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बच्चों में बार-बार होनेवाले पेट दर्द को कभी नजरअंदाज न करें

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Dr. S. Kumar

बच्चों में बार-बार होनेवाले पेट दर्द को कभी नजरअंदाज न करें
डॉ एस. कुमार

Ranchi : बच्चों में पेट दर्द बहुत ही common problem है. यदि यह लंबी या असहाय या दिनोंदिन इसकी severity and frequency बढ़ रही हो, तो इसे कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे बच्चे को बार-बार सिर्फ कृमि की दवा दी जाती है या OFLOX/NORFLOX + METRONIDAZOLE/ TINIDAZOLE/ORNIDAZOLE की दवा दी जाती है, जो सरासर गलत है. कई अभिभावक तो यह सोचकर बैठ जाते हैं कि शिशु बड़ा होगा, तो पेट दर्द ठीक हो जायेगा. ऐसा उचित नहीं है, क्योंकि धीरे-धीरे पेट दर्द बहुत ही गंभीर बीमारी में तब्दील हो सकता है या बच्चे के विकास में बाधक हो सकता है. अतः recurrent chronic (बार-बार एवं लंबे समय से) पेट दर्द का कारण जानने के लिए कुछ जांच जरूर करवा लेनी चाहिए. अगर बच्चों में पेट दर्द के साथ निम्नलिखित लक्षण दिखें, तो उनकी जांच कराना जरूरी समझें-

