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EXCLUSIVE : सिलिकोसिस से 5 मजदूरों की मौत मामले में मुख्य सचिव को NHRC का सम्मन, 10 जनवरी को दिल्ली बुलाया

पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड के पाउरू स्थित मेसर्स शालिग्राम सुपर सिलिका नामक कंपनी का है मामला, जिला प्रशासन की जांच में इस नाम की कोई कंपनी नहीं मिली

Rajnish Tiwari

Jamshedpur : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पोटका की एक क्वार्ट्ज कंपनी में सिलिकोसिस बीमारी के कारण पांच मजदूरों की मौत के मामले में  झारखंड के मुख्य सचिव को 10 जनवरी, 2022 को उपस्थित होने को कहा है. एनएचआरसी ने चीफ सेक्रेटरी को जारी सम्मन में कहा है कि वे 10 जनवरी, 2022 को कमीशन के समक्ष उपस्थित हों. हालांकि आयोग ने यह भी कहा है कि अगर मामले से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट और कार्रवाई का  पेशी से एक हफ्ते पहले आयोग को मिलने की स्थिति में उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मिल जायेगी. आयोग ने यह भी कहा है कि आदेशों का पालन करने में विफल रहने पर कानून की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जायेगी. आयोग ने यह कार्रवाई 20 जनवरी 2021 और 02 जुलाई 2021 को झारखंड सरकार को जारी निर्देशों का पालन नहीं होने के कारण की है.

बासुदेव आचार्या ने की है आयोग में शिकायत

आयोग में शिकायत की गयी थी कि पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड अंतर्गत पाउरू स्थित मेसर्स शालीग्राम सुपर सिलिका प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत पांच मजदूरों की मौत सिलिकोसिल बीमारी के कारण हुई. ये सभी मौतें वर्ष 2018 से 2020 के बीच हुईं. मृतकों में  सुब्रत बेरा (11 अगस्त 2018), बुद्धदेव राणा (8 फरवरी 2020), गोविंदा जाना (28 फरवरी 2020), तापस दंडपत (22 मार्च 2020) एवं मंगल मांडी (15 जुलाई 2020)  शामिल हैं. शिकायत में कहा गया कि छठे मजदूर मिलन पात्रा की स्थिति भी बेहद खराब है और कभी भी उसकी मौत हो सकती है. इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल के बासुदेव आचार्या ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी.

मरनेवाले सभी मजदूर पश्चिम बंगाल के निवासी

सभी मजदूर पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जिले के नयाग्राम, खेसियारी और सरकैल गांव के रहने वाले हैं. इनमें सिलिकोसिस से होने की पुष्टि एम्स, नई दिल्ली, पीजी हॉस्पिटल कोलकाता और नारायणा सुपर स्पेशैलिटी हॉस्पिटल, पश्चिम बंगाल ने की. इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल के बासुदेव आचार्या की शिकायत पर एनएचआरसी ने वर्ष 2020 में पश्चिम बंगाल सरकार और झारखंड सरकार को मामले की जांच का आदेश दिया था.  आयोग का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने उसके निर्देशों तथा पत्रों पर कार्रवाई की लेकिन झारखंड सरकार की ओर से आज तक मामले की जांच रिपोर्ट अथवा एक्शन टेकेन रिपोर्ट कमीशन को नहीं सौंपी गई.

कारखाना एक्ट में नहीं है कंपनी का रजिस्ट्रेशन

पश्चिम बंगाल सरकार की जांच में पता चला कि मेसर्स शालीग्राम सुपर सिलिका प्रा. लि. कंपनी का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है. इस कंपनी का कर्मचारी बीमा निगम में कोई रिकॉर्ड नहीं पाया गया. कंपनी ने इन मजदूरों को रखने में इंटर स्टेट माइग्रेंट वर्कमेन एक्ट, 1972 का भी उल्लंघन किया है. इन मजदूरों का न तो आई कार्ड बना और न ही इन्हें गेट पास उपलब्ध कराया गया. जिसके कारण मौत के बाद इनके परिवारों को मुआवजा प्राप्त करने में दिक्कत हो रही है. इधर जांच में पता चला कि कंपनी के आसपास रहने वाले कई आदिवासी भी इस कंपनी में काम करते हैं और सिलिकोसिस से पीड़ित हैं. इनमें से कई की मौत भी हो चुकी है. इस जांच रिपोर्ट पर एनएचआरसी ने झारखंड सरकार को 26 अगस्त 2020 को मामले में जांच करते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे. इस संबंध में 20 जनवरी 2021 व 02 जुलाई 2021 को रिमाइंडर भी भेजा गया. पर अबतक झारखंड सरकार की ओर से कमीशन को कोई रिपोर्ट नहीं भेजी गई. अंततः कमीशन ने झारखंड सरकार के चीफ सेक्रेटरी के खिलाफ सम्मन जारी किया है.

जिला प्रशासन की जांच में क्वार्ट्ज ग्राइंडिंग यूनिट नहीं मिली

इधर पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने 18 नवंबर 2020 को शिकायतकर्ता बासुदेव आचार्य को भेजे पत्र में कहा कि पोटका प्रखंड अंतर्गत पाउरू गांव में कोई क्वार्ट्ज ग्राइंडिंग यूनिट नहीं पायी गयी.  वर्तमान में वहां फ्लाई ऐश से संबंधित इकाई स्थापित है. अपर जिला दंडाधिकारी के हस्ताक्षर से जारी पत्र में  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के  केस नंबर तथा झारखंड के गृह, कारा तथा आपदा प्रबंधन विभाग के पत्रांक का संदर्भ देते हुए कहा गया है कि जांच में बताया कि उक्त स्थल पर पूर्व में क्वार्ट्ज ग्राइंडिंग यूनिट थी, जिसका नाम मेसर्स हिंद मिनरल्स था. वह इकाई कारखाना अधिनियम के तहत निबंधित नहीं थी.  अपर जिला दंडाधिकारी ने पत्र में कहा है कि जांच में  यह स्पष्ट नहीं हुआ कि शिकायत में जिन मजदूरों का उल्लेख है, वे इस इकाई में कार्यरत थे अथवा नहीं.

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