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2000 और 500 रुपए के नये नोट दो साल में ही हो रहे हैं बेकार !

नोटों में इस्‍तेमाल कागज की गुणवत्‍ता के चलते यह समस्‍या आयी है. कहा जा रहा है कि अगर ऐसा हुआ तो फिर से नये नोट छापने का भारी खर्च सरकार के माथे पर पड़ेगा.

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NewDelhi : नोटबंदी के बाद जारी 2000 और 500 रुपए के नये नोट दो साल में ही बेकार हो रहे हैं.  सूत्रों के अनुसार इन्‍हें एटीएम में भी नहीं डाला जा सकता. साथ ही दस रुपए के नये नोटों पर भी ऐसा ही खतरा मंडरा रहा है. अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार नोटों में इस्‍तेमाल कागज की गुणवत्‍ता के चलते यह समस्‍या आयी है. कहा जा रहा है कि अगर ऐसा हुआ तो फिर से नये नोट छापने का भारी खर्च सरकार के माथे पर पड़ेगा. हालांकि, सरकार का इस संबंध में कहना है कि गुणवत्‍ता से कोई समझौता नहीं किया गया है.  रिपोर्ट के अनुसार परेशानी इतनी बड़ी है कि 2,000 रुपये और 500 रुपये के नये नोटों के अलावा, 2018 में जारी 10 नोट भी इस्तेमाल करने लायक नहीं रहे हैं.  रिपोर्ट के अनुसार बैंकों ने कई नोटों को जारी नहीं करने वाले नोटों की कैटेगरी में डाल दिया है. अमर उजाला ने वित्त मंत्रालय की बैंकिंग डिवीजन के अधिकारी का हवाला भी दिया है.

नकली नोट रोकने के लिए नये नोटों में कड़ी सुरक्षा के फीचर्स

उसके अनुसार सरकार ने नोटों की गुणवत्ता के साथ किसी भी तरह के समझौते से इनकार करते हुए कहा है कि नकली नोट रोकने के लिए नये नोटों में कड़ी सुरक्षा के फीचर्स दिये गये हैं.  नये नोट्स इसलिए खराब हो रहे हैं क्योंकि भारत में लोग नोटों को साड़ी या धोती से बांधते हैं. बता दें कि बैंक गैर-जारी करने योग्य कैटेगरी के तहत नोट्स को तब डालते हैं जब नोट एटीएम में इस्तेमाल करने लायक या जनता को दिये जाने लायक नहीं रह जाते हैं. बैंक इस कैटेगरी में गंदे, गंदे या खराब हुए नोट्स को डालते हैं.  इसके बाद ऐसे नोट  चलन से बाहर करने के लिए आरबीआई को भेज दिया जाता है. 

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