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दुष्कर्म, हत्या में राज्य में रोज बन रहे नये रिकॉर्ड: गंगोत्री कुजूर

Ranchi : चान्हो (रांची) में नाबालिग के साथ हुए दुष्कर्म मामले में प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक गंगोत्री कुजूर ने हेमंत सरकार को घेरा. मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हेमंत सोरेन के 2 वर्ष के कार्यकाल में महिलाओं के दुष्कर्म, उत्पीड़न और हत्या मामले में राज्य में रोज नया रिकॉर्ड बन रहा है. चान्हो में एक नाबालिग आदिवासी नाबालिग बच्ची के साथ हुई घटना शर्मनाक है. 3 दिन से आरोपियों द्वारा नाबालिग की रेकी की गयी और उक्त घटना को अंजाम दिया गया. पर पुलिस विभाग के खुफिया तंत्र को इसका पता तक नहीं चल पाया.

अहले सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग पर नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म की घटना को अंजाम देना और जान मारने की नीयत से लोहरदगा ले जाना राज्य सरकार की पुलिसिया तंत्र की पोल खोलती है. कॉन्फ्रेंस में भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष आरती कुजूर भी उपस्थित थीं.

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महिला उत्पीड़न की 3152 घटना

गंगोत्री कुजूर ने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार बनने से लेकर अक्टूबर 2021 तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार 3152 बलात्कार की घटना घटी है जो अपने आप में चौंकाने वाला आंकड़ा है.

दारोगा रूपा तिर्की हत्याकांड, कांग्रेसी विधायक द्वारा महिला के प्रति अभद्र टिप्पणी, रामगढ़ में पदस्थापित एसडीपीओ द्वारा अपनी पत्नी को प्रताड़ित करना, लातेहार में महिला स्वास्थ्य कर्मी का उनके सरकारी आवास से अपहरण कर रामगढ़ में बंदी बनाना और 2 लाख देने के बाद अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटना, सिमडेगा में मॉब लिंचिंग के शिकार संजू प्रधान की गर्भवती पत्नी को पुलिस के सामने मारकर कोख उजाड़ना, सिमडेगा में झरियो देवी को डायन बिसाही के नाम पर आग में डाल देना जैसी घटनाएं भयावह है. राज्य की बेटियों में भय का माहौल उत्पन्न हुआ है.

हेमंत सोरेन के राज में राज्य के किसी भी कोने में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. बात-बात में ट्विटर पर ट्वीट करनेवाले मुख्यमंत्री या सत्ता में बैठे हुए लोगों ने चान्हो और अन्य घटनाओं को लेकर किसी प्रकार की सहानुभूति तक नहीं दिखायी.

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जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का किया गया उलंघनः आरती

आरती कुजूर ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली की निंदा की. कहा कि नाबालिग बच्ची को 11 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक थाने में बैठा कर रखना जेजे एक्ट का उलंघन है. उन्होंने पुलिस-प्रशासन से सवाल पूछा कि क्या थाना चाइल्ड फ्रेंन्ड्ली था? क्या थाना में चाइल्ड फ्रेंडली पुलिस थी? क्या उसके साथ एनजीओ के लोग थे? क्या महिला काउंसलर थी? क्या बाल कल्याण समिति को सूचित किया गया था? इन सभी नियमों का उल्लंघन किया गया.

जेजे एक्ट में बच्ची से वहीं पूछताछ की जाती है जहां बच्ची अपने आप को सहज़ महसूस करे लेकिन थाने में 7 से 8 घंटा बैठाना और उसके बाद रात में मेडिकल के लिए ले जाना दोषपूर्ण है.

इस तरह की घटनाएं को महिला आयोग और बल संरक्षण आयोग अपने संज्ञान में लेती है लेकिन राज्य सरकार ने न ही बाल संरक्षण आयोग का गठन किया है और न ही महिला आयोग का. कुजूर ने कहा कि निश्चित समय सीमा के अंदर फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से दुष्कर्मियों को फांसी की सजा हो.

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