न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

Newswing Probe-03: वर्किंग कैपिटल के आभाव में PVUNL ने यूनिट संख्या-04, 06, 07, 09 व 10 को बंद कर दिया

19

NEWS WING
Ranchi, 24 November: पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) कंपनी, जिसमें एनटीपीसी कंपनी की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है, कि दिलचस्पी पीटीपीटीएस की यूनिटों को चलाने में नहीं थी. यही कारण है कि दिसंबर 2016 में पीवीयूएनल कंपनी ने यूनिट संख्या-04, 06, 07, 09 व 10 को बंद कर दिया.  जबकि दिसंबर 2016 में ये पांचों यूनिट बिजली उत्पादन के लिए तैयार थी. पीवीयूएनएल (जिसके प्रमुख पदधारी एनटीपीसी के लोग हैं) ने वर्किंग कैपिटल के अभाव में इन यूनिटों को बंद करने का प्रस्ताव दिया. जिसे मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्वीकृति दे दी गयी. यहां उल्लेखनीय है कि पीवीयूएनएल कंपनी को चालू प्लांटों को रिवाइवल/रिस्टोरेशन करने के लिए पहले साल के अंत में कुल लागत का 40 प्रतिशत खर्च करना था. दिसंबर में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई जिस बैठक में यूनिट संख्या-04 समेत सभी चालू यूनिटों को बंद करने का फैसला लिया गया, उसमें इस बात का जिक्र नहीं है कि पीवीयूएनएल ने 40 प्रतिशत राशि खर्च की है या नहीं.

इसे भी पढ़ेंः newswing probe-01: PTPS को Joint Venture में NTPC को देने का फैसला जिस कमेटी ने लिया, उसमें NTPC के अफसर भी थे सदस्य

यूनिटों को बंद करने के लिए पीवीयूएनएल ने जो कारण बतायें

10 दिसंबर 2016 को मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में राज्य सरकार के वरिष्ठ अफसरों, एनटीपीसी के अफसरों और पीवीयूएनल के पदाधिकारियों की बैठक हुई. इस बैठक में पीवीयूएनएल की तरफ से एनटीपीसी के अफसरों ने बताया कि नवंबर 2016 में एनटीपीसी की यूनिट संख्या-04 का रिवाइवल हो चुका था. ट्रायल भी कर लिया गया था. यूनिट संख्या-06 भी तैयार होकर सिंक्रोनाइज होने वाला था. यूनिट संख्या-10 की क्षमता बढ़ाने के लिए और यूनिट संख्या-07 और 09 को पर्यावरण के मानक पूरा करने के लिए अधिक निवेश की जरुरत थी. कंपनी ने यह भी बताया कि इन पांचों यूनिटों को चलाने के लिए एनुअल फीक्स्ड चार्ज (एएफसी) को बढ़ा देता, जिसका असर कैपिटल कॉस्ट पर पड़ता. जो अगले चार साल के डिप्रिशिएशन में क्लीयर होता. उल्लेखनीय है कि पीवीयूएनएल कंपनी में एनटीपीसी की हिस्सेदारी 74 प्रतिशत है और राज्य राज्य सरकार की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत है. इस स्थिति में अगर इन पांचों यूनिटों को चालू रखना पड़ता तो कुल एनुअल फीक्स्ड चार्ज का 74 प्रतिशत एनटीपीसी को वहन करना पड़ता और राज्य सरकार को मात्र 26 प्रतिशत. बताया जाता है कि यही कारण है कि एनटीपीसी ने पांचो यूनिटो को बंद करने का फैसला लिया गया, ताकि उसे ज्यादा राशि का निवेश न करना पड़े. यूनिटों को बंद करने के लिए एक तर्क यह भी दिया गया कि बिजली उत्पादन की दर अधिक बताकर झारखंड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने बकाया बिल का आंशिक भुगतान किया है. इस तरह झारखंड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने 100 करोड़ रुपया का भुगतान पीवीयूएनएल को नहीं किया है. उपलब्ध दस्तावेज के मुताबिक पीवीयूएनएल के इस प्रस्ताव को सरकार ने बिना जांचे-परखे स्वीकार कर लिया. यह पता लगाने की कोशिश नहीं की गयी कि इससे सरकार को फायदा होगा या नुकसान. सिर्फ मुख्यमंत्री की तरफ से यह शर्त रखा गया कि बंद होने वाली यूनिटों से जितनी बिजली (अधिकतम 325 मेगावाट) सरकार को मिलती थी, उतनी बिजली एनटीपीसी चार रुपये के दर से उपलब्ध कराये. जिसे एनटीपीसी के अधिकारियों ने स्वीकार कर लिया.

इसे भी पढ़ेंः Newswing probe-02: पहले शर्त थी तीन यूनिट चालू रख कर उत्पादन खर्च पर 325 मेगावाट बिजली मिलेगी, बाद में सभी यूनिट बंद कर व चार रुपये की दर से बिजली खरीदने का फैसला

एनटीपीसी ने जमीन मांगा, मुख्य सचिव ने फ्लैट देने का ऑफर किया

10 दिसंबर 2016 को हुई बैठक में एक दिलचस्प घटनाक्रम यह भी रहा कि एनटीपीसी के सीएमडी ने झारखंड सरकार से रांची में कॉलोनी बनाने के लिए 25-30 एकड़ जमीन की मांग की. जिस पर मुख्य राजबाला वर्मा ने सुझाव दे दिया कि खेलगांव में सरकार के फ्लैट्स हैं. उसे देख लें. अगर वह ठीक लगता है कि प्रस्ताव दें. सरकार खेल गांव के फ्लैट्स एनटीपीसी को दे सकती है. 

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

 

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: