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ऑनलाइन म्यूटेशन, लगान, निबंधन, इंटीग्रेशन ऑफ डाटा के मामले में एनआइसी ने नहीं लागू की समिति की अनुशंसा

Ranchi: भू-राजस्व विभाग आम रैयतों से जुड़ा हुआ एक बहुत ही संवेदनशील विभाग है जहां जमीन का लेखा-जोखा रखा जाता है.

झारखंड में जमीन संबंधी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जहां सरकारी भूमि से लेकर, सीएनटी लैंड व वन विभाग की भूमि के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर खरीद बिक्री कर दी गयी है.

जबकि रांची के कई अंचलों में जमीन संबंधी मूल रिकॉर्ड से छेड़छड़ करने के मामले भी सामने आ चुके हैं. अवैध रूप से जमीन की खरीद-बिक्री करने में विभाग के कार्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आ चुकी है.

दूसरी ओर ऑनलाइन म्यूटेशन, लगान, निबंधन, इंटीग्रेशन ऑफ डाटा के मामले में विभाग में कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों व रैयतों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

इसे दूर करने के लिए भू-राजस्व विभाग ने निदेशक भू-अर्जन, भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया था. जांच उपरांत समिति द्वारा समस्याओं के निराकरण के लिए अपनी अनुशंसा विभाग से की है.

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क्या है जांच समिति की अनुशंसा

  • सीओ, सीआइ, केसी के डिजिटल सिग्नेचर, आइपी ऐड्रेस, एमएससी एड्रेस की जांच जरूरी है. जमाबंदी स्वीकृति के एक मामले में एक ही तारीख में काफी कम समय के बीच सीओ, सीआइ द्वारा स्वीकृति दी गयी थी.

 

  • इसमें कर्मचारी अंचल निरीक्षक का प्रतिवेदन नहीं रहने से अंचल अधिकारी द्वारा स्वीकृत आदेश संदेह पैदा होता है जिसे विभाग को रोकना चाहिए.

 

  • दाखिल खारिज की स्वीकृति राजस्व उप निरीक्षक, अंचल निरीक्षक द्वारा अंचल अधिकारियों को फॉरवर्ड करने के बाद सीओ को लॉगइन आइडी में वापस राजस्व निरीक्षक के लॉगइन आइडी में भेजने का ऑप्शन होना चाहिए जो कि अभी नही है. इसमें सुधर किया जाना चाहिए.

 

  • म्यूटेशन करने का आवेदन किस माध्यम से प्राप्त हुआ है इस संबंध में जानकारी मिलनी नहीं दिखती. यह सुनिश्चित किया जाये कि एक जमाबंदी की दाखिल खारिज किस लॉगइन से ऑनलाइन अप्लाइ की गयी है. वहीं आवेदन रिजेक्ट होने के बाद दोबारा अप्लाई नहीं होना चाहिए. एनआइसी सॉफ्टवेयर में संशोधन की आवश्यकता है. दाखिल खारिज का निष्पादन एफआइएफओ पर आधारित होना चाहिए.

 

  • दाखिल खारिज स्वीकृत होने के पश्चात अपील में वाद को एलआरडीसी के द्वारा अपील स्वीकृति रिमांड किया जाता है जिसे अंचलाधिकारी के लॉगइन में सुनवाई हेतु ऑप्शन होना चाहिए जो कि अभी नहीं है.
  • दाखिल खारिज के आवेदन में मौजा के स्थान पर वार्ड नंबर आवेदक द्वारा कर दिया जाता है. जिसके कारण सीओ लॉगइन आइडी में यह वाद नहीं दिखता है. जबकि यह दिखना चाहिए. एनआइसी द्वारा सॉफ्टवेयर में मौजा एवं वार्ड नंबर दोनों को अलग-अलग दर्शाने की आवश्यकता है ताकि आवेदक द्वारा सही रूप से चयन किया जा सके.

 

  • ऑनलाइन म्यूटेशन इंटीग्रेशन में डिट से संबंधित डाटा एवं डीड सही रूप में प्रदर्शित होना चाहिए जो अभी नहीं होता है.

 

  • दाखिल खारिज हो जाने के उपरांत वैसे मामले जहां उदाहरण स्वरूप पिता का पति का क्रेता के बदले विक्रेता सुधार करने की आवश्यकता है वहां एडिट ऑप्शन रहना चाहिये जो अभी नही है.

 

  • पंजी में राजस्व उप निरीक्षक, अंचल निरीक्षक के माध्यम से सुधार करने पर अंचलाधिकारी के लॉगिन में पूरी प्रक्रिया दिखनी चाहिये. पंजी टू में कई मामले में सुधार कब हुआ, क्या हुआ इसका विवरण न तो सीओ के लॉगिन और ना ही अपर समाहर्ता के लॉगिन में संपूर्ण विवरण दिखाई पड़ता है इस संबंध में दोनों अधिकारियों को सुधार से संबंधित एमआइ उपलब्ध होना चाहिए .

 

  • रजिस्टर टू एवं खतियान अपडेट होने व म्यूटेशन हेतु ओटीपी प्रारंभ होने चाहिए.

 

  • जमीन की मापी को लेकर ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था नहीं है. एनआइसी द्वारा भुगतान की व्यवस्था उपलब्ध करायी जाय.

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