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News Wing Impact: कसमार के सिंहपुर कॉलेज में नहीं मिला विधायक मद से बना भवन

बोकारो डीसी के आदेश पर जांच के दौरान खुलासा

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Bokaro/Ranchi: बोकारो जिले में भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा है कसमार प्रखंड का सिंहपुर कॉलेज. न्यूजविंग ने पहले ही इस भ्रष्टाचार का खुलासा किया था. न्यूज विंग ने 2 अक्टूबर को इस कॉलेज में व्याप्त भ्रष्टाचार को प्रमुखता से उठाया था. खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन की नींद टूटी और डीसी ने मामले की जांच के आदेश दिए.

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जांच में ये बात सामने आयी कि सिंहपुर महाविद्यालय सिंहपुर परिसर में विधायक मद से 20 बाई 30 फीट के कमरे बने ही नहीं. और इसके एवज में राशि की निकासी कर ली गई. मामले को लेकर उपायुक्त के निर्देश पर शनिवार को कार्यपालक दंडाधिकारी मनीषा वत्स जांच के लिए पंहुची. जांच के क्रम में श्रीमती वत्स ने कॉलेज परिसर में बने एक-एक कमरों की मापी करायी तो, उन्हें कोई भी दो कमरा विधायक मद के प्राक्कलन के अनुसार नहीं पाया.

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भवन बना ही नहीं कॉलेज दिखा शिलान्यास पट्ट

हालांकि, इस संबंध में अभिकर्ता प्रफुल महतो ने एक शिलान्यास पट्ट दिखाते हुए बताया कि विधायक ने खुद भवन निर्माण का शिलान्यास किया. इधर शिलान्यास पट्ट में विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव द्वारा विधायक मद के 2 कमरे सहित 6 कमरों का शिलान्यास किया जाना अंकित है. लेकिन जांच के क्रम में उक्त कॉलेज में ऐसा कोई भवन नहीं मिला जो विधायक मद योजना के प्राक्कलन के अनुसार हो.

बता दें कि यहां वर्ष 2015 में तत्कालीन विधायक योगेंद्र प्रसाद ने अपने विधायक मद से 20*30 फीट के दो कमरों के भवन निर्माण कराने की अनुशंसा की थी. लेकिन संबंधित अभिकर्ता ने विधायक मद के प्राक्कलन के अनुसार कोई भवन बनाया ही नहीं और राशि की निकासी कर ली है. मामले का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता अमरेश कुमार महतो द्वारा मांगी गई एक जानकारी में हुआ. जिसमें उक्त भवन निर्माण कराये जाने संबंधी कागजातों की मांग कार्य एजेंसी से की थी. इधर मामले के संज्ञान में आते ही पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद ने उपायुक्त से जांच की मांग की थी.

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क्या है मामला

आरटीआई से प्राप्त सूचना के अनुसार, तत्कालीन गोमिया विधायक योगेंद्र प्रसाद के विधायक मद से वर्ष 2016 में उक्त महाविद्यालय परिसर में 20*30 फीट के दो कमरों का निर्माण कराने की योजना थी. जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति उप विकास आयुक्त बोकारो ने दी है. साथ ही कार्यकारी एजेंसी की जिम्मेवारी कसमार प्रखंड विकास पदाधिकारी को दी थी. कार्यकारी एजेंसी ने पंचायत सचिव प्रफुल्ल को भवन निर्माण के लिए अभिकर्ता के रूप में नामित किया था. लेकिन अभिकर्ता द्वारा भवन बनाया ही नहीं गया और पूरे पैसे की निकासी कर ली गयी.

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