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झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत समर्पण करने वाले नक्सलियों के सामने जीवन यापन की समस्या, SSP ने की समीक्षा

Ranchi : झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले पूर्व नक्सलियों के सामने कई तरह की परेशानियां हैं.  कई के पैसे बकाये हैं, तो कई को आत्मसमर्पण के बाद मिलने वाली जमीन भी नहीं मिल पाई है. राजधानी रांची में आत्मसमर्पण करने वाले कई नक्सली और उनके परिवार मंगलवार को रांची एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा से मिले और एसएसपी के सामने अपनी समस्याओं को रखा.

 

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एसएसपी ने की समीक्षा

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर मंगलवार को रांची एसएसपी ने समीक्षा की. पुलिस के सामने हथियार डालने वाले कई नक्सली खुद एसएसपी के पास पहुंचे थे. जहां आत्मसर्पण करने वाले नक्सली और उनके परिवार के लोगों ने एसएसपी को बताया कि उन्हें किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. जिसके बाद एसएसपी ने डीएसपी हेडक्वार्टर को एक को जिम्मेवारी दी है कि वे पूरे मामले में मॉनिटरिंग कर आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की जो समस्याएं हैं उसे दूर करें.

 

विवादित जमीन मिली, कब्जा किसी और का

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को राजधानी में 4 डिसमिल जमीन देने का प्रावधान है, लेकिन अब तक कई को जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है. वहीं कई को जमीन मिला भी है तो  वह विवादित है. आत्मसमर्पण करने वाली महिला नक्सली रश्मि को नगरी इलाके में 4 डिसमिल जमीन दिया गया है, लेकिन रश्मि ने एसएसपी को बताया कि उस जमीन पर किसी और ने घर बना लिया है. कुछ इसी तरह का मामला आत्मसमर्पण कर चुके,गुरुवारी महली,उर्मिला कुमारी और रामपदो का भी है.

 

कौन कौन मिला एसएसपी में

मंगलवार को रांची से सिटी से मुलाकात करने वाले पूर्व नक्सलियों में रश्मि महली, गुरुवारी कुमारी, उर्मिला कुमारी ,नैति कुमारी ,राम पदों लोहरा और पूर्व नक्सली त्रिलोचन सिंह मुंडा का परिवार शामिल था.

 

साल 2014 में रांची पुलिस के सामने हथियार डालने वाली महिला नक्सली नैति कुमारी फिलहाल  पार्ट वन में पढ़ाई कर रही हैं. नीति के अनुसार अभी तक उन पर चल रहे मामले लंबित हैं. जिसकी वजह से वह किसी भी नौकरी के लिए फॉर्म नहीं भर सकती. उन्होंने एसएसपी से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द उनके उपर चल रहे मुकदमों को खत्म किया जाय. साथ ही जब तक मुकदमा चल रहा है तब तक रोजगार की कोई व्यवस्था की जाय.

 

झारखंड में आत्मसमर्पण करने के बाद पुनर्वास नीति के तहत कई तरह की सुविधाएं मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों को मिलती है. जैसे मुकदमा का खर्चा, केस के निष्पादन की व्यवस्था, जिनकी जमीन नहीं है उनको जमीन, घर का किराया, बच्चों की शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण एवं  परिवार का जीवन बीमा राशन कार्ड बनवाना और केस खत्म होने पर नौकरी का मिलना.

 

समीक्षा के बाद रांची एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा ने बताया कि सरेंडर पॉलिसी का कई लोगों को बेहतर लाभ मिल रहा है. कुछ लोगों को सरेंडर पॉलिसी के तहत मिलने वाली सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाया है, जिसे लेकर उन्होंने आज रिव्यू किया.

इस दौरान खुद भी कई पूर्व नक्सली उपस्थित हुए और अपनी समस्याओं को उन्होंने रखा.

 

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Nayika

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