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नेस्ले ने SC में मान लिया कि मैगी में खतरनाक सीसा, जज का कंपनी से सवाल, क्यों खायें?  

SC में सुनवाई के क्रम में मशहूर एफएमसीजी कंपनी नेस्ले ने अपने प्रॉडक्ट मैगी में सीसा(लेड) होने की बात मानी है.  बता दें कि गुरुवार को SC में एनसीडीआरसी द्वारा दर्ज मामले में सुनवाई चल रही थी.

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NewDelhi :  SC में सुनवाई के क्रम में मशहूर एफएमसीजी कंपनी नेस्ले ने अपने प्रॉडक्ट मैगी में सीसा(लेड) होने की बात मानी है.  बता दें कि गुरुवार को SC में एनसीडीआरसी द्वारा दर्ज मामले में सुनवाई चल रही थी. मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी के वकीलों ने मैगी में सीसा होने की बात स्वीकार कर ली. कंपनी के  वकीलों की इस स्वीकारोक्ति से सरकार बनाम नेस्ले की लड़ाई ने फिर जोर पकड़ लिया है.  जान लें कि पिछले साल स्वास्थ्य सुरक्षा के मानदंडों पर खरा न उतरने के कारण टनों की मात्रा में मैगी नष्ट कर दी गयी थी. साथ ही सरकार ने मुआवजे के तौर पर 640 करोड़ रुपये की डिमांड की थी. सुनवाई के क्म में सुप्रीम कोर्ट के जज ने नेस्ले के वकील से पूछा कि उन्हें लेड की मौजूदगी वाला नूडल क्यों खाना चाहिए? वकील ने पहले तर्क दिया था कि मैगी में सीसे की मात्रा परमीसिबल सीमा के अंदर थी, जबकि अब स्वीकार कर रहे हैं कि मैगी में सीसा था.  जानकारी दे दें कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने जून, 2015 में निश्चित सीमा से अधिक लेड (सीसा) पाये जाने की वजह से नेस्ले के लोकप्रिय नूडल ब्रांड मैगी पर प्रतिबंध लगा दिया था.   कंपनी को बाजार से अपने उत्पाद वापस लेने पड़े थे और इसके बाद सरकार ने एनसीडीआरसी का रुख किया था.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत

नेस्ले ने बयान जारी कर कहा कि नेस्ले इंडिया मैगी नूडल मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करती है.  न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई), मैसुरु की रपट आगे की कार्यवाही का आधार बनेगी.  सीएफटीआरआई में मैगी नूडल के नमूनों की जांच की गयी थी. नेस्ले के अनुसार  सीएफटीआरआई का विश्लेषण दिखाता है कि मैगी नूडल के नमूनों में सीसे और अन्य सामग्री तय मानकों के अनुरुप ही थे.  हालांकि नेस्ले इंडिया ने कहा कि आदेश प्राप्त होने के बाद ही अधिक जानकारी मिल सकेगी.  सुप्रीम कोर्ट में सीएफटीआरआई नेस्ले द्वारा एनसीडीआरसी के अंतरिम आदेश को चुनौती दिये जाने के बाद आयोग की कार्यवाही पर स्थगन लगा दिया था.

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