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झारखंड के स्कूलों में अब नहीं मिलेगी शब-ए-बरात की छुट्टी, करमा-जितिया के दिन भी होगी पढ़ाई

उर्दू विद्यालयों का जुमे का साप्ताहिक अवकाश अब सालाना छुट्टी में शामिल, शिक्षक संघ का विरोध शुरू

Ranchi: प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने प्राथमिक व मध्य विद्यालयों का राज्य स्तरीय अवकाश की तिथि की घोषणा कर दी. इस अवकाश तालिका में पहली बार उर्दू विद्यालयों के लिए अलग से अवकाश का प्रावधान नहीं रखा गया है. इसके अलावा, शबे-ए-बरात पर कोई अवकाश नहीं दिया गया है और लोक आस्था से जुड़े टुसु, करमा, मनसा पूजा, जितिया, तीज समेत कई क्षेत्रीय पर्वों के दिन भी अवकाश नहीं दिया गया है.

इस अवकाश तालिका के जारी किये जाने के बाद शिक्षक संघ ने इसका कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया है. अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष बिजेंद्र चौबे ने कहा कि इस अवकाश तालिका में कई व्यवहारिक खामियां है, जिसपर राज्य के शिक्षकों ने घोर आपत्ति दर्ज करायी है.

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पहले जिला स्तर से तैयार होती थी तालिका

उन्होंने कहा, अब तक के नियमों के अनुसार प्रारंभिक विद्यालयों की अवकाश तालिका जिला स्तर पर जिला शिक्षा अधीक्षकों द्वारा तैयार की जाती रही है जिसमे स्थानीय और लोक पर्व-त्यौहारों को भी स्थान दिया जाता था. लेकिन इस बार प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जिलों से तैयार अवकाश तालिका को राज्य स्तरीय आदेश से प्रतिस्थापित कर दिया गया. इस तरह स्थानीय अवकाश एवं उर्दू विद्यालयों की अवकाश व्यवस्था की व्यापक अनदेखी की गयी है.

संघ के महासचिव राममूर्ति ठाकुर व मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने संयुक्त रूप से कहा है कि राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों के लिए वर्ष 2021 की अवकाश तालिका में सुधार किये जाने की जरूरत है. संघ ने इस अवकाश तालिका को अव्यवहारिक बताते हुए इसके स्थान पर पुनः जिला स्तरीय अवकाश तालिका की स्वीकृति की मांग की है.

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क्षेत्रीय पर्वों की अनदेखी

नसीम अहमद ने कहा कि निदेशालय से जारी अवकाश तालिका में उर्दू विद्यालयों के लिए अलग से अवकाश का प्रावधान नहीं रखा गया है, जिससे शुक्रवार को पड़ने वाले अवकाश को भी उनके सालाना अवकाश में शामिल दिखाया गया है, जबकि उर्दू विद्यालयों में तो प्रत्येक शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश घोषित रहता है. इनका कहना है कि कई क्षेत्रीय पर्वों के दिन अवकाश नहीं दिया गया है, जबकि इन पर्वों के अवसर पर छोटे बच्चों की उपस्थिति विद्यालयों में नहीं रहती है.

संघ ने बताया कि संथाल परगना प्रमंडल के जिलों में भी मई-जून माह में ही ग्रीष्मावकाश दिया गया है, जबकि श्रावणी मेले को देखते हुए अबतक देवघर, दुमका एवं आस पास के जिलों में सावन मास में ये अवकाश दिया जाता था जिससे इसी अवकाश में श्रावणी मेले का एक बड़ा समय बीत जाता था और अलग से विद्यालय बाधित नहीं होता था.

महापुरुषों की जयंती पर कई अवकाश दिये गये हैं जबकि विद्यालयों में इनकी जयंती के दिन इन महापुरुषों का जन्म दिन मनाने का निर्देश निर्गत किया जाता रहा है. प्रदेश के सभी प्रमंडलों में स्थानीय अवकाश अलग-अलग होता है और उस हिसाब से सभी जिले अवकाश घोषित करते हैं.

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