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नेपाल ने भारतीय सेना प्रमुख नरवणे के बयान को बताया देश के इतिहास का अपमान, दोनों ओर से बयानबाजी

New Delhi : एक ओर जहां पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है वहीं भारत का उसके पड़ोसी देशों से सीमा विवाद भी जारी है. एक ओर जहां चीन से साथ लद्दाख में सीमा पर तनाव है वहीं दूसरी तरफ भारत द्वारा लिपुलेख के पास सड़क बनाये जाने को लेकर विवाद हो रहा है.

भारत का पड़ोसी देश नेपाल लिपुलेख को लेकर लगातार बयानबाजी कर रहा है. हर दूसरे दिन नेपाल की तरफ से भारत के खिलाफ कोई न कोई बयान जारी होता है.

एक बार फिर नेपाल के रक्षामंत्री ईश्वर पोखरेल ने भारतीय सेना प्रमुख के बयान का जवाब दिया है. सेना प्रमुख नरवणे ने चीन की ओर इशारा करते हुए कहा था कि नेपाल किसी और के इशारों पर लिपुलेख मार्ग का विरोध कर रहा है.

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सेना प्रमुख के इस बयान पर नेपाल के रक्षामंत्री ने कहा कि ये उनके देश के इतिहास का अपमान है. उन्होंने भारतीय सेना प्रमुख पर राजनीतिक बयानबाजी का भी आरोप लगाया. पोखरेल ने ये बयान नेपाली अखबार को दिये एक इंटरव्यू के दौरान दिया.

लिपुलेख विवाद?

भारत ने हाल ही में लिपुलेख दर्रे को जोड़नेवाली एक लिंक रोड का उद्घाटन किया था. 17 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित लगभग 80 किलोमीटर लंबी यह लिंक रोड, तिब्बत में कैलाश मानसरोवर की यात्रा को कम करने के लिए बनायी जा रही है.

यहां के कुछ हिस्से पर नेपाल और भारत का सीमा विवाद है. इसलिए नेपाल ने इस पर अपना विरोध जताया. नेपाल के विदेश मंत्री ने इसे लेकर कहा था, ‘ये एकतरफा कार्रवाई है. यह हमारी आपसी समझ के खिलाफ है. सीमा संबंधी विवाद बातचीत के जरिए ही सुलझाये जाते रहे हैं.’

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नेपाल की भारत के खिलाफ बयानबाजी

नेपाल पिछले कई दिनों से भारत को किसी न किसी मुद्दे को लेकर घरने की कोशिश कर रहा है. इससे ठीक पहले नेपाल की प्रधानमंत्री केपी शर्मा ने एक विवादित बयान देते हुए कहा था कि, भारत से आनेवाले लोग नेपाल में कोरोना फैला रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत से आने वाले लोग बिना अपनी जांच कराये आ रहे हैं. जिससे कोरोना फैल रहा है.

सिर्फ इतना ही नहीं इसी महीने नेपाल कैबिनेट ने एक राजनैतिक मानचित्र को मंजूरी दी थी. जिसमें उसने कुछ भारतीय इलाकों को अपना बताया. इस नक्शे में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल के क्षेत्र में दिखाया गया था.

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