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#NewsWingImpact: BSL ने 42 प्राइवेट स्वास्थ्य संस्थानों को बंद करने का दिया आदेश

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Bokaro: बायो मेडिकल वेस्ट का गलत ढंग से डिस्पोज करने के मामले में स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी के संज्ञान में आने के बाद बोकारो इस्पात प्रबंधन ने बड़ी कार्रवाई की है.

बीएसएल ने अपने टाउनशिप में संचालित 42 प्राइवेट हॉस्पिटल, नर्सिंग होम, डेंटल क्लीनिक, पैथ लैब और डायग्नोस्टिक सेंटर्स को 15 दिनों के अंदर बंद करने का नोटिस जारी किया है.

खुले कूड़े में फेंकी गयी दवाई की बोतल. एक तरफ तो ये दवाईयां बीमारियों को ठीक करने का काम करती हैं लेकिन वहीं दूसरी तरफ इस तरह के बोतलों को खूले में फेंक देने से इसका लोगों की स्वास्थ्य पर असर पड़ता है.

न्यूज विंग ने इस खबर को एक सीरीज के तहत दो किस्तों में खबर चलायी. जिसके बाद इस मामले में कार्रवाई करते हुए 42 संस्थानों को बंद करने का आदेश दिया गया है.

इस कार्रवाई को अंजाम देने के पहले बीएसएल के लैंड एलॉटमेंट डिपार्टमेंट की टीम ने सर्वे कर 42 ऐसे संस्थानों की पहचान की जो बिना उसके परमिशन के बोकारो स्टील टाउनशिप में संचालित हैं.

सेक्टर 3 और 6 को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर सर्वे हो चुका है. करीब 60 ऐसे संस्थान चिन्हित किये गये हैं. इनमें से 42 संस्थानों को डाक के जरिये नोटिस भेजा जा चुका है.

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15 दिनों के अंदर बंद करने का नोटिस

BSL प्रबंधन ने 2015 में और 2018 में ऐसे कई मेडिकल संस्थानों को बंद करने का नोटिस भेजा था. इसमें कुछ संस्थान बंद भी हुए थे. पर पिछले दो सालों में बीएसएल के अनुसार बाकी बची संस्थानों के अलावा कई नये संस्थान भी खुल गये है.

लापरवाही का आलम यह है कि दवाईयों की बोतलें ही नहीं इंजेक्शन के सीरींज भी खुले में फेंक दिया जाता है जो कि इंफेक्शन फैला सकता है.

बीएसएल के एक उच्च अधिकारी के अनुसार 15 दिन के बाद इन चिन्हित संस्थानों का सबसे पहले बिजली काटा जायेगा और फिर भी अगर ये बंद नहीं हुए तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जायेगी.

बीएसएल के अनुसार यह संस्थाएं उसकी जमीन पर पर बिना अनुमति के ‘अनधिकृत रूप से’ चल रही हैं. बोकारो स्टील सिटी में चल रहे निजी अस्पताल, डेंटल क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब, डायग्नोस्टिक सेंटर और नर्सिंग होम कंपनी नियमों के तहत “प्रतिबंधित व्यापार” की श्रेणी में आते हैं.

इस तरह के व्यापार को बीएसएल के अनुमति के बिना नहीं चलाया जा सकता. संचार विभाग के प्रमुख बीएसएल मणिकांत धन ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.

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आम कूड़े के साथ फेंका जा रहा बायो मेडिकल वेस्ट

मेडिकल संस्थानों से रोज बहुत सारा कचड़ा निकलता है. जिसे बहुत बार ऐसे ही सड़क किनारे फेंक दिया जाता है. कई बार कूड़ा उठाने वाले इसे प्लास्टिक बैग में बंद कर ले जाते हैं.

कुछ दिनों पूर्व हुए स्वास्थ्य विभाग और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) के इंस्पेक्शन मे यह बात सामने आयी है कि प्राइवेट अस्पताल और पैथ लैब जैसी संस्थाएं बायो मेडिकल वेस्ट के सही तरीके से डिस्पोजल में कोताही बरत रही है.

स्वास्थ्य और प्रदूषण विभाग की टीम ने अलग-अलग किये गये इंस्पेक्शन के दौरान बायो मेडिकल वेस्ट को आम कूड़े में फेंका हुआ पाया है जो काफी चिंताजनक है. इस मामले के उजागर होने के बाद बीएसएल अपनी टाउनशिप में संचालित वैसे सभी प्राइवेट संस्थानों के खिलाफ ऐसा कठोर कदम उठाया है.

जेएसपीसीबी की टीम ने तो नया मोड़ में खुले में फेंके गये कचरे के साथ बायो मेडिकल वेस्ट पढ़ा हुआ पाया था. इस बीच स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) के पास एक कबाड़ीवाले को बायो मेडिकल वेस्ट की खरीद और बिक्री का काम करते हुए पाया. जिसके बाद स्वास्थ्य टीम ने निजी अस्पतालों, पैथलैब्स, बीजीएच को इसके लिए लापरवाह माना.

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स्वास्थ्य संस्थान चलाने के लिए लेना होगा परमिशन

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) के पास एक कबाड़ीवाले को बायो मेडिकल वेस्ट की खरीद और बिक्री का काम करते हुए पाया.

परेशान बीएसएल प्रबंधन ने टाउनशिप क्षेत्र में बिना अनुमति के संचालित निजी अस्पतालों, पैथलैब्स और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को बंद कराने का फैसला लिया है. ऐसी संस्थाओं को संचालन के लिए अब से बीएसएल के टाउन एडमिनिस्ट्रेशन विभाग से परमिशन लेना पड़ेगा. बीएसएल ने चार सदस्यीय कमेटी तैयार की है जो अब इस मामले को देख कर संस्थानों को परमिशन देगी.

बीएसएल का मानना है की वैसे गैरपरवाह संस्थान जो अपने बायो मेडिकल वेस्ट को आम कूड़े में फेंक देते हैं उनकी लापरवाही की वजह से उसको फजीहत झेलनी पड़ती है. जेएसपीसीबी और स्वास्थ्य विभाग का सामना करना पड़ता है.

कूड़े के ढेर में फेंका गया मेडिकल वेस्ट. जबकि मेडिकल वेस्ट को आम कूड़ों के साथ नहीं फेंका जाता है क्योंकि इससे कई तरह की बिमारियों के फैलने का डर रहता है.

बीएसएल अधिकारी के अनुसार, टाउनशिप में ऐसे 60 से भी ऊपर नर्सिंग होम, निजी अस्पताल, डेंटल क्लीनिक, पैथोलॉजिकल लैब और डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित हैं, जिन्होंने बीएसएल कंपनी के नियमों और जमीन के व्यापार संबंधी नियमों का उल्लंघन किया है.

इसलिए ऐसे संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि नोटिस के 15 दिनों के भीतर अनधिकृत कारोबार को रोकें या कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें. एक अधिकारी के अनुसार बोकारो टाउनशिप में केवल चार ऐसे स्वास्थ्य संस्थान हैं जो बीएसएल से एनओसी प्राप्त कर संचालित हैं.

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