीं आते हैं.  ग्रामीणों का कहना है शिक्षक अक्सर नशे में रहते हैं. बच्चे विद्यालय आते है. मघ्याहन भोजन खा कर लौट जाते है. बच्चों को मघ्याहन भोजन में कभी भी नियमित रूप से अंडे नहीं मिलते हैं. जबकि सभी बच्चों को मघ्याहन भोजन में 3 अंडे प्रति सप्ताह मिलने चाहिए.

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गांव की आंगनबाड़ी भी बेहाल

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गांव में आंगनबाड़ी तो है लेकिन उसका भवन अभी तक नही बना है. आंगनबाड़ी सेविका के घर पर चलती है.   बच्चों को आंगनवाड़ी में 3 अंडे प्रति सप्ताह मिलने हैं, लेकिन इस गांव के छोटे बच्चों को पिछले कुछ महीनों में केवल एक सप्ताह ही अंडा मिला था.  नियमित रूप से टेक होम राशन के पैकेट भी नहीं मिलते.

गांव के अनेक नरेगा मजदूरों का कई महीनों से मजदूरी भुगतान लंबित है.

सुखनी देवी ने 4-5 महीने पहले 45 दिन काम किया था, उन्हें अभी तक मज़दूरी नहीं मिली. उनसे काम तो करवाया गया लेकिन उनके नाम पर मस्टर रोल निर्गत नहीं हुआ था. मस्टर रोल निर्गत नहीं हो पाया क्योंकि उनका नाम उनके परिवार के जॉब कार्ड (JH-02-002-004-009/27) से मई 2017 को डिलीट कर दिया गया था.

झारखंड में बड़े पैमाने पर मजदूरों का भुगतान लंबित है और अभी भी समय भुगतान की कोई निश्चितता नहीं है. भुगतान लंबित होने के कई कारण है जैसे बिना भुगतान किये ही MIS में योजना को बंद कर देना, मज़दूर के आधार से जुड़े किसी और खाते में भुगतान हो जाना, rejected भुगतान, बिना मस्टर रोल निर्गत किये ही काम करवाना, जॉबकार्ड रद्द कर देना आदि.  दूसरी तरफ, झारखंड सरकार दावा करती है कि 94% भुगतान समय पर किया जाता है.

फुलमैत देवी नरेगा में अपने काम के अधिकार से वंचित हैं क्योंकि उनके जॉब कार्ड ((JH-02-002-004-009/133) को स्थानीय प्रशासन द्वारा अप्रैल 2017 को रद्द कर दिया गया है. वे मार्च-अप्रैल 2018 में काम का मांग की थी, लेकिन उन्हें काम नहीं मिला क्योंकि उनका जॉब कार्ड रद्द कर दिया गया था. प्रशासन के अनुसार उनके परिवार को जून 2018 में एक नया जॉब कार्ड नर्गित किया गया, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें नहीं है.

झारखंड सरकार दावा करती है कि आधार की मदद से 3 लाख से भी अधिक फ़र्ज़ी व डुप्लीकेट जॉब कार्ड को रद्द किया गया है. शायद फुलमैत देवी भी वैसी ही एक फ़र्ज़ी मज़दूर हैं. 2017 में किये गये एक RTI के जवाब में केंद्र सरकार ने पूरे देश में रद्द किये गये कार्डों का breakup दिया था. रद्द किये गये कार्डों से केवल 12.6 % कार्ड फ़र्ज़ी अथवा डुप्लीकेट पाये गये थे (कुल निर्गत जॉब कार्ड के 1% से भी कम)

(वीडियो सभार मनरेगा संर्घष मोर्चा)

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