न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

न रोजगार मिला, न सैन फ्रांसिस्को से निवेश आया और न ही बनी बेसहारा लोगों के लिए कोई नीति

659

Ranchi : झारखंड में बहुमत की सरकार है. सरकार के मुखिया को इसका गुमान भी है. अक्सर कहते हैं कि हमने हर क्षेत्र में बहुत काम किया. झारखंड में ‘सबका साथ और सबका विकास’ हो रहा है. नेता-अधिकारी घोषणा कर, आदेश देकर हमें सपने दिखा जाते हैं. काम हुआ या नहीं, यह पूछने वाला कोई नहीं. इसे परखने के लिए न्यूज विंग ने “घोषणा करके भूल गयी सरकार” नाम से एक सीरीज शुरू की है. आज हम सरकार के तीनों साल में 29 सितंबर को सरकार द्वारा किये गये वादों और दिये गये आदेशों-निर्देशों पर बात करेंगे.

mi banner add

इसे भी पढ़ें: मुख्य सचिव न बनाये जाने से नाराज डीके तिवारी गये 15 दनों की छुट्टी पर

सरकार ने राज्य में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की घोषणा तो कई अवसरों पर की, पर तीन साल पहले 29 सितंबर 2015 को विभिन्न विभागों में 80 हजार युवाओं की नियुक्ति करने की घोषणा प्रमुखता से की थी. वह भी ये नियुक्तियां साल 2015 के खत्म होने से पहले की जानी थीं. यह घोषणा मुख्यमंत्री रघुवर दास ने गोड्डा में मुद्रा बैंक के उद्घाटन की तैयारियों का जायजा लेने के दौरान की थी. साल खत्म हो गया, दो और साल बीत गये पर ये नौकिरयां किन्हें मिलीं इसकी कोई जानकारी नहीं है.

इसे भी पढ़ें: लापरवाही: दुष्‍कर्म पीड़िता को भर्ती करने में रिम्‍स ने लगा दिये 5 घंटे

29 सितंबर 2016 को मुख्यमंत्री राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सैन फ्रांसिस्को पहुंचे. वहां पालो आल्टो स्थित एचपी वर्ल्ड के कार्यालय में उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें राज्य में निवेश करने का न्योता दिया. वहां उन्होंने इस बात की भी चर्चा की कि राज्य को तकनीकी रूप से कैसे विकसित किया जाये. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राज्य में निवेश बढ़ाना था. उन्होंने निवेशकों से यह भी कहा था कि वे उन्हें विकास में साझेदार बनाना चाहते हैं. दो साल बीत जाने के बाद अब तो उस बात की चर्चा भी नहीं हो रही है. न एचपी से कोई निवेश आया और न ही विकास में कोई साझेदार बना.

इसे भी पढ़ें: IL&FS संकट : 1,500 नॉन-बैंकिंग फाइनैंशल कंपनियों के रद्द हो सकते हैं लाइसेंस, झारखंड पर भी पड़ेगा असर

झारखंड हाइकोर्ट ने 29 सितंबर को राज्य सरकार से पूछा था कि क्या सरकार ने बेसहारा लोगों के लिए कोई नीति बनायी है. दरअसल झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में एक बेसहारा महिला को फर्श पर ही खाना परोसे जाने पर स्वतः संज्ञान लिया था. हाइकोर्ट ने सरकार ने पूछा था कि उसके पास बेसहारा लोगों के इलाज, भोजन, आवास आदि के लिए क्या योजना है. इस मामले में कोई नीति बनायी गयी है या नहीं. अधिकारी इस पर कोई ठोस जवाब नहीं दे सके थे. दो साल बीत जाने के बाद भी अब तक इस मामले में क्या हुआ किसी को जानकारी नहीं. बेसहारों को देखनेवाला कोई नहीं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: