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#NirbhayaCase: डेथ वारंट पर पटियाला हाउस कोर्ट में फैसला आज, दोषियों को नोटिस का देना है जवाब

New Delhi: निर्भया के चारों दोषियों में से पवन गुप्ता की दया याचिका राष्ट्रपति ने ठुकरा दी है. अब दोषियों के पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा है.
वहीं चारों दोषियों को फांसी देने के लिए पटियाला हाउस कोर्ट ने दोषियों और उनके वकील को नोटिस जारी किया है.

निर्भया केस में नया डेथ वारंट जारी करने के संबंध में गुरुवार दोपहर दो बजे सुनवाई होनी है. वहीं सुप्रीम कोर्ट में दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की याचिका पर भी आज (5 मार्च) सुनवाई होगी.

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दिल्ली कारागार नियमावली के मुताबिक, मौत की सजा का सामना कर रहे किसी दोषी की दया याचिका खारिज होने के बाद उसे फांसी देने से पहले 14 दिन का समय दिया जाता है. सभी चारों दोषियों को एकसाथ फांसी दी जानी है.

चारों दोषियों को देना है नोटिस का जवाब

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को 25 वर्षीय पवन कुमार गुप्ता की दया याचिका खारिज कर दी है. पवन कुमार गुप्ता इस मामले के चार दोषियों में से एक है.

दिल्ली सरकार ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा को बताया कि दोषियों के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो गए हैं और अब कोई विकल्प नहीं बचा है. इसके बाद न्यायाधीश ने दोषियों को निर्देश दिया कि वे अपना जवाब कल तक दायर करें जबकि अभियोजन पक्ष के वकील ने कहा कि किसी नोटिस की जरूरत नहीं है.

वहीं, अदालत ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का हिस्सा है और दूसरे पक्ष को सुने जाने को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

चौथी बार जारी होगा डेथ वारंट

बता दें कि निर्भया के चारों दोषियों के लिए चौथी बार डेथ वारंट जारी होगा. इससे पहले तीन बार फांसी की सजा टली है. क्योंकि दोषी अपने कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर रहे थे. छह सप्ताह में तीन बार फांसी की सजा टाल दी गयी थी. उल्लेखनीय है कि मुकेश, विनय और अक्षय की दया याचिका राष्ट्रपति पहले ही खारिज कर चुके हैं.

फांसी देने की पहली तारीख 22 जनवरी तय की गई थी जिसे अदालत ने बाद में टाल दिया था. 31 जनवरी को अदालत ने फांसी अनिश्चितकाल के लिए टाल दी थी. 17 फरवरी को अदालत ने फिर से तीन मार्च सुबह छह बजे फांसी देने के लिए नया मृत्यु वारंट जारी किया.

इस बीच, दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस अर्जी पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को हस्तक्षेप करने और चारों दोषियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की जांच कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की पीठ ने कहा कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि इसे सबसे पहले एनएचआरसी के समक्ष पेश किया जाना चाहिए था.

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इस महीने फांसी की सजा होने की उम्मीद- निर्भया के पिता

इधर निर्भया के पिता ने उम्मीद जतायी कि दोषियों को इस महीने फांसी दे दी जाएगी. उन्होंने फोन पर न्यूज एजेंसी पीटीआइ से कहा, ‘उसके (पवन) पास एक विकल्प बचा है, वह है दया याचिका खारिज किये जाने को उच्चतम न्यायालय को चुनौती देना, जैसा अन्य ने किया है. देखते हैं आगे क्या होता है लेकिन हमें न्याय मिलने का भरोसा है.’

उन्होंने कहा, ‘हमें विश्वास है कि दोषियों को इस महीने फांसी दे दी जाएगी और हमें लंबे इंतजार के बाद न्याय मिलेगा.’

2012 में हुई थी घटना

गौरतलब है कि निर्भया से 16 दिसंबर, 2012 को दक्षिणी दिल्ली में एक चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म के साथ ही उस पर बर्बरता से हमला किया गया था. निर्भया की बाद में सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में मौत हो गयी थी, जहां उसे बेहतर चिकित्सा के लिए ले जाया गया था.

इस घटना में चारों दोषियों और एक किशोर सहित छह व्यक्ति आरोपी के तौर पर नामजद थे. छठे आरोपी राम सिंह ने मामले की सुनवाई शुरू होने के कुछ दिनों बाद तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी.

जबकि एक सुधार गृह में तीन साल गुजारने के बाद 2015 में किशोर को रिहा कर दिया गया था. दिल्ली की एक अदालत ने 13 सितम्बर 2013 को चारों दोषियों को मौत की सजा सुनायी थी. उसके बाद से इस मामले में कई मोड़ आये.

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