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नई शिक्षा नीति: राज्यपाल ने की कुलपतियों से चर्चा, गवर्नर ने कहा- मातृभाषा का भी रखा गया ध्यान

Ranchi. सात सितंबर को राष्ट्रपति द्वारा विभिन्न राज्यों के राज्यपाल के साथ नई शिक्षा नीति पर चर्चा की जायेगी. ये चर्चा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होगी. नयी शिक्षा नीति-उच्च शिक्षा में परिवर्तन विषय पर राष्ट्रपति से चर्चा से पहले राज्यपाल द्रौपदी मूर्मू ने राज्य के सभी विश्वविद्यालय के वीसी और प्रोवीसी से उनकी राय ली.

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इस दौरान राज्यपाल द्रौपदी मूर्मू ने कहा कि नयी शिक्षा नीति सभी वर्गों, नारी शिक्षा पर बल देने के साथ समावेषी शिक्षा की ओर ध्यान दिया गया है. मातृभाषा का ध्यान रखा गया है. इसके साथ डिजिटल एजुकेशन पर भी बल दिया गया है. हमारे विद्यार्थी इस प्रतिस्पर्धा के युग में विश्व में अपना अहम स्थान कैसे बनायें, इसका प्रयास किया गया है. इस दौरान विभिन्न विवि के कुलपति और प्रतिकुलपति ने भी अपने-अपने विचार रखे.

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मैकाले के प्रभाव से मुक्त है नयी शिक्षा नीति

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रांची विवि के वीसी ने कहा कि यह शिक्षा नीति 21वीं सदी की प्रथम नीति है जो शिक्षा के क्षेत्र में हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है. यह मैकाले के प्रभाव से मुक्त शिक्षा नीति है. जिसके लिए ग्राम पंचायत तक के सुझाव लिया गया है. इस नीति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति सहित सभी वर्गों की शिक्षा पर ध्यान दिया गया है. इसमें नये रिसर्च करने पर बल दिया गया है. यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को समृद्ध करने में भी सहायक होगा. ऐसी शिक्षा नीति झारखंड की कला-संस्कृति को समृद्ध करेगा.

विनोबा भावे विवि के कुलपति ने कहा कि वर्तमान में हमारी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और अन्य विकसित देशों जैसी नहीं है. अनुसंधान कार्य उत्तम नहीं हैं. ऐसे में यह शिक्षा नीति अहम हो सकता हैं, बशर्ते हमारे उच्च शिक्षण संस्थानों को सकारात्मक कदम उठाने होंगे.

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विनोद बिहारी महतो कोयलाचंल विवि के कुलपति ने कहा कि नयी शिक्षा नीति भारत की मिट्टी से जुड़ा है. नयी शिक्षा नीति में महाविद्यालय की ऑटोनोमी पर ध्यान दिया गया है. विश्वविद्यालय को भी तीन श्रेणी में विभक्त किया गया है. आइआइटी और आइआइएम जैसे शिक्षण संस्थान और खुलेंगे. शिक्षा नीति में मिशन नालंदा और मिशन तक्षशीला की बात कही गयी है.

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कुलपति ने कहा कि यह शिक्षा नीति पारंपरिक भारत में शोध पर आधारित है. हमारा देश विविधताओं का प्रदेश है. यहां भौगोलिक, भाषायी, रीति-रिवाज में भिन्नता है. इसके अंतर्गत मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करना सराहनीय है. व्यवसायिक शिक्षा पर भी बल दिया गया है. इस नयी शिक्षा नीति के माध्यम से अनुसंधान के द्वारा लोकल से ग्लोबल और लोकल के वोकल पर भी जोर दिया गया है.

कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि इस शिक्षा नीति के अंतर्गत यूजीसी और एआइसीटीइ को एकीकृत किया गया है. कौशल विकास पर ध्यान दिया गया है. इसमें सभी कलाओं जैसे होटल मैनेजमेंट से लेकर ब्यूटी पार्लर तक का भी ध्यान रखा गया है. चार वर्षीय डिग्री के मध्य बच्चे यदि किसी कारणवश बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं तो उन्हें उनकी अवधि के मुताबिक कोई न कोई डिग्री अवश्य मिलेगी ताकि वे रोजगार हासिल कर सकें.

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नीलांबर-पीतांबर विवि के कुलपति द्वारा कहा गया कि इस शिक्षा नीति में प्राचीन और नवीन शिक्षा पर जोर दिया गया है. नये शिक्षण संस्थान खुलेंगे. ये शिक्षा नीति हमारे राज्य के लिए वरदान होंगे जहां विद्यार्थी मातृभाषा में शोध कर सकेंगे. इस शिक्षा नीति के माध्यम से सभी भारतीय भाषाओं के उत्थान पर बल दिया गया है.

सिद्धो कान्हू मूर्मू विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि यह शिक्षा नीति समय है. इसमें उच्च शिक्षा में परिवर्तन और गुणात्मक बनाने की बात कही गयी है. इसके अंतर्गत सीखने वाले की इच्छा को ध्यान रखा गया है. व्यवसायिक व वाणिज्यिक शिक्षा और बहुआयामी बनेगा. इसके माध्यम से अन्वेषणात्मक विचार एवं शोध को विकसित करने पर बल दिया गया है. सीखने वाले की इच्छा के अनुसार पढ़ाई के अतिरिक्त अन्य गतिविधियों यथा- खेलकूद, कला-संस्कृति आदि की बात कही गयी है.

झारखंड राज्य तकनीकी विवि के कुलपति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य अच्छे इंसान बनाना है. जिसके पास नेक सोच हो, सामाजिक, सैद्धांतिक एवं नैतिक मूल्य हो. छात्र-शिक्षक के मध्य संवादहीनता को दूर करना होगा. शिक्षक समाज का निर्माण करता है. वे बच्चों को अच्छी शिक्षा दें तथा समर्पित भाव से पढ़ायें.

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