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NEWS WING IMPACT:  न्यूज विंग में खबरें छपने के बाद कंबल घोटाले में होने लगी कार्रवाई, विकास आयुक्त अमित खरे ने की सीएम से एसीबी जांच की अनुशंसा 

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Akshay Kumar Jha

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Ranchi: न्यूज विंग की खबर का असर एक बार फिर हुआ है. न्यूज विंग ने लगातार चार किश्तों में झारखंड राज्य में हुए 18 करोड़ के कंबल घोटाले का पर्दाफाश किया था. उन सारी बातों को न्यूज विंग ने जनता के सामने लाने का काम किया था, जो घोटाला करने के दौरान झारक्राफ्ट ने किया था. मामले की गंभीरता और एजी की आपत्ति के बाद विकास आयुक्त अमित खरे ने एंटी कर्शन ब्यूरो (एसीबी) से जांच की अनुशंसा सीएम रघुवर दास से की है. इससे पहले भी विकास आयुक्त ने एक समिति बना कर पूरे मामले की जांच करने के लिए उद्योग विभाग से कहा था.

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बताते चलें कि ठंड के दौरान सरकार की तरफ से गरीबों को दिए जानेवाले कंबल को इस बार झारखंड की ही महिलाओं से बनाने का ऐलान सीएम रघुवर दास ने किया था. इस काम में सखी मंडलों और बुनकर समितियों को लगाना था. एजी ने ऑडिट के दौरान ये पाया कि कंबल सखी मंडल से ना बनवा कर बाजार से खरीदे गए हैं. बाजार से कंबल खरीदने के लिए कोई टेंडर नहीं किया गया था. इसके अलावा और भी कई तरह की अनियमितता एजी ने ऑडिट के दौरान पायी थी.        

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रांची प्रमंडल के आयुक्त को जांच का जिम्मा देने पर उठ रहे हैं सवाल

सरकार

लातेहार जिला के पोखरीतला से सलाउद्दीन अंसारी, इमामुद्दीन हक, नईमुद्दीन अंसारी और मो. मुस्ताख ने मुख्य सचिव से कंबल निर्माण को लेकर शिकायत की थी. इनका कहना था कि लातेहार में जिन्हें कंबल बनाने का जिम्मा दिया गया है, उनके पास उस स्तर का कंबल बनाने वाला लूम (करघा) नहीं है. ऐसे में मामला लातेहार जिले से शुरू होता है. यह पलामू प्रमंडल में पड़ता है. विकास आयुक्त अमित खरे के इस मामले के उद्योग विभाग को जांच के लिए लिखने के बाद, विभाग ने खुद जांच ना करते हुए जांच का जिम्मा रांची प्रमंडल के आयुक्त डीसी मिश्रा की अध्यक्षता वाली समिति को दे दिया है. जबकि मामला पलामू प्रमंडल का था.

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जिले स्तर पर डीसी करते जांच, तो सच सामने आता

झारक्राफ्ट ये दावा कर रहा है कि 163 सखी मंडलों और बुनकर समितियों को कंबल बनाने का जिम्मा दिया गया था. सभी सखी मंडल और बुनकर समिति अलग-अलग जिले में हैं. अगर जांच जिला स्तर पर डीसी की अध्यक्षता में करायी जाती तो सच ज्यादा बेहतर तरीके से सामने आ सकता था. ऐसे में रांची प्रमंडल के आयुक्त को जांच करने का जिम्मा देने के मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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निदेशक उद्योग ने की खुद के कार्यकाल की जांच

जब कंबल बनाने का काम झारक्राफ्ट को मिला, उस वक्त झारक्राफ्ट के निदेशक के पद पर रवि कुमार थे. बाद में उनका तबादला निदेशक उद्योग के पद पर हो गया. लातेहार से शिकायत मिलने के बाद विकास आयुक्त अमित खरे ने उद्योग विभाग से जांच करने को कहा. विभाग ने जांच का जिम्मा निदेशक उद्योग को दिया, जो रवि कुमार थे,  उन्होंने ही मामले की जांच की और गड़बड़ी पायी. जबकि जब गड़बड़ हुई थी,  तो उस वक्त यही रवि कुमार झारक्राफ्ट के निदेशक थे. ऐसे में एक आईएएस अधिकारी ने अपने ही कार्यकाल में हुई गड़बड़ी की जांच खुद की  और जांच में गड़बड़ी पायी. 

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