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थानेदारों पर एसएसपी के आदेश का असर नहीं, पीड़ितों की शिकायत दर्ज करने से कतराती है पुलिस

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Ranchi : एसएसपी अनीश गुप्ता के आदेश का थानेदारों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है. इसके कारण पुलिस की कार्यशैली पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. एसएसपी अनीश गुप्ता ने रांची जिला के सभी थानेदारों को निर्देश दिया था कि अगर पुलिस और पब्लिक के बीच की दूरियों को कम करना है, तो रांची पुलिस के थाना स्तर के अधिकारियों को अपनी कार्यशैली में सुधार लाना होगा. लेकिन, थाना स्तर के पुलिस अधिकारियों पर एसएसपी के इस निर्देश का कोई असर नहीं दिख रहा है.

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एफआईआर दर्ज करने से कतराती है पुलिस

रांची पुलिस इन दिनों प्राथमिकी दर्ज करने से ही कतराने लगी है. कारण चाहे जो हो, सबसे बड़ा सवाल उठता है कि मामला छोटा हो या बड़ा, आम लोगों की शिकायत थाना में दर्ज नहीं होगी, तो वे कहां शिकायत दर्ज कराने जायेंगे. पुलिस अगर शिकायत दर्ज करती भी है, तो भुक्तभोगी को कई बार थाने का चक्कर लगवाने के बाद.

दूसरे थाने का मामला कहकर दौड़ाया जाता है

कई बार ऐसा होता है कि जब किसी के साथ कोई लूट और चोरी की घटना होती है या किसी के बैंक अकाउंट से एटीएम के जरिये अवैध तरीके से पैसे की निकासी होती है और जब वह अपने संबंधित थाना में शिकायत दर्ज कराने जाता है, तो भुक्तभोगी को थाना द्वारा कहा जाता है कि यह हमारे थाना क्षेत्र का मामला नहीं है. यह दूसरे थाना क्षेत्र का मामला है, वहां जाकर शिकायत दर्ज करायें. जब भुक्तभोगी दूसरे थाना में शिकायत दर्ज कराने जाते हैं, तो वहां कहा जाता है कि हमारे थाना क्षेत्र का मामला नहीं है. थाना क्षेत्र के मामले के बीच में भुक्तभोगी को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

अक्सर थानों से लोगों को बहाने बनाकर भगा दिया जाता है

रांची पुलिस जल्दी एफआईआर दर्ज करना ही नहीं चाहती है. अक्सर थानों से लोगों को बहाने बनाकर भगा दिया जाता है. अगर किसी की मोटरसाइकिल चोरी हो जाती है या रास्ते में कोई किसी का पर्स छीन ले, एटीएम से अवैध रूप से पैसे की निकासी हो जाये या किसी अन्य मामले में कोई एफआईआर दर्ज कराने जाये, तो उससे तरह-तरह के कागजात मांगे जाते हैं और परेशान किया जाता है. कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि लोगों के मन में आता है कि एफआईआर ही नहीं करायें.

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एसएसपी ने पुलिस अधिकारियों को कार्यशैली सुधारने का दिया है निर्देश

एसएसपी अनीश गुप्ता ने रांची जिले के सभी थानेदारों के साथ समीक्षा बैठक की थी, जिसमें उन्होंने सभी थानेदारों को निर्देश दिया कि पुलिस और पब्लिक के बीच की दूरियों को कम करना है, तो रांची पुलिस के थाना स्तर के अधिकारियों को अपनी कार्यशैली में सुधार लाना होगा. साथ ही साइबर ठगी की शिकायत के लिए मोबाइल नंबर 8987790674 जारी किया गया है, जिस पर कॉल कर और व्हाट्सएप के जरिये शिकायत की जा सकेगी. इसे साइबर सेल से कनेक्ट किया जायेगा, ताकि त्वरित कार्रवाई हो सके. वहीं, एसएसपी अनीश गुप्ता ने साइबर फ्रॉड के लिए तुरंत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश सभी थाना प्रभारियों को दिया है.

हाल के दिनों में कुछ ऐसे मामले, जिसमें पुलिस की लापरवाही सामने आयी

  • 17 दिसंबर को पंडरा ओपी और सुखदेव नगर थाना की पुलिस यौन शोषण की एक पीड़िता को दौड़ाती रही. ओपी और थाने की पुलिस ने कार्रवाई करना तो दूर, आवेदन तक नहीं लिया. दोपहर से लेकर शाम तक पीड़िता कभी सुखदेवनगर थाना, तो कभी पंडरा ओपी का चक्कर लगाती रही. थक-हारकर पीड़िता रविवार की रात साढ़े दस बजे कोतवाली थाना पहुंची. थानेदार श्यामानंद मंडल से मुलाकात कर आपबीती भी सुनायी, जिसके बाद महिला थाना में शिकायत दर्ज की गयी.
  • 16 दिसंबर को सदर थाना पुलिस पर सवाल खड़े करते हुए चित्रा कुमारी नाम की महिला ने अपने ऊपर जानलेवा हमले के आरोप में कई लोगों पर मामला दर्ज करवाया, लेकिन महिला का कहना है कि एफआईआर से छेड़छाड़ हुई है. उसके मुताबिक थाना में कमजोर धाराओं के साथ मामला दर्ज किया गया.
  • 15 दिसंबर को पीएम के निजी सचिव के भाई ओली मिंज के बैंक अकाउंट से 50- 50 हजार रुपये करके एक लाख रुपये की निकासी हो गयी थी. इस मामले में भुक्तभोगी डोरंडा थाना में शिकायत दर्ज कराने गये, तो वहां महिला मुंशी ने ओली मिंज के साथ बदसलूकी की और उन्हें थाना से भगा दिया था.
  • 13 दिसंबर को गोशाला के समीप गोरखनाथ लेन स्थित दुकानदार ने जमीन मालकिन के कहने पर कोतवाली पुलिस द्वारा मारपीट का आरोप लगाया. दुकानदार अरुण सिंह का कहना है कि मामूली विरोध करने पर उसके साथ जिप्सी में आयी कोतवाली पुलिस ने मारपीट की.
  • 6 दिसंबर को सीआरपीएफ के जवान पवन कुमार मुंडा ने लापुंग थाना प्रभारी विकास कुमार पर बर्बरता से पिटाई का आरोप लगाया था. विकास के अनुसार थाना के चार जवानों को भेजकर उसे थाना प्रभारी ने बुलवाया और उसके नाजुक अंगों पर खूब लाठियां मारीं. तीन दिनों तक उसे थाने में रखा गया, फिर जब स्थिति बिगड़ने लगी, तो छोड़ दिया गया.

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