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पिकनिक स्पॉट्स पर नहीं है पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, राजधानी से सटे फॉल में सिर्फ खानापूर्ति

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  • सुरक्षा बलों के स्थान पर स्थानीय लोग रहते हैं सक्रिय, फर्स्ट एड सुविधा नदारद
  • 26 जनवरी तक पिकनिक के मूड में रहते हैं लोग
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Ranchi : राज्य के पर्यटन स्थलों को विकसित करने का वादा राज्य सरकार ने किया था, ताकि सैलानी अधिक से अधिक राज्य में आयें और यहां के लोगों को रोजगार मिले. लेकिन राजधानी से सटे कुछ पर्यटन स्थलों का जायजा लेने पर हकीकत सामने आ जाती है. दशम फॉल, हिरनी फॉल, बिरसा अमृत विहार, जोन्हा फॉल, रानी फॉल, सीता फॉल, पंचघाघ, हुंडरू फॉल आदि जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी है. जबकि, इन जगहों पर अधिक संख्या में सैलानी आते हैं. ये स्थल काफी मनोरम हैं, जहां दिसंबर से लेकर जनवरी तक सैलानियों का आना लगा रहता है. फिर भी इन स्थलों पर सुरक्षा की कोई उचित व्यवस्था नहीं देखी जाती है.

रानी फॉल के टूटे वॉच टावर पर चढ़कर नजारा देखते हैं लोग

रांची से 47 किलोमीटर दूर रानी फॉल स्थित है. फॉल की खूबसूरती देखते बनती है. खूंटी-तमाड़ मार्ग से होकर जाने से यहां पुल रहित तजना नदी बहती है, जिसे पार करना काफी मुश्किल है. लोग यहां मनोरम दृश्यों का आनंद ले सकें, इसके लिए वॉच टावर बनाये गये थे. ये वॉच टावर अब क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, लेकिन अब भी लोग इससे चढ़कर दृश्यों का आनंद लेते हैं. फॉल तक पहुंचने के लिए लोगों को कच्ची सड़क पार करनी होती है. पार्किंग की व्यवस्था भी नाम मात्र की है. एक अनुमान के मुताबिक, रानी फॉल में प्रतिदिन लगभग 5,000 लोग आते हैं. यहां कुत्तों का आतंक अधिक है.

दशम फॉल में सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति, रास्ते में जगह-जगह की जाती है पैसों की वसूली

दशम फॉल राजधानी से 34 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां सालों भर सैलानियों का आना लगा रहता है. सुरक्षा व्यवस्था की बात की जाये, तो यहां भी सिर्फ खानापूर्ति की गयी है. कुछ साल पहले डेंजर जोन के नाम पर फॉल के मुहान में रस्सी बांधी गयी थी, लेकिन अब रस्सी जीर्ण-शीर्ण हो गयी है. टाटा और खूंटी मार्ग से यहां जाया जा सकता है, लेकिन इन मार्गों पर जगह-जगह स्थानीय लोग 30-40 रुपये की वूसली करते हैं और पार्किंग के लिए अलग से 30 रुपये लिये जाते हैं. फॉल तक पहुंचने में चार-पांच जगहों पर स्थानीय लोग वसूली करते हैं. यहां भी फॉल के पास सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं दिखाई देता है.

हिरनी फॉल में तय नहीं पार्किंग शुल्क

रांची-चाईबासा मार्ग पर स्थित हिरनी फॉल अद्भुत मनोरम दृश्यों से भरा है. न सिर्फ दिसंबर और जनवरी, बल्कि अन्य महीनों में भी यहां सैलानियों का आना लगा रहता है. फॉल के नीचे जाने से पहले यहां कैंपसनुमा गार्डेन बना है, जहां पार्किंग की व्यवस्था है. लेकिन, यहां पार्किंग शुल्क तय नहीं है. अलग-अलग लोग यहां मनमाने तरीके से पार्किंग शुल्क की वसूली करते हैं. पुलिस प्रशासन की उपस्थिति नहीं होने के कारण भी स्थानीय लोग यहां मनमानी करते हैं.

पंचघाघ में नहीं दिखता पुलिस बल

रांची से 49 किलोमीटर की दूरी पर पंचघाघ स्थित है. प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ यह स्थल बच्चों के लिए सुरक्षित भी है. सैलानियों की उपस्थिति यहां सालों भर दर्ज की जाती है, फिर भी यहां सुरक्षा की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है. पूर्व में भी यहां लोगों के गायब होने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं. फिर भी यहां पुलिस बलों की अनुपस्थिति देखी जाती है. पार्किंग के लिए यहां तीन-चार जगहों पर अलग-अलग दर ली जाती है.

राज्य के किसी भी पर्यटन स्थल पर उपचार की व्यवस्था नहीं

पर्यटन स्थलों पर लोगों के गिरने, घायल होने की खबरें आती रहती हैं, लेकिन राज्य के किसी भी पर्यटन स्थल पर छोटे डिसपेंसरी आदि की व्यवस्था नहीं की गयी. घायल होने पर लोगों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में आना पड़ता है.

पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक बोले- जाकर स्थलों को देखें, फिर पूछें सवाल

न्यूज विंग संवाददाता ने पहली जनवरी को रांची, खूंटी जिले में अवस्थित इन दर्शनीय स्थलों का दौरा किया था और वहां की स्थिति का जायजा लिया. संवाददाता को यह पता चला कि सभी जगहों पर अलग-अलग पार्किंग शुल्क है. कहीं-कहीं बीच रास्ते में ही स्थानीय युवक वसूली करते हैं. इसके बाद ही पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक राजीव रंजन से सुरक्षा और फर्स्ट एड सुविधाओं की जानकारी मांगनी चाही. इस पर राजीव रंजन ने कहा, “पहले स्थल पर जायें, फिर सवाल पूछें. पर्यटन विभाग की ओर से इन स्थलों पर स्थानीय लोगों को रखा गया है. वे ही इन स्थलों की सुरक्षा की देख-रेख कर रहे हैं. पुलिस की नियुक्ति स्थानीय डीसी करेंगे. उन्हीं से पूछ लें.”

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