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श्रीनगर में  16 अगस्त को पुलिस और सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष होने की खबर

Srinagar : अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार 16 अगस्त को श्रीनगर में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों और पुलिस में भिड़ंत हुई, इसके जवाब में पुलिस आंसू गैस के गोले छोड़े और पेलेट गन चलायी. एएफपी के अनुसार  जम्मू कश्मीर में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच यह संघर्ष तब हुआ जब कई हजार लोग श्रीनगर की सड़कों पर रैली निकाल रहे थे. यह रैली श्रीनगर के सौरा इलाके में निकाली गयी जहां पर पांच अगस्त के केंद्र सरकार के फैसले के बाद से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. हालांकि, इस संघर्ष में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है. प्रदर्शनकारी सड़कों पर रैली निकाल रहे थे, काले झंडे लिए हुए दुख जता रहे थे और तख्तियों पर भारत वापस जाओ के नारे लिखे हुए थे.

जान लें कि कि पांच  अगस्त को जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 की अधिकतर धाराएं हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों में विभाजित करने के केंद्र सरकार के कदम के बाद सुरक्षा के मद्देनजर जारी बंद 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है. खबरों के अनुसार पुलिस ने मेन रोड की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने का प्रयास किया. जब पुलिस ने उन दर्जनों राउंड गोलीबारी की तो प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंके और उनसे बचने के लिए होर्डिंग्स, टिन आदि का इस्तेमाल किया.

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हजारों पुरुष और महिलाएं एक प्रसिद्ध मस्जिद के अंदर जमा हो गये

इस क्रम में जब हजारों पुरुष और महिलाएं एक प्रसिद्ध मस्जिद के अंदर जमा हो गये तो एक ड्रोन लगातार इलाके पर नजर रख रहा था. एक प्रदर्शनकारी ने एएफपी को बताया कि हम घेरे को तोड़ते हुए शहर में घुसने की कोशिश कर रहे थे , लेकिन पुलिस  हमें रोकने के लिए बल का इस्तेमाल कर रही है. पुलिस अधिकारियों के साथ प्रदर्शन में गुरुवार को तीन लोग घायल हो  गये थे. इसके साथ ही पिछले दो हफ्ते से पूरी तरह से बंद का सामना कर रहे घाटी के कई अन्य इलाकों से छिटपुट संघर्ष की खबरें आ रही हैं. वहां संचार के माध्यम भी पूरी तरह से बंद हैं.

कर्फ्यू का सामना कर रहे घाटी के अधिकतर शहर और कस्बों में सुरक्षा बल केवल विशेष पास के माध्यम से ही लोगों को आने-जाने की इजाजत दे रहे हैं. सरकारी बलों ने सड़कों को अवरुद्ध करने के लिए खड़ी बैरिकेड्स और कॉन्सर्टिना तारों का इस्तेमाल किया है. घाटी में किसी भी बड़ी सभा की अनुमति नहीं थी और अधिकतर मस्जिदें हर दूसरे शुक्रवार को बंद रहती थीं.

हम किसी चीज के लिए भीख नहीं मांग रहे हैं

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, जो हमारा है, हम वह चाहते हैं. हम किसी चीज के लिए भीख नहीं मांग रहे हैं, बल्कि भारत से अपना वादा पूरा करने की मांग कर रहे हैं. हम तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक भारत से पूरी तरह से आजादी नहीं हासिल कर लेंगे.  बता दें कि, इससे पहले रॉयटर्स, बीबीसी, द वाशिंगटन पोस्ट और अल जजीरा जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी 9 अगस्त की अपनी रिपोर्ट में बताया था कि श्रीनगर के सौरा इलाके में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे.

हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने समाचार एजेंसियों के उस दावे को खारिज कर दिया था और कहा था कि कश्मीर घाटी में प्रदर्शन की छिटपुट घटनाएं हुई थीं और किसी में भी 20 से अधिक लोग शामिल नहीं थे. हालांकि, 13 अगस्त को गृह मंत्रालय ने स्वीकार किया कि 9 अगस्त को श्रीनगर के बाहर शरारती तत्वों’ ने व्यापक पैमाने पर अशांति पैदा करने के लिए सुरक्षा बलों पर अकारण पथराव किया लेकिन प्रदर्शनकारियों पर गोलियां नहीं चलायी गयी.

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