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एनआईए की कार्रवाई इंटरसेप्शन के बिना क्या संभव थी? जेटली ने कांग्रेस पर साधा निशाना  

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के आतंकविरोधी हालिया अभियान का जिक्र कर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस पर निशाना साधा है.

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NewDelhi : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के आतंकविरोधी हालिया अभियान का जिक्र कर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस पर निशाना साधा है. अरुण जेटली ने पूछा है कि क्या इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन के इंटरसेप्शन के बिना एनआईए द्वारा टेररिस्ट मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई संभव थी? बता दें कि एनआईए ने दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और यूपी एसटीएफ की मदद से बुधवार, 26 दिसंबर को आईएस के एक टेरर मॉड्यूल को ध्वस्त किया है. जेटली ने इसके के लिए एनआईए की तारीफ करते हुए इसका इस्तेमाल आईटी ऐक्ट के तहत गृह मंत्रालय के हालिया फैसले पर उपजे विवाद के बाद कांग्रेस पर तंज कसने के लिए किया.  बता दें कि केंद्र सरकार ने कुछ एजेंसियों को यह अधिकार दिया है कि वे इंटरसेप्शन, मॉनिटरिंग और डिक्रिप्शन के मकसद से किसी भी कंप्यूटर डेटा को खंगाल सकती हैं.

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स्वतंत्रता  मजबूत लोकतांत्रिक देश में सुरक्षित, आतंकी प्रभुत्व वाले देश में नहीं

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सईद के नेतृत्व वाला जेयूडी लश्कर-ए-तैयबा का ही संगठन है जो 2008 मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार है.  इस हमले में 166 लोग मारे गये थे.

इस पर हमलावर होते हुए कांग्रेस समेत विपक्ष ने इसे निजता पर हमला कह कर इस फैसले की आलोचना की है. इसी क्रम में वित्त मंत्री जेटली ने गुरुवार को ट्वीट कर एनआईए के छापे के बहाने कांग्रेस पर पलटवार किया. जेटली ने लिखा है कि सर्वाधिक इंटरसेप्ट यूपीए शासन में हुआ था.  जेटली ने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि है. कहा कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता केवल मजबूत लोकतांत्रिक देश में सुरक्षित रह सकती है, आतंकी प्रभुत्व वाले देश में नहीं.  बता दें कि पिछले सप्ताह गृह मंत्रालय के आदेश को लेकर विवाद हुआ था.  कांग्रेस और विपक्ष के हमले के जवाब में तब भाजपा ने कहा था कि यूपीए सरकार के दौरान औसतन हर महीने 9000 टेलिफोन कॉल्स और 500 ईमेलों की निगरानी हुई थी.  अब जेटली ने आतंक के मॉड्यूल पर एनआईए के नये खुलासे के बहाने इंटरसेप्शन को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए विपक्ष को घेरा है.

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