JharkhandMain SliderRanchi

बिना नक्शा के 7 लाख मकानों को वैध करने के लिए बनेगी नई नीति, प्रस्ताव तैयार

Ranchi: झारखंड के 40 शहरों में लगभग सात लाख बिना नक्शा के मकानों को वैध करने के लिए सरकार नई नीति लाने की तैयारी कर रही है. नगर विकास विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है. इसके प्रावधान तय करने के लिए आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में हाईपावर कमेटी गठित करने की योजना है. हाईपावर कमेटी इससे जुड़े सभी पहलुओं के अध्ययन के बाद नये सिरे से अवैध मकानों को नियमित करने के नियम तय करेगी.

सरकार की प्रस्तावित नीति में काफी रियायत देकर अधिक से अधिक लोगों को फायदा पहुंचाने की तैयारी की जा रही है. इसका फायदा प्रदेश के लगभग 40 शहरों में बिना नक्शा पास कराये मकान बनानेवाले या नक्शे का उल्लंघन कर मकान बना चुके लोगों को होगा.

2009 2010 में रांची नगर निगम की ओर से अवैध मकानों को वैध करने के लिए जो नियम बनाये गये, वे इतने कठोर थे कि लोग आगे नहीं आये. इसके बाद 2019 के सितबंर में लाये गये प्रावधानों का भी यही हाल हुआ.

इसे भी पढ़ें –सरकारी आदेश को निजी स्कूलों ने दिखाया ठेंगा, मनमाने तरीके से वसूली जा रही हर तरह की फीस

सितंबर 2019 और 2009 में लायी गयी थी नीति

हाईपावर कमेटी अवैध मकानों के ज्यादा से ज्यादा कारणों की पड़ताल करेगी. इस आधार पर इन्हें नियमित करने के उपाय सुझायेगी. सितंबर 2019 में लायी गयी नीति में खामी के कारण लोगों ने अपने अवैध मकानों को नियमित कराने में रुचि नहीं दिखाई.

26 मार्च तक इसके लिए आवेदन करने की समय सीमा थी. उस समय तक काफी कम आवेदन आये. इसी बीच कोरोना काल आने के बाद तीन महीने की समय सीमा और बढ़ायी गयी. बढ़ी समय सीमा भी 26 जून को समाप्त हो गयी. इसके बावजूद प्रदेशभर से मात्र तीन सौ के आसपास आवेदन आये. इसी कारण नगर निकायों का खस्ताहाल प्रबंधन नक्शा पास करने की प्रणाली मजबूत नहीं कर सका.

तीन मंजिला मकानों और पांच हजार वर्गफुट के मकानों को नियमित करने का था प्रावधान

इससे पहले कि बनी नीतियों में तीन मंजिला मकानों और पांच हजार वर्गफुट तक के मकानों को नियमित करने का प्रावधान किया गया था. इसके लिए काफी शर्तें भी रखी गयी थीं. अधिकतर मकान उन शर्तों को पूरा नहीं करते हैं या शर्तों को पूरा करने के लिए मकान के ढांचे में काफी बदलाव की जरूरत है.

इस कारण ये लोग अपने मकान के नियमितिकरण की प्रक्रिया में रुचि नहीं दिखा रहे हैं. इसके अलावा इसका शुल्क भी अधिक रखा गया है.

इसे भी पढ़ें –डीके पांडेय जैसे व्यक्ति को जब सत्ता का संरक्षण मिल जाता है, तो वह कुछ भी करने से नहीं हिचकता

किसे कहते हैं अवैध मकान

वैसे मकान जिसके निर्माण से पहले उसका नक्शा नहीं पास कराया गया है. या वैसे मकान जिसका नक्शा पास कराने के बावजूद उसके नियमों का पालन नहीं किया गया है. झारखंड सरकार के पास अभी तक इसका सटीक आंकड़ा नहीं है कि आखिर प्रदेश में अवैध मकानों की कितनी तादाद है.

लगातार बढ़ रही अवैध कॉलोनियों की स्थिति भी गंभीर है. एक अनुमान के मुताबिक, झारखंड के शहरों के लगभग सात लाख अवैध मकानों में से दो लाख के आस-पास अकेले रांची में हैं. 30 साल से इन इलाकों में नगर निकाय चुनाव भी नहीं हुआ है.

इसे भी पढ़ें – चीनी ऐप्स बैन के बाद लोग पेटीएम, बिग बास्केट, जोमैटो पर बैन की कर रहे मांग

Telegram
Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button
Close