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Newswing Probe-04: पीवीयूएनएल को जब बंद करने का फैसला लिया गया, तब फायदे में थी कंपनी

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NEWS WING
Ranchi, 28 November:
पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) की 10 यूनिटों में से पांच यूनिटें पहले से बंद थीं. 10 दिसंबर 2016 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में चालू पांच यूनिटों को भी बंद कर दिया गया. बताया गया कि यूनिटों को चलाने में नुकसान है और कंपनी के पास वर्किंग कैपिटल नहीं है. newswing.com की पड़ताल में यह बात सामने आयी है कि पीवीयूएनएल कंपनी ने जो बताया वह बात कंपनी की ऑडिटेड बैलेंस सीट से मेल नहीं खाती है. बैलेंस सीट से पता चलता है कि पांच चालू यूनिटों को जब बंद करने का फैसला लिया गया, उस वक्त कंपनी फायदे में थी. इस कंपनी को वित्तिय वर्ष 2015-16 में 67 हजार रुपया का फायदा हुआ था. जबकि वित्तिय वर्ष 2016-17 में कंपनी को 6.75 लाख रुपया का फायदा हुआ. वह भी तब जब इस दौरान कुछ यूनिटों के रिवाइवल का काम चल रहा था. नवंबर 2016 में यूनिट 04 और 06 को रिवाइवल कर लिया गया था. इस स्थिति में अगर कंपनी को चलाया जाता तो आने वाले वक्त में कंपनी को और ज्यादा लाभ होता. क्योंकि वर्ष 2016 में सिर्फ तीन यूनिट से ही बिजली उत्पादन हो रहा था. नवंबर 2016 के बाद पांच यूनिटों से बिजली का उत्पादन होता. इस तथ्य पर विचार किए बिना सरकार और एनटीपीसी के अधिकारियों ने सभी यूनिट को बंद कर उसके मशीनरी को स्क्रैप में बेचने का फैसला ले लिया.
03 मई 2015 को एग्रीमेंट के समय पीटीपीएस की आर्थित स्थिति यह थी 
मद                    राशि(करोड़ में )
फिक्स्ड एसेट

प्लांट एवं मशीन          482.04
प्लांट सिविल एवं स्ट्रक्चरल    245.89
भूमि  (1859 एकड़)              1260.4 
                      ———————
           कुल              1988.33 
4 करेंट एसेट                   137.59
5 प्लांट परिसर के अन्दर स्क्रैप     3.32
         कुल योग           2129.24 
देनदारियां                     359.5
कुल वैल्यू                      1769.74

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ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 में कंपनी की स्थिति

एसेट
नन करेंट एसेट-13190.25 लाख
कुल करेंट एसेट-34377.68 लाख
कुल एसेट-47567.93 लाख
इक्विटी एवं लैबलिटी
इक्विटी-4664.74 लाख
लैबलिटी-3669.56 लाख
करेंट लैबलिटी-39233.63

वर्ष 2015-16 व 2016-17 में कंपनी को फायदा
31 मार्च 2016-0.67 लाख
31 मार्च 2017-6.75 लाख

संपत्ति के आकलन में भी गड़बड़ी
पीटीपीएस को जेवीयूएनएल कंपनी को स्थानांतरित करने के लिए मूलतः प्रस्ताव 1859 एकड़ भूमि का था. जिसका मूल्य 1260.4 करोड़ रूपये का था. लेकिन बाद में 625 एकड़ भूमि,जिसका मूल्य गणना के आधार पर लगभग 433.85 करोड़ होता है, को फेज-दो के समय देने की बात कही गयी. इस कारण भूमि का मूल्य कम हो गया.  एग्रीमेंट के मुताबिक झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) कंपनी को 360 करोड़ रुपया ज्वाइंट वेंचर कंपनी (जो बाद में जेवीयूएनएल बना) को देने थे. और देनदारियों के भुगतान के लिए राशि उपलब्ध भी करानी थी. यह सम्पत्ति 1769.74 करोड़ रुपया बताया गया, जिसमें देनदारियां 359.5 करोड़ थी. जबकि असल में सम्पत्ति कुल 2129.24 करोड़ की थी. चुकी 625 एकड़ भूमि फेज-दो में देने का फैसला ले लिया गया, इसलिए ज्वाइंट वेंचर कंपनी को 1335.89 करोड़ की ही सम्पत्ति स्थानांतरित हुई. 

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