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NHRC ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र कहा-IAS सुनील कुमार ने नहीं जमा करायी मुआवजे की राशि, जमा कर सूचित करें

Ranchi :  हजारीबाग के बड़कागांव में एनटीपीसी के अधिकारी राकेश नंदन सहाय के मामले में एनएचआरसी ने फिर से एक बार मुख्य सचिव को चिट्ठी लिखी है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने झारखंड के मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को राकेश नंदन सहाय के मामले में 25 हजार रुपये का मुआवजा भुगतान कर आयोग को सूचित करने का निर्देश दिया है.

आयोग के सहायक निबंधक (विधि) की ओर से 14.3.2019 को फिर से आदेश पारित किया गया है. आयोग की तरफ से कहा गया है कि आयोग ने शिकायकर्ता राकेश नंदन सहाय की तरफ से 15.2.2019 को मामले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया था, जिसमें आयोग के 17 जनवरी को पारित आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने की शिकायत की गयी थी. आयोग की तरफ से कहा गया है कि 24.10.2018 को मुख्य सचिव को रीमाइंडर भेज कर मुआवजा भुगतान की स्थिति छह सप्ताह में स्पष्ट करने का आदेश दिया था.

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तत्कालीन डीसी सुनिल कुमार पर दुर्व्यवहार करने का आरोप

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2015 में हजारीबाग डीसी सुनील कुमार पर एनटीपीसी के डीजीएम रैंक के अधिकारी राकेश नंदन सहाय ना गंभीर आरोप लगाया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि डीसी सुनिल कुमार ने उन्हें कमरे में बंद कर रॉड से पीटा है. मामला कोर्ट में है. इधर राकेश नंदन सहाय ने मानवाधिकार में शिकायत कर रखी है. इस पर गृह विभाग के अपर सचिव ने आयोग से मुआवजा राशि भुगतान मामले पर पुनर्विचार करने की अधियाचना की गयी थी.

इसमें यह कहा गया था कि पुलिस की सुपरविजन रिपोर्ट (190 /2015) में कहा गया था कि हजारीबाग के तत्कालीन उपायुक्त पर दुर्व्यहार करने की जो शिकायतें आयी थीं, वह प्रमाणिक नहीं थीं. इसलिए उपायुक्त का नाम मामले से हटा दिया गया था. हजारीबाग के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के यहां दर्ज याचिका में भी उपायुक्त के खिलाफ लगे आरोप के बाबत प्राइमा फेसी के दौरान पुख्ता प्रमाण नहीं मिले थे. इसमें यह भी कहा गया था कि तत्कालीन उपायुक्त के खिलाफ एक मामला झारखंड हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है. गृह विभाग की तरफ से यह जानकारी भी दी गयी थी कि 20 फरवरी 2017 को मामला भी वापस ले लिया गया.

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अपर मुख्य सचिव एनएन पांडेय ने की थी जांच

आयोग की चिट्ठी में लिखा गया है कि राज्य के अपर मुख्य सचिव एनएन पांडेय ने भी गृह सचिव की हैसियत से मामले की जांच की थी. उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट के पारा-9 में लिखा था कि उपायुक्त स्तर के अधिकारी को व्यावहारिक होना चाहिए. उन्हें जनता की श्किायतों को तवज्जो देते हुए उनका निराकरण करना चाहिए. इससे लोगों के मन में उपायुक्त और स्थानीय प्रशासन के प्रति भरोसा होगा.

गृह सचिव की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑल इंडिया सर्विस (कंडक्ट) रूल्स 1968 में सुनील कुमार का व्यवहार सम्मानजनक नहीं था. आयोग का कहना है कि इससे यह प्रतीत होता है कि एक पब्लिक सर्वेंट की तरफ से मानवाधिकार का उल्लंघन किया गया है. आयोग ने इस परिस्थिति में पीएचआर एक्ट की धारा 18 (ए) (आइ) के तहत मुख्य सचिव से तुरंत मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया था.

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