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Newswing Impact: गेल इंडिया मामले में डीडीसी ने लिखा डीएओ को पत्र, कहा-नहीं किया गया मुआवजे का उचित आकलन, तय करें समुचित दर

डीडीसी ने कहा, एक सप्ताह में मुआवजे की राशि तय कर सूचित करें, विभागीय निर्देश का करें पालन

Ranchi: गेल इंडिया की ओर से सिमडेगा के पतिअम्बा गांव में बिछाए जा रहे पाइपलाइन के दौरान नियमों व निर्देशों की अवहेलना मामले में डीडीसी ने संज्ञान लिया है। डीडीसी ने जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) के नाम पत्र जारी किया है. गुरूवार को जारी पत्र में कहा गया है कि विभागीय निर्देश जारी होने के बाद भी जिला कृषि पदाधिकारी की ओर से मुआवजे की राशि का आकलन नहीं किया गया। स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि सप्ताह के दौरान मुआवजा राशि का आकलन का सूचित करें। ताकि लाभुकों को समुचित मुआवजा दिलवाया जा सके।

डीएओ की लापरवाही

गेल इंडिया की ओर से पाइपलाइन बिछाने के मामले में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जुलाई में निर्देश जारी किया गया था। जिसके तहत मनरेगा योजना के तहत पेड़ों और जमीन की राशि में 12 प्रतिशत ब्याज के साथ अतिरिक्त भुगतान लाभुक को देने की बात कही गई थी। इस मामले में लाभुक आलोक कुमार ने विभिन्न पटलों पर शिकायत की थी. जिसके बाद डीडीसी ने जिला कृषि पदाधिकारी को लाभुकों को उचित मुआवजा दिलाने का निर्देश दिया था। जिला कृषि पदाधिकारी ने लाभुकों का मंतव्य नहीं लेते हुए बगैर फिजिकल वेरिफिकेशन के मुआवजे की राशि तय कर दी थी. न्यूज विंग ने मामले को प्रमुखता से उठाया था। जिसके बाद एसडीओ ने भी पिछले दिनों किसानों से बात की थी और गेल इंडिया के अधिकारियों को फटकार लगायी थी.

गेल इंडिया से नहीं की जा सकी है मुआवजे की मांग

अपने पत्र में डीडीसी ने लिखा है कि विभागीय निर्देश के अनुसार मुआवजे की तय नहीं करने के साथ ही गेल इंडिया से भी समुचित मुआवजे की मांग नहीं की गई। मालूम हो कि शिकायतकर्ता आलोक कुमार की 55.43 डिसमिल जमीन पर गेल इंडिया पाइपलाइन बिछा रही है. अक्टूबर में बीडीओ की ओर से बनाई रिपोर्ट के मुताबिक यहां मनरेगा के तहत लगभग सौ पेड़ लगे हैं. जिसमें से 39 अब तक उखाड़े गये हैं. भविष्य में और पेड़ उखाड़ने की संभावना है. ऐसे में आलोक समेत अन्य किसान मुआवजा की मांग कर रहे है. सिमडेगा के पतिअम्बा गांव के लगभग 37 किसान इस समस्या को झेल रहे है.

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क्या है मामला

मई 2019 से गेल इंडिया की ओर से पतिअम्बा गांव में गैस पाइपलाइन बिछायी जा रही है. किसानों का आरोप है कि गेल इंडिया फलदार पेड़ों को उखाड़ कर पाइपलाइन बिछा रही है। उचित मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है. इसके लिये किसानों ने कई अलग स्तर पर शिकायत की. लेकिन इनकी शिकायत नहीं सुनी गयी. वहीं ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जुलाई में किसानों को 12 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज के साथ मुआवजा देने की मांग की गयी. लेकिन जिला कृषि पदाधिकारी की ओर से बगैर ब्याज दर तय किये मुआवजा की राशि तय कर दी गयी. जो एक लाख पंद्रह हजार चार सौ 80 रूपये है. जबकि बीडीओ ने अपनी रिपोर्ट में मुआवजा राशि लगभग 15 लाख बताया था. किसानों का आरोप है कि गेल इंडिया की ओर से न ही किसानों को इसकी पूर्व सूचना दी गयी और न ही पंचनामा दिया गया.

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