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NHRC ने की 53 मामलों की सुनवाई, जेल में बंद कैदियों की भी ली खबर

Ranchi : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग(NHRC) ने झारखंड न्यायिक अकादमी, रांची में खुली सुनवाई के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के 53 मामलों की सुनवाई की. आयोग की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता में आयोग की खुली सुनवाई और न्यायमूर्ति एम.एम. कुमार, डॉ. डी.एम. मुले और राजीव जैन ने की. इस दौरान गंभीर उल्लंघन के मामले जैसे बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, जादू टोना का आरोप, बिजली के झटके से मौत, चिकित्सा में लापरवाही, चिकित्सा सुविधाओं से इनकार, सजा पूरी होने के बाद कैदियों को रिहा न करना, राशन वितरण में अवैधता, सिलिकोसिस से होने वाली मौतों आदि के मामले शामिल थे.

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22 मामलों को किया क्लोज

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आयोग ने 10 मामलों में मुआवजे के भुगतान की सिफारिश की थी. उसमें से राज्य सरकार द्वारा 13.5 लाख का भुगतान किया जा चुका है. दो मामलों में मुआवजे की राशि 4 लाख और राज्य सरकार ने संबंधित लाभार्थी को दो सप्ताह के भीतर भुगतान करने का आश्वासन दिया है. दो मामलों में, आंशिक अनुपालन किया गया है और राज्य सरकार द्वारा पूर्ण अनुपालन का आश्वासन दिया गया है. लगभग, 50 लाख की अनुशंसा की गयी है, जिसमें से उपरोक्त राशि का भुगतान पहले ही किया जा चुका है और राज्य सरकार ने आयोग के निर्देशों के अनुसार अन्य आदेशों के अनुपालन का आश्वासन दिया है. आयोग ने योग्यता के आधार पर 22 मामलों को बंद कर दिया.

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झारखंड राज्य को की गई कुछ महत्वपूर्ण सिफारिशों में अन्य बातों के साथ-साथ पुलिस फायरिंग में चार व्यक्तियों की मौत से संबंधित मामले में मृतक के नॉक (परिजन) को 2.5 लाख रुपये का भुगतान मुआवजा शामिल है. बिजली के करंट से मौत के शिकार व्यक्ति को पांच लाख रुपये मुआवजा, पांच लाख रुपये मुआवजे का भुगतान 3.5 प्रत्येक को अभ्रक खदान में धंसने से मरने वाले मजदूरों के नॉक आउट, सिलिकोसिस रोगियों की पहचान और पुनर्वास के लिए नीति तैयार करना, राज्य में झोलाछाप डॉक्टरों की बढ़ती संख्या आदि के मुद्दे को संबोधित करना.

एनजीओ/एचआरडीएस ने आयोग के सामने मनरेगा कर्मियों के भुगतान में देरी, राशन उपलब्ध कराने में देरी जैसे मामले भी रखे

मामलों के निपटारे के बाद आयोग ने एनजीओ/एचआरडीएस के साथ बातचीत की. उन्होंने मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दों को उठाया. इनमें केंद्रीय हिस्सा न मिलने के कारण मनरेगा कर्मियों के भुगतान में देरी, राशन उपलब्ध कराने में देरी, लंबे समय से नि:शक्तता आयुक्त की नियुक्ति न होना, आंगनबाडी कार्यकर्ताओं की कमी के कारण स्कूल पूर्व शिक्षा का अभाव, बाल तस्करी, बाल विवाह और किशोर गर्भावस्था शामिल हैं. विकलांग प्रमाण पत्र जारी करने में देरी, स्वास्थ्य विभाग और आइसीडीएस आदि के बीच अभिसरण की कमी आदि. प्रतिनिधियों को सूचित किया गया कि वे शिकायत दर्ज करने आदि के लिए वेबसाइट hrenet.nic.in पर जा सकते हैं. आयोग ने झारखंड राज्य में गैरसरकारी संगठनों और मानवाधिकार रक्षकों द्वारा किये गये कार्यों की सराहना की और उन्हें बिना किसी डर या पक्षपात के अपने वास्तविक कर्तव्य को करने के लिए प्रोत्साहित किया.

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