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सभी दलों में बैठे हैं बयानवीर, चला रहे हैं शब्दों के तीर

किसी भी दल के पास कोई कार्यक्रम नहीं, एक दूसरे के बयानों पर प्रतिक्रिया देना रह गया है सभी पार्टियों का काम

Ranchi : झारखंड की राजनीति बढ़ते ठंड की तरह ठंडी हो गयी है. सिर्फ बयानों के सहारे झारखंड की राजनीति चल रही है. किसी भी राजनीतिक दल के पास कोई कार्यक्रम नहीं है. पिछले कई महीने से यही देखा जा रहा है कि सभी राजनीतिक दलों का काम मात्र एक दूसरे के बयानों पर प्रतिक्रिया देना रह गया है.

भाजपा अगर कोई बयान जारी करती है तो झामुमो और कांग्रेस उसके बयान का खंडन कर अपने कर्तव्य का पालन कर लेती है और यदि कांग्रेस या झामुमो कोई बयान देते हैं तो भाजपा उस पर बयान जारी कर देती है. सांगठनिक रूप से किसी भी पार्टी का कोई काम नहीं दिख रहा है.

झारखंड में भाजपा सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है. भाजपा बड़े दावे के साथ यह कहती है कि उसका सांगठनिक कार्य हमेशा चलता रहता है. गौर किया जाये तो भाजपा भी अभी रेस दिखायी नहीं दे रही है. भाजपा के भी संगठन का काम काफी धीमा चल रहा है. लगभग तीन महीने पहले भाजपा ने सभी जिले के जिला अध्यक्षों की घोषणा कर दी लेकिन अभी तक सभी जिले का सांगठनिक विस्तार नहीं हुआ है,

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जबकि भाजपा ने जिला अध्यक्षों की घोषणा के साथ ही सभी जिले के प्रभारियों की भी घोषणा कर दी थी और एक महीने के भीतर जिला कमिटी कि घोषणा करने का निर्देश दिया था. कई जिले में मंडल अध्यक्षों के नाम की घोषणा नहीं हुई है. जबकि रायशुमारी से लेकर अन्य जितनी भी प्रक्रियाएं हैं, वह पूरी हो चुकी हैं. आलम यह है कि पंचायत और मंडल स्तर पर पार्टी का जो कार्यक्रम चलना चाहिए था वह नहीं हो रहा है.

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सत्ताधारी दल में झामुमो सबसे बड़ी पार्टी है और उसके बाद दूसरे नंबर पर कांग्रेस है. इन दोनों पार्टियों का भी कोई कार्यक्रम देखने को नहीं मिल रहा है. सांगठनिक स्तर पर झामुमो और कांग्रेस के द्वारा क्या कार्यक्रम हो रहे हैं यह पता नहीं चल रहा है. विपक्ष के सरकार पर किये जा रहे प्रहारों का खंडन करना मात्र ही झामुमो और कांग्रेस का काम रह गया है. यह कहें तो कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी कि कांग्रेस और झामुमो के लोग सिर्फ सरकार के प्रवक्ता होने का फर्ज निभा रहे हैं. राजद, जदयू, आजसू सहित अन्य छोटी पार्टियां शांत बैठी हुई हैं.

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