  1. पेट दर्द असहाय हो और दिनचर्या में बाधक हो, जैसे- स्कूल छूटना, नींद में पेट दर्द से उठ जाना, पेट पकड़कर बैठ जाना या छटपटाना, खेलते वक्त भी पेट दर्द होना.
  2. पेट दर्द के साथ बार-बार उल्टी-दस्त हो- दस्त हरा या काला हो, तो यह Parenteral Diarrhoea हो सकती है. यानी पेट में Infection की बजाय पेशाब या कहीं और Infection हो सकता है. ऐसी स्थिति में UTI (पेशाब के इन्फेक्शन) की जांच Urine R/M & C/S S द्वारा अवश्य करके उचित इलाज करना चाहिए. ऐसे बच्चों में बार-बार UTI होने से बार-बार Parenteral Diarrhoea होती है और अमूमन 4‐5 दिनों तक Antibiotic देकर ठीक कर दि‍या जाता है. कभी-कभी कुछ दि‍नों में फिर से UTI हो जाता है और साथ में दस्त शुरू हो जाता है. अतः Urine R/M & C/SS करके UTI diagnosis अवश्य करनी चाहिए, ताकि 710 दिनों तक उपयुक्त antibiotic से जड़ से UTI का इलाज हो सके और बार-बार यह नौबत नहीं आये. बार-बार UTI होता है, तो लड़के में Phimosis (पेशाब का रास्ता नहीं खुलता) या Long Prepuce (लिंग की लंबी चमड़ी) जरूर देखनी चाहिए, ताकि इनके इलाज के बाद UTI एवं दस्त से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सके. बार-बार (Recurrent) UTI के अन्य कारण हैं VUR (VesicoUreteric Reflex, जिसमें पेशाब ureter में ऊपर जाता है), Bladder (पेशाब की थैली) Outlet obstruction or Ureterocele or Ectopic Ureter or Double Ureter etc. इनकी Mcug &RCUG करके diagnosis अवश्य करवा लेनी चाहिए, ताकि जड़ से बीमारी एवं पेट दर्द को ठीक किया जा सके. कब्ज, Bubble Bath या Familial भी UTI करवाते हैं.
  3. यदि पेशाब दुर्गंधित, बार-बार जाना, तुरंत एवं जल्दी-जल्दी होना, पेशाब करते वक्त जलन होना, जोर से लगना अथवा बच्चा पेशाब रोक नहीं पाता है, तो UTI के लिए जांच अवश्यक करवायें, ताकि इसका इलाज हो सके.
  4. शारीरिक विकास नहीं हो रहा हो, अत्यधिक कब्ज या बार-बार पतली टट्टी, जो तैलीय हो सकती है, दुर्गंधित टट्टी, शिशु का विकास 12 वर्ष के बाद ठीक से नहीं होना, पेट में दर्द, रंग पीला पड़ते जाना (Anaemia) आदि लक्षण हो, तो Celiac disease की जांच अवश्य करवा लेनी चाहिए, ताकि निदान हमेशा के लिए हो सके. अमूमन मैं प्रत्येक 15 दिन में एक Celiac disease diagnose करता हूं.
  5. 5. कभी कब्ज, कभी दस्त पेट दर्द के साथ हो, तो Irritable Bowel syndrome हो सकता है. PreProbiotics एवं कुछ और दवाइयों से इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है.
  6. पेट दर्द के वक्त कुछ अटपटा व्यवहार या बेहोश हो जाना Abdominal Epilepsy (पेट की मिर्गी) हो सकती है, जो EEG से Confirm करके Epilepsy की दवा से ठीक किया जा सकता है.
  7. पेट दर्द के साथ-साथ शरीर पर काले दाने या धब्बे निकल जाते हैं, तो Porphyria हो सकती है. इसमें पेट दर्द काफी ज्यादा एवं अटपटा व्यवहार भी हो सकता है. धूप, infection, Stress इत्यादि में इसका अटैक हो सकता है. Attack के समय पेशाब में Porphobilinogen की मात्रा बढ़ जाती है और हवा में पेशाब 1/21 घंटे रखने पर रंग बदल जाता है. बहुत सारी दर्द की दवाइयां इस बीमारी में Contraindicated होती है. इन चीजों से परहेज करना ही इसका इलाज है. अतः इसकी diagnosis बहुत जरूरी है. कुछ नयी दवाइयों से अब इसका इलाज संभव हो गया है.
  8. पेट दर्द के वक्त पसीना चलना या असहज महसूस करना और साथ में दस्त हो, तो Vipoma, Gastrinoma, Carcinoid syndrome इत्यादि हो सकती है. उपयुक्त जांच एवं निदान होना चाहिए.
  9. पेट दर्द के साथ सांसें ज्यादा चलना एवं बेहोश हो जाना या बेहोश जैसा हो, तो Diabetic Ketoacidosis हो सकती है, जो High Blood sugar के साथ Acidosis confirm करके diagnose किया जाता है. Insulin drip द्वारा इसका इलाज संभव है.
  1. पेट दर्द, उल्टी और Jaundice हो, तो Infective Hepatitis अवश्य पता लगाना चाहिए और उपयुक्त इलाज तभी संभव है.
  2. पेट दर्द के साथ बुखार आता हो, तो Typhoid, Malaria, UTI इत्यादि की जांच करवानी चाहिए.
  3. पेट में काफी दर्द, उल्टी हो, तो Appendicitis, Pancreatitis, Gall Bladder (पित्त की थैली) या Kidney में Stone (पथरी) हो सकता है. Ultrasound द्वारा diagnosis हो जाता है और इलाज भी उसके बाद आसान है.
  4. Sickle Cell Disease में भी काफी पेट दर्द होता है. यदि Anemia भी मिले, तो इसकी जांच अवश्य करवा लेनी चाहिए, ताकि उचित इलाज हो सके.
  5. Vaculitis जैसे HSP (Henoch scholein Purpura) में काफी पेट दर्द एवं शरीर में लाल धब्बे (Purpuric rashes) खासकर पैरो में निकल जाते हैं. Steroid द्वारा इलाज आसान है.
  6. Hyperuricemia : अभी हाल ही में एक 10 वर्ष की लड़की में High Uric Acid ठीक करके भयावह पेट दर्द मैंने ठीक किया है. पहले लाखों रुपये की जांच के बाद भी कोई भी कारण नहीं मिल सका सिवाय High Uric Acid के. अतः Uric Acid की दवा से 23 दिनों में बिल्कुल ठीक हो गयी. यह संभवतः दुनिया में पहली ऐसी Reported घटना है. बिना Uric Acid Kidney Stone के पेट में दर्द एक आश्चर्यचकित करनेवाली बात है और शोध का विषय है.
  7. Familial Mediterranean Fever or Periodic Peritonitis: समय-समय पर कुछ परिवारों में कई लोगों को पेट में काफी दर्द एवं बुखार होता है. खासकर भूमध्यसागर के पास ज्यादातर यह बीमारी पायी जाती है. Colchicine द्वारा इसका अचूक इलाज होता है.
  8. Lead Toxicity: मिट्टी, चूना, चॉकलेट अत्यधिक खाने से Lead Toxicity हो सकती है. Anaemia एवं Lead की मात्रा बढ़ जाती है. Chelating Agent द्वारा शरीर से Lead निकाला जाता है और Anaemia का इलाज किया जाता है.
  9. पेट में कृमि से पेट में दर्द होता है, किंतु यह भयावह नहीं होता. टट्टी या उल्टी में कृमि कभी-कभार देखा जा सकता है. इसकी दवा से इलाज बहुत आसान है. Pin worm से टट्टी के रास्ते में खुजली होती है, न कि पेट में दर्द. कृमि के Infestation से भूख ज्यादा लगती है, न कि भूख मर जाती है. यह आम बात है.
  10. पेट की TB अब काफी कम मिलती है. बिना कारण के भी पेट दर्द हो सकता है.
  11. Growing Pain : 710 वर्ष की लड़कियों में पैरों में, पेट में दर्द, सिर में दर्द हो सकता है और साधारण दर्द की दवा से ठीक हो जाता है.
  12. Psychological Pain : पारिवारिक कलह, स्कूल में डांट इत्यादि की वजह से छोटे बच्चों में School जाते वक्त पेट में दर्द एवं उल्टी होती है, जिसे counselling से ठीक किया जा सकता है. मेधावी छात्र-छात्राएं पढ़ाई के Stress की वजह से भी ऐसी शिकायत करते हैं, जो Counselling & support से ठीक हो जाता है.

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बच्चों में पेट दर्द होने पर ये जांचें आवश्यकतानुसार करवानी चाहिए

  1. CSC, ESR
  2. Na, K, Ca, SGPT, RBS, URIC ACID, CR.
  3. Ur c/S
  4. ULTROSOUND & XRAY & CT SCAN
  5. BLOOD LEAD
  6. IgA & ANTI TTGIGA
  7. EEG
  8. URINE FOR PROPHOBILINOGEN
  9. AUTOIMMUNE ANTIBODIES
  10. TYPHOID & MALARIA
  11. TB
  12. SICKLING Test & HPLC etc etc.

[नोट : लेखक शिशु रोग विशेषज्ञ, MBBS, MD, MRCPCH (London) हैं.]

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