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नौ जिलों के पानी में घुल रहा जहर ! फ्लोराइड, आर्सेनिक व शीशा की मात्रा WHO के मानकों से ज्यादा

राजधानी के पानी में भी आर्सेनिक, फ्लोराइड और नाइट्रेट, हो सकता है लीवर खराब

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Ranchi: एक ओर झारखंड में पीने के पानी का स्त्रोत घटता जा रहा है. वही दूसरी ओर ताबड़तोड़ भू-गर्भ जल दोहन के कारण नौ जिलों का पानी फ्लोराइड, आर्सेनिक और शीशा की गिरफ्त में आ गया है. इन जिलों में इसकी मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों को भी पार कर गयी है.

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गढ़वा में फ्लोराइड की मात्रा 7 से 8 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गयी है. जबकि कोयलांचल में इसकी मात्रा 2 मिलीग्राम तक पाई गई है. साहेबगंज, उद्धवा और हाजीपुर (संताल परगना) में 3 से 4 मिलीग्राम पाई गई है. राजधानी रांची के पत्थलकुदुआ में भी अर्सेनिक की मात्रा 2 से 3 मिलीग्राम प्रतिलीटर पाई गई है. साहेबगंज में आर्सेनिक की मात्रा 0.05 मिलीग्राम तक है. जमशेदपुर में शीशा की मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है जो खतरे का संकेत है.

क्या है WHO का मानक

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार, पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए. जबकि आर्सेनिक की मात्रा 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए. वहीं एक लीटर पानी में नाइट्रेट की मात्रा 45 मिलीग्राम से अधिक ज्यादा नहीं होनी चाहिए. जबकि शीशा की मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. इधर राज्य सरकार ने भी माना है कि 121 टोले आर्सेनिक और 699 टोले फ्लोराइड से प्रभावित हैं. रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि राज्य के आठ जिले रांची, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गोड्डा, रामगढ़, बोकारो, लोहरदगा और सरायकेला-खरसांवा में 100 फीसदी भू-गर्भ जल का दोहन हो चुका है.

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मानकों के अनुसार, 100 से 90 फीसदी से अधिक भू-गर्भ जल के दोहन वाले क्षेत्र को क्रिटिकल माना गया है. 90 से 70 फीसदी दोहन वाले क्षेत्र को सेमी क्रिटिकल है. और 70 फीसदी कम जल दोहन वाले क्षेत्र को सुरक्षित माना गया है.

किस जिले व क्षेत्र के पानी में कितनी है फ्लोराइड की मात्रा

जिला व क्षेत्र फ्लोराइड की मात्रा

गढ़वा 7 से 8 मिलीग्राम प्रति लीटर
गिरिडीह 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर
गोड्डा 1.2 मिलीग्राम प्रति लीटर
गुमला 1.00 मिलीग्राम प्रति लीटर
रामगढ़ 1.5 से 2.00 मिलीग्राम प्रति लीटर
साहेबगंज 3 से 4 मिलीग्राम प्रति लीटर
उद्धवा 3.00 मिलीग्राम प्रति लीटर
हाजीपुर 3-4 मिलीग्राम प्रति लीटर
आर्सेनिक प्रभावित जिले व क्षेत्र
साहेबगंज 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर
रांची (पत्थलकुदुआ) 2 से 3 मिलीग्राम प्रति लीटर

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नाइट्रेट प्रभावित जिले व क्षेत्र

नेतरहाट 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक
विशुनपुर 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक
लोहरदगा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक
रांची( हरमू के आसपास का क्षेत्र) 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक
चतरा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम
गढ़वा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम
गोड्डा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम
गुमला 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम
पाकुड़ 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम
पलामू 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम
पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम
साहेबगंज 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम

फ्लोराईड का स्वास्थ्य पर असर

दांत का सड़ना, हड्डी का टेढ़ा होना, फ्लोरोसिस व अपाहिज होना (तमिलनाडु के गोंडा इलाके में फ्लोराइड का कहर ऐसा है कि वहां 25 साल के युवक के शरीर का सही विकास नहीं हो पाता).

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आर्सेनिक का असर: लीवर खराब होना, खाना नहीं पचना, स्कीन कैंसर का खतरा, थकान महसूस होना, दस्त होना.

नाइट्रेड का असर: नवजात बच्चों पर असर, ब्लूबेबी सिंड्रोम बीमारी, बच्चे का शरीर नीला पड़ना और बच्चे के शरीर में ऑक्सीजन का नहीं जाना.

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