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न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सैटेलाईट इमेज जारी कर किया दावा, बालाकोट का मदरसा बिल्डिंग अब भी सही सलामत

NW Desk : 14 फरवरी को  पुलवामा हमले ने देश को झकझोर दिया था. सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गये और कई जवान बुरी तरह से घायल हो गये. इस हमले के बाद देश नफरत और बदले की आग में जल रहा था. इस हमले के बाद कई सवाल उठे. पुलवामा हमले का आरोप जैश-ए-मोहम्मद पर लगा. भारत सरकार की ओर से 26 फरवरी को हमले का बदला लिया गया. भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जमकर बमबारी की. वायुसेना की ओर से करीब 12 मिराज 2000 विमानों से बालाकोट सहित आतंकियों के 13 ठिकानों पर 1 हजार किलो बम गिराए. इस हमले के बाद कहा गया कि 200-300 आतंकियों को मार गिया गया.

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लेकिन बालाकोट हमले पर अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट छापी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, रॉयटर्स ने भारत सरकार के द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के कैंपों पर किये गये हमले पर संदेह जताया है. रॉयटर्स ने बालाकोट में किये गये हवाई हमलों के बाद कुछ ऐसी जानकारी सामने लायी है, जिससे भारत में एयर स्ट्राईक को लेकर विवाद हो सकता है. साथ ही इसका असर देश की राजनीति पर भी पड़ने के आसार हैं. रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में जैश के कैंप की कुछ हाई रेसोलुशन सैटेलाइट तस्‍वीरें शेयर की हैं. उन तस्वीरों में पाकिस्तान के उत्तरपूर्वी हिस्से में जैश-ए-मोहम्मद की ओर से चलाया जाने वाला मदरसा अब भी साफतौर पर देखा जा सकता है. जिसने काफी सवालों को जन्म दे दिया है. दूसरी ओर एयर स्ट्राईक के बाद भारतीय वायुसेना की ओर से कहा गया था कि देश के युद्धक विमानों ने पाकिस्तान में मौजूद इस्लामिक समूह के सभी ट्रेनिंग कैंपों को निशाना बनाया था.

 

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प्राइवेट सैटेलाइट ऑपरेटर प्लैनेट लैब्स ने जारी कीं तस्वीरें

साथ ही रॉयटर्स के रिपोर्ट में कहा है कि सैन फ्रांसिस्को के एक प्राइवेट सैटेलाइट ऑपरेटर प्लैनेट लैब्स नाम की कंपनी की ओर से बालाकोट की तस्वीरें जारी की गयी हैं. यह कंपनी सैटेलाइट की मदद से पृथ्वी की तस्वीरों को लेने का काम करती है. बालाकोट की मदरसा की तस्वीरें 4 मार्च को ली गयी थीं. तस्वीरों में साफतौर पर बालाकोट में स्थित मदरसा की इमारत को खड़ी देखा जा सकता है. गौर करने वाली यहां यह है कि भारतीय वायुसेना के एयर स्ट्राइक के छह दिन बाद भी मदरसा की इमारत बिल्कुल सही सलामत है. हालांकि हमले के बाद अब तक जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों की कोई भी हाई रेसोलुशन सैटेलाइट तस्‍वीर सार्वजनिक नहीं हुई थी. प्राइवेट सैटेलाइट ऑपरेटर प्लैनेट लैब्स की ओर से यह दावा भी किया गया है कि वे सैटेलाइट की मदद से किसी भी छोटी सी भी चीज को साफ-साफ देख सकते हैं.

फोटो क्रेडिट – सैटेलाइट इमेज – गूगल

 

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अप्रैल 2018 में ली गई तस्वीरें भी ऐसी ही थीं

रिपोर्ट में यह बात भी स्पष्ट कहा गया है कि 4 मार्च को जो तस्वीरें ली गई हैं ,वो अप्रैल 2018 में ली गई तस्वीरों से बिल्कुल भी अलग नहीं है.मदरसा की इमारतों में छतों पर ना तो कोई छेद है और ना ही दीवारों के झुलसने की ही कोई तस्वीर है. इसके अलावा मदरसा के आसपास ना ही कोई टूटे हुए पेड़ ही मौजूद हैं , जो हवाई हमलों के संकेत दे सकें. रॉयटर्स के मुताबिक, उन्होंने भारत के विदेश और रक्षा मंत्रालय को कुछ ईमेल भेजे हैं और कई सवाल भी पूछे हैं. लेकिन अब तक कोई जबाव नहीं दिया गया है.

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