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बिजली फिकस्ड चार्जेज पर अब तक कोई फैसला नहीं, चेंबर सरकार से लगातार कर रही है मांग

  • लॉकडाउन के दूसरे चरण के बाद से ही लगातार लिखा जा रहा मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को पत्र
  • चेंबर ने समस्याओं के साथ सुझाव भी दिया, अब तक खुले हैं सिर्फ 20 प्रतिशत कारखानें

Ranchi :  केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के दूसरे चरण में कुछ क्षेत्रों में रियायत दी. जिसमें उद्योग और कारखानों को ग्रामीण क्षेत्रों में खोलने की बात की गयी. राज्य सरकार ने इन दिशा निर्देशों का पालन तो किया. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक उद्योग सही से नहीं खुल पाये हैं. जो कारखानें खुले हैं, वहां मजदूरों की कमी, कच्चा माल की समस्या आदि से व्यवसायी जूझ रहे हैं.

व्यवसायियों की समस्या को लेकर 11 अप्रैल से लगातार फेडरेशन ऑफ झारखंड चेंबर ऑफ कार्मस एडं इंडस्ट्रीज की ओर से मुख्यमंत्री समेत विभाग और अन्य मंत्रियों को पत्र लिखा जा रहा है. जिसमें व्यवसायियों की समस्या से लेकर कुछ रियायत देने की मांग की जा रही है. इसके बाद भी राज्य में व्यवसायियों की समस्या पर अब तक कोई पहल नहीं की जा रही है.

पिछले दिनों फिर से चेंबर की ओर से 7 मई को मुख्यमंत्री को इस संबध में पत्र लिखा गया. वहीं वित्त मंत्री समेत अन्य मंत्रियों के साथ लगातार चेंबर की ओर से मुलाकात की जा रही है. लेकिन इसके बाद भी इनकी मांगों पर संज्ञान नहीं लिया जा रहा है.

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बिजली की फिकस्ड चार्जेज में रियायत की है मांग

केंद्र की ओर से 14 अप्रैल को लॉकडाउन के दूसरे चरण की घोषणा करते हुए, तारीख तीन मई तक बढ़ायी गयी. इसके पहले ही चेंबर की ओर से बिजली की फिकस्ड चार्जेज में कमी करने की मांग की जा रही थी. 24 मार्च के पहले से राज्य के उद्योग कारखानें बंद हैं. व्यवसायियों को अपने कर्मचारियों को वेतन भी देना है. ऐसे में लगातार राज्य सरकार से बिजली की फिकस्ड चार्जेस में छूट की मांग की गयी.

जिसका जिक्र चेंबर की ओर से लिखे पत्र में भी बार-बार किया गया. वहीं मुख्य सचिव ने भी चेंबर प्रतिनिधियों को आश्वसत किया था कि इस संबध में मुख्यमंत्री निर्णय लेंगे. लेकिन लॉकडाउन का तीसरा चरण समाप्त होने को है और अब तक इस संदर्भ में कोई निर्णय संभव नहीं हो पाया है.

बता दें कि केंद्र के आदेश के बाद राज्य सरकार ने उपायुक्तों को उद्योग खोलने की अनुमति देने का आदेश दिया. देवघर, रामगढ़, रांची, गिरिडीह आदि जिलों में इसके लिए अनुमति भी दी गयी. लेकिन उद्योग 20 प्रतिशत की संचालित है. हालांकि मुख्य सचिव की उच्चस्तरीय बैठक में केंद्र की रियायतों को जारी रखा गया, लेकिन बिजली फिकस्ड चार्जेस पर कोई पहल नहीं की गयी.

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आर्थिक पैकेज से लेकर अन्य राज्यों के दिये गये उदाहरण

चेंबर की ओर से लॉकडाउन दो के पहले से इस संबध में पत्र लिखा जा रहा था. पहले बिजली की फिकस्ड चार्जेज में छूट देने की मांग थी. लेकिन लॉकडाउन के साथ-साथ समस्याएं बढ़ती गयीं. जिसमें बिहार सरकार की ओर से 33 प्रतिशत वर्क फोर्स के साथ काम चालू करने, पंजाब आदि राज्य में किये गये प्रावधान आदि की जानकारी दी गयी.

व्यवसायियों के लिए राहत पैकेज, एसएमई के लिए मजबूत प्रोत्साहन पैकेज आदि की मांग की जा रही है. उद्योगों को बंद हुए डेढ़ महीने होने को हैं. चेंबर अध्यक्ष कुणाल आजमानी ने जानकारी दी कि राज्य सरकार को एक महीने में छोटे, मध्यम और लघु उद्योगों से 15000 करोड़ का मुनाफा होता है.

खुद मंत्रियों ने ये माना है कि राज्य की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. इसके बाद भी अगर उद्योगों की स्थिति ठीक नहीं की गयी, राज्य में बेरोजगारी दर बढ़ेगी. क्योंकि रोजगार देने में एमएसएमई और एमएसई का योगदान सबसे अधिक है.

क्या मांग की जा रही चेंबर की ओर से

बिजली की फिकस्ड चार्जेस में छूट, अन्य राज्यों की तरह एसएमई और एमएसएमई के लिए दो से तीन प्रतिशत पर आर्थिक पैकेज की घोषणा की जाये, ट्रेजरी में लंबित सभी भुगतान किये जायें, पड़ोसी राज्य बिहार की तर्ज पर सेक्टर वाइज दुकानों को खोलने की अनुमति दी जायें, इसमें शॉपिंग मॉल  को छोड़कर, सर्विसिंग दुकानों को एक निश्चित समय के लिये खोलने की अनुमति दी जाये.

व्यापारियों की समस्या के लिए अलग से नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया जायें समेत अन्य मांग की जा रही है. इन समस्याओं पर चेंबर ने सुझाव भी दिया है.

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