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पशुपालकों की आमदनी बढ़ायेंगे इस नयी नस्ल के सूअर

Ranchi: झारखंड के किसानों व पशु पालकों के लिए खुशखबरी है. वे अब संताल परगना की नयी देसी नस्ल के सूअर का पालन कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) ने सूअर की एक नयी देसी नस्ल की खोज की है, जिसे ‘पूर्णिया’ नाम दिया गया है.

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पहली बार झारखंड से किसी नये सूअर की नस्ल का पंजीकरण राष्ट्रीय पशु अनुवांशिकी संस्थान से हुआ है. बीएयू के वैज्ञानिकों ने इसकी खोज कर बताया है कि यह नस्ल दूसरे नस्लों से काफी बेहतर है. इसमें रोग से लड़ने की क्षमता भी अधिक पायी गयी है. इसकी वजह से कम समय में काफी बढ़ भी जाता है.

बीएयू के पशु चिकित्सक सह वैज्ञानिक डॉ रवींद्र कुमार बताते हैं कि इसे संताल में मुख्य रूप से पाया जाता है. लेकिन इसकी नस्ल संताल के अलावा बिहार के कटिहार, सहरसा, पूर्णिया, बालम, बसौना आदि जगहों पर पायी जाती है.

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आइसीएआर में हुआ पंजीकरण

उन्होंने बताया कि इस नस्ल को राष्ट्रीय पशु अनुवांशिकी संस्थान (आइसीएआर) ब्यूरो करनाल हरियाणा में पंजीकृत करा लिया गया है. इस नस्ल के बाद देश में सूअर की कुल दस देसी प्रजातियां पंजीकृत हो चुकी हैं.
उन्होंने बताया कि इस नस्ल के सूअर झारखंड के किसानों के लिए काफी फायदेमंद भी होगा. इस नस्ल के सूअर के पालन में उन्हें दूसरे सुअरों के मुकाबले 30 प्रतिशत तक कम खर्च आयेगा. प्राकृतिक रूप से इस नस्ल के सूअरों में रोग से लड़ने की क्षमता अधिक है जिस कारण यह वरदान साबित होगा.

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सूअर पालन बढ़ रहा है झारखंड में

राज्य में सूअरर पालन को लेकर पशु पालकों में विशेष रुचि देखने को मिल रही है. पिछले पांच वर्षों में सूअर पालन में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है. इसमें लोगों को कम समय में काफी अधिक आमदनी हो जाती है. साथ ही पशुपालन विभाग की ओर से गांवों में सुकर पालन को लेकर लगातार लोगों को जागरूक व प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इस नयी नस्ल को आम लोग अब जल्द ही प्राप्त कर सकेंगे.

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