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News wing Impact : सहकारिता बैंक डाटा सेंटर घोटाले की जांच शुरू

Ranchi : सहकारिता बैंक में डाटा सेंटर के नाम पर 10 करोड़ के घोटाले को लेकर विभाग ने जांच करने का निर्देश दिया है. सहकारिता बैंक मुख्यालय इस पूरे घोटाले की जांच करेगा. डाटा सेंटर की जरूरत नहीं होने के बावजूद भी डाटा सेंटर खोलने के लिए करोड़ों रुपए भुगतान किया गया है. जिसे लेकर लिखित शिकायत दी गयी थी. जिसके जांच के लिए राज्य सहयोग समिति के उप निबंधक जय प्रकाश शर्मा ने आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश बैंक को दिया है.

 

बैंक के सहायक महाप्रबंधनक हेमंत पांडेय ने बताया कि इस डाटा सेंटर घोटाले की जांच शुरू कर दी गई है. संबंध में लोगों से पूछताछ की जाएगी. मामले में जो भी लोग दोषि होंगे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

 

इस पूरे घोटाले को लेकर सभी लोगों की सूची बनायी जा रही है. खासकर उन लोगों की जो इस डाटा सेंटर से जुड़े हुए हैं. आपको बता दें कि न्यूज विंग ने इस घोटाले की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था. जिसके बाद इस पर पहले राज्य सहयोग समिति और फिर बैंक की ओर से कार्रवाई शुरू की गई है.

 

2 करोड़ रिश्वत लेकर 10 करोड़ का भुगतान

2 करोड़ रुपए रिश्वत लेकर सहकारिता बैंक में डाटा सेंटर खोलने के लिए एक निजी कंपनी को करीब 10 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया गया. बैंक महाप्रबंधक ने दबाव डालकर निदेशक से आदेश जारी करवाया गया था. जिसके बाद एक सॉफ्टवेयर कंपनी को पैसा जारी किया गया था. बाद में उसे रद्द भी कर दिया गया था

आपको बता दें कि दर्जनों ऐेसे बैंक हैं जो अपना डाटा सेंटर दूसरे बड़े बैंको में भाड़े के रूप में रखते हैं. अपने खाताधारियों की संख्या के हिसाब से भाड़ा देते हैं. यह भी उल्लेखनीय है कि सहकारिता बैंक में अन्य बड़े बैंकों की तुलना खाताधारियों की संख्या काफी कम है. न्यूजविंग के पास अपने ही आदेश को निरस्त कर भुगतान करने संबंधी सारे कागजात उपलब्ध हैं.

 

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कई बार होती रही है जांच

सिंहभूम सेंट्रल को-आपरेटिव बैंक के पूर्व निदेशक बिजय कुमार सिंह सह सहकारिता अध्ययन मंडल के प्रदेश अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि बिना जरूरत के डाटा सेंटर खोलने के नाम पर दो करोड़ रिश्वत लेकर अब तक दस करोड़ से अधिक का बोगस भुगतान कर दिया गया. डाटा सेंटर के नाम पर 2017-18 में एक पूर्व रजिस्ट्रार सह प्रशासक ने एक करोड़ कमीशन लेकर पांच करोड़ का भुगतान एक सॉफ्वेयर कंपनी को दे दिया था. उन्होंने आरोप लगाते हुए आगे बताया कि 2019 में तत्कालीन सीईओ ब्रजेश्वर नाथ ने 20 लाख रिश्वत लेकर एक करोड़ का भुगतान उसी कंपनी को कर दिया. इस तरह के भुगतान को लेकर कई बार जांच होती रही, अधिकारी बदलते रहें. लेकिन इसी बीच फिर से भुगतान किया जाता रहा.

 

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