JamshedpurJharkhandMain SliderNationalNEWSRanchiTODAY'S NW TOP NEWSTOP SLIDERTop Story

रघुवर दास की ईमानदारी साबित करने के चक्कर में किसे “शकुनि” कह गये निशिकांत दुबे!

Anand Kumar

Jamshedpur : गुरुवार 11 अगस्त को दो ट्वीट किये गये. एक ट्वीट खबर बनी. दूसरी ने उतना ध्यान नहीं खींचा. लेकिन दूसरे ट्वीट में एक ऐसे शब्द का इस्तेमाल किया गया, जो अपने-आप में ध्यान खींचनेवाला है. पहला ट्वीट भाजपा के पुराने धुरंधर और अब निर्दलीय विधायक सरयू राय का था. राय ने इस ट्वीट में मैनहर्ट घोटाले में एसीबी जांच पूरी हो जाने के बावजूद किसी तरह की कार्रवाई नहीं किये जाने को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर करने की जानकारी दी थी. उन्होंने लिखा था –  ‘मैनहर्ट घोटाला की जांच में आरोप सिद्ध हो जाने, मुख्य अभियुक्त सहित कई अभियुक्तों का जवाबी बयान आ जाने के बावजूद हेमंत सोरेन सरकार द्वारा आगे की कार्रवाई नहीं करने के विरूद्ध झारखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गयी है. याचिका पर सुनवाई की प्रतीक्षा है.’  यह बताने की जरूरत नहीं कि मैनहर्ट घोटाला मामले में मुख्य आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास हैं.

Sanjeevani

सरयू राय के रिट करने की खबर उसी दिन सभी वेब समाचार पोर्टलों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में चली. शुक्रवार को अखबारों ने भी इसे स्थान दिया. लेकिन इसी दिन और ट्वीट आया गोड्डा से भाजपा के सांसद डॉ निशिकांत दुबे का. निशिकांत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग करते हुए अपने ट्वीट में लिखा – “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, भाजपा का कार्यकर्ता ईमानदारी से अपना जीवन जीता है,आपकी पुलिस कुआं खोदकर भी रघुवर दास जी के विरुद्ध कुछ नहीं कर पायी, अब ACB को जांच को बंद करना पड़ रहा है. काश आपके शकुनि समझ पाते?”

वर्ष 2019 के विधानसभा चुनावों में रघुवर दास को उनके ही विधानसभा क्षेत्र से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार हराने के बाद सरयू राय के लगातार दबाव बनाने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दो मामलों की जांच झारखंड के एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपी थी. इनमें से एक मामला था 2005 का मैनहर्ट कंसलटेंट नियुक्ति घोटाला और दूसरा था 2016 में झारखंड स्थापना दिवस पर स्कूली बच्चों के बीच टॉफी-टीशर्ट वितरण तथा गायिका सुनिधि चौहान के कार्यक्रम में घोटाले का आरोप (Raghubar Das Manhart And Toffy T shirt Scam). इनमें से एसीबी मैनहर्ट मामले की जांच पूरी कर चुकी है, जबकि टॉफी-टीशर्ट वितरण और सुनिधि चौहान के कार्यक्रम  के मामले की जांच अभी जारी है. जाहिर है कि निशिकांत दुबे अपने ट्वीट के जरये टॉफी-टीशर्ट वितरण और सुनिधि चौहान के कार्यक्रम की एसीबी जांच के बारे में इशारा कर रहे हैं. उनका ट्वीट यह जताने की कोशिश है कि एसीबी को इरादतन रघुवर दास की छवि खराब करने के लिए उनके खिलाफ लगाया गया था और जब कोई साक्ष्य नहीं मिल पाया, तो जांच बंद की जा रही है.

हालांकि निशिकांत दुबे के इस ट्वीट के बाद एसीबी की ओर से साफ कहा गया कि कोई भी मामला अभी बंद नहीं हुआ है, सभी मामलों की जांच जारी है. मैनहर्ट घोटाला और टॉफी-टीशर्ट घोटाला के अतिरिक्त कुछ माह पूर्व ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रघुवर कैबिनेट के मंत्रियों के खिलाफ भी एसीबी से जांच कराने का आदेश दिया है.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि निशिकांत चर्चा  में बने रहने के लिए कई बार जानबूझ कर ऐसे ट्वीट करते हैं. इस ट्वीट को सरयू राय के 25 मई 2021 के ट्वीट से भी जोड़ कर देखा जा रहा है, जो उन्होंने निशिकांत दुबे की पीएचडी डिग्री मामले में झारखंड पुलिस की कार्रवाई को लेकर लिखा था. सरयू राय ने अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग करते हुए लिखा था -” @HemantSorenJMM
सांसद निशिकांत दूबे की पीएचडी डिग्री की तलाश में दुमका,आईजी ने प्रताप यूनिवर्सिटी,राजस्थान के कुलपति को पत्र भेजा है.पत्र में देवघर थाना के जिस कांड की जांच का ज़िक्र है,उस एफआईआर में ऐसा कुछ है ही नहीं.ऐसी पुलिस कार्य संस्कृति से बाहर में राज्य की कैसी छवि बनेगी?”

सरयू के उस ट्वीट पर तब सवाल उठे थे कि क्या सरयू राय झारखंड पुलिस की छवि को चमकाना चाहते हैं या गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे को पीएचडी डिग्री केस में फंसाना. इस ट्वीट के बाद अंदेशा जताया जा रहा था कि झारखंड की राजनीति में राय और दुबे के बीच वार-पलटवार देखने को मिलेगा, हालांकि उस समय ऐसा कुछ नहीं हुआ था. लेकिन हाल के दिनों में सांसद निशिकांत दुबे और रघुवर दास की नजदीकियां बढ़ी हैं. सांसद के 11 अगस्त के ट्वीट को इन दोनों प्रकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है.

निशिकांत ने अपने ट्वीट में “शकुनि” किसे कहा है, इसे समझना बहुत मुश्किल भी नहीं है. भाजपा में रहते हुए और बाद में भी सरयू राय और निशिकांत दुबे के रिश्ते काफी मधुर रहे थे. सरयू राय के कई कार्यक्रमों में भी निशिकांत दुबे की उपस्थिति रही है. पर्यावरण से जुड़े उनके कामों को सांसद दुबे अपना समर्थन देते रहे हैं, लेकिन बदली राजनीतिक परिस्थितियों में दोनों के रास्ते अलग हो चुके हैं. विधानसभा चुनाव के पहले हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री बनने की शुभकामना देनेवाले सरयू राय अब रघुवर दास पर कार्रवाई नहीं करने के लिए उन्हीं की सरकार को कोर्ट में खींच रहे हैं, तो कभी उनके परम प्रिय रहे निशिकांत दुबे उनके कट्टर विरोधी रघुवर दास को ईमानदारी का प्रमाण पत्र देते हुए इशारों में उन्हें शकुनि की उपमा दे रहे हैं. सच ही कहते हैं, राजनीति में न कोई स्थायी दोस्त होता है और न दुश्मन. झारखंड में बाबूलाल मरांडी और बिहार में नीतीश कुमार के उदाहरण से इसे बेहतर समझा जा सकता है.

इसे भी पढ़ें –  रांची हिंसा मामला: हाईकोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव से मांगा जवाब,18 को अगली सुनवाई

 

Related Articles

Back to top button