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निर्भया कांड :  फांसी की सजा पाये दो दोषियों की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सोमवार को

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NewDelhi :16 दिसंबर 2012 को दक्षिणी दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में 23 साल की एक मेडिकल की छात्रा के साथ छह लोगों ने चलती बस में रेप किया था. बाद में उसकी मौत हो गयी थी. इसे निर्भया गैंगरेप के नाम से देश भर में जाना गया था. यह मामला अंतरराष़्ट्रीय स्तर पर उछला था. इस जघन्य घटना में सभी चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है. बता दें कि इन चार दोषियों में से दो विनय और पवन ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी. इसी पुनर्विचार याचिका पर कोर्ट सोमवार, नौ जुलाई को फैसला सुनायेगा.

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मुख्य आरोपी ने जेल में आत्महत्या कर ली थी

इस मामले में पांच लोगों को दोषी ठहराया गया था, लेकिन मुख्य आरोपी ने जेल में आत्महत्या कर ली थी. चारों को फांसी दिये जाने का देश काफी समय से इंतजार कर रहा है, लेकिन अभी तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ है.  आपको बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2017 को चारों आरोपियों की फांसी की सजा बरकरार रखी थी. इससे पहले अदालत ने चार मई को सुनवाई खत्म कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

 पांच मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने

अपने फैसले में चारों दोषियों की फांसी की सजा  बहाल रखी थी

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सईद के नेतृत्व वाला जेयूडी लश्कर-ए-तैयबा का ही संगठन है जो 2008 मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार है.  इस हमले में 166 लोग मारे गये थे.

पांच मई 2017 को अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा था. उस समय सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि निर्भया का मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी दोषियों अक्षय, पवन, विनय और मुकेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी की फांसी की सजा बहाल रखी थी. इससे पहले निर्भया मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के बाद 2013 में सभी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी.

इसके दोषियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की, जहां मार्च 2014 में उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई और आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने भी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी.   मामला 16 दिसंबर 2012 का है जब दक्षिणी दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में 23 साल की मेडिकल की छात्रा के साथ छह लोगों ने चलती बस में रेप किया था.  दरिंदों ने लड़की के प्राइवेट पार्ट को डैमेज कर दिया था. लड़की और लड़के के साथ मारपीट कर दरिंदों ने दोनों को सड़क पर फेंक दिया था. गैंगरेप पीड़िता को बाद में अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी थी.

इस जघन्य कांड के विरेाध में पूरा देश सड़कों पर आ गया था. जमकर विरोध प्रदर्शन हुए थे. लोगों के गुस्से को देखते हुए सरकार और न्याय व्यवस्था ने भी तुरंत कार्रवाई की और आरोपियों को जल्द फांसी की सजा सुनाई गयी. इनमें से एक आरोपी की  तिहाड़ जेल में संदिग्ध हालत में मौत हो गयी थी, जबकि एक नाबालिग आरोपी अपनी सजा काटकर बाहर आ गया. बाकी चार को सुप्रीम कोर्ट ने दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है. इन्हीं चार दोषियो में से दो की पुनर्विचार याचिका दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सोमवार को आयेगा.

